28 जुलाई (का. चारु मजुमदार के शहादत दिवस) के मौके पर केन्द्रीय कमेटी का आह्वान
1. आज हम भारत में एक बिल्कुल विरोधाभासी दौर का सामना कर रहे हैं. अर्थव्यवस्था से लेकर रोजमर्रा के शासन और विदेश नीति तक, मोदी सरकार देश की भारी बहुसंख्यक जनता के लिए पूरी तरह विनाशकारी साबित हुई है. अयोध्या राम मंदिर की जमीन और चंदे का घोटाला, उज्जैन महाकाल जमीन घोटाला जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनका परिवार शामिल है, और लगातार हो रहे पेपर लीक ने मोदी सरकार के भ्रष्ट चरित्र को पहले से कहीं ज्यादा बेनकाब कर दिया है. यह सरकार भारत के युवाओं के भविष्य और करोड़ों श्रद्धालु हिंदुओं की आस्था दोनों के साथ खिलवाड़ करते हुए रंगे हाथों पकड़ी गई है.
2. फिर भी सरकार ने चुनावी मशीनरी और पूरे राज्य तंत्र पर अपनी पकड़ इस तरह मजबूत कर ली है कि आज भाजपा 20 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता पर काबिज है. जो क्षेत्रीय पार्टियां कभी बेहद ताकतवर मानी जाती थीं, वे सिर्फ चुनाव नहीं हार रही हैं, बल्कि मोदी सरकार की ‘लालच और दमन’ की नीति के सामने कई पार्टियां भीतर से टूटती और बिखरती जा रही हैं. सरकार किसी भी तरह संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना चाहती है, ताकि परिसीमन (डिलिमिटेशन) की अपनी योजना, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू कर सके, एसआईआर पूरा होने के बाद पूरे देश में एनआरसी थोप सके, और संविधान में कई दूसरे दूरगामी तथा कठोर संशोधन कर सके.
3. यानी भारत में फासीवाद अब अपने असली रूप में सामने आ रहा है और हमें इस फासीवादी हमले के खिलाफ अपना प्रतिरोध और तेज करना होगा. क्रांतिकारी कम्युनिस्ट होने के नाते, भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन और भाकपा(माले) की महान विरासत के वारिस होने के नाते, हमें इस चुनौतीपूर्ण दौर का सामना तीन बुनियादी कम्युनिस्ट गुणों के साथ करना है: साहस, धैर्य और दृढ़ता. ऐसा मुश्किल दौर हमारे संगठन की ताकत, उसकी परिपक्वता और जनता के साथ हमारे रिश्तों की गहराई की परीक्षा लेती है. यह वक्त है जनता के बीच गहराई से जाने का, खोखली बातों, सतही कार्यशैली, निराशा और निष्क्रियता को छोड़ने का, और मेहनत के जरिए उम्मीद व भरोसा पैदा करने का.
4. मोदी सरकार भारत को डर के गणतंत्र में बदलने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारत की जनता डटकर मुकाबला कर रही है. काॅरपोरेट लूट के खिलाफ आदिवासियों की ताकतवर लड़ाइयां, बेहतर मजदूरी के लिए मजदूरों के आंदोलन, पेपर लीक के खिलाफ और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के प्रदर्शन, बुलडोजर कार्रवाई, तोड़फोड़ और बेदखली के खिलाफ विरोध – ये सब देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे हैं. नक्सलबाड़ी के क्रांतिकारी किसान उभार से प्रेरणा लेकर बनी पार्टी होने के नाते, और जनता के जोशीले संघर्ष की ताकत से टिकी हुई पार्टी होने के नाते, हमें लोकतंत्र और सामाजिक बदलाव की आज की लड़ाइयों में अपनी पूरी भूमिका निभानी है. हर पार्टी कमेटी और ब्रांच इस मामले में अपने कामकाज का आकलन करे.
5. जनसंघर्षों का अगुआ और केंद्र बनने की अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए हमें एक साथ अपना जनाधार और जनता के बीच कामों का विस्तार करने के साथ-साथ पार्टी संगठन को भी मजबूत करना है. हर पार्टी कमेटी अपने इलाके में सक्रिय जनसंगठनों और उनके काम की समीक्षा करे. जहां-जहां हमारी मौजूदगी है, वहां जनसंगठनों का दायरा बढ़ाने और जनता के बीच अपने कामकाज और प्रभाव को और मजबूत करने की संभावनाओं का आकलन करें.
6. अगर हम भारतीय समाज की उम्र संरचना पर नजर डालें, तो देश की आधी से ज्यादा आबादी 30 साल से कम उम्र की है और तीन में से दो भारतीय 40 साल से कम उम्र के हैं. हर पार्टी कमेटी अपने-अपने इलाके में पार्टी सदस्यता का भी इसी नजरिये से आकलन करे. संभावना है कि हमारे ज्यादातर इलाकाई पार्टी संगठनों में तीन में से दो सदस्य 40 साल से ऊपर के होंगे. हमारी पार्टी सदस्यता और कमेटी ढांचे में एक और बड़ी असमानता महिलाओं की कम भागीदारी है. महिलाएं हमारे समाज और आबादी का आधा हिस्सा हैं, लेकिन पार्टी सदस्यता और विभिन्न स्तरों की कमेटियों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत के बीच है. हर कमेटी पार्टी में ज्यादा युवा सदस्यों और महिलाओं की भर्ती की ठोस योजना बनाए.
7. आजकल हमें ज्यादातर जानकारी व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब से मिलती है. अखबार और टीवी चैनल अब ज्यादातर भाजपा और आरएसएस के मुखपत्र बन चुके हैं. लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर भी संघ परिवार, कांग्रेस, आप और दूसरी क्षेत्रीय ताकतवर पार्टियों का भारी दबदबा है. हमें फर्जी खबरों और नफरत फैलाने वाले प्रचार के जाल में फंसने से बचना है. यह तभी मुमकिन है जब हम खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल नियमित रूप से देखें और उनको फाॅलो करें. सभी पार्टी कमेटियां इसकी पक्की गारंटी करें कि अपने इलाके के सभी साथियों के मोबाइल फोन नंबर हमारे पास हों और सभी साथी हमारे सोशल मीडिया हैंडल से जुड़े हों. पार्टी के जमीनी संगठन को हमारे डिजिटल ढांचे का पूरा साथ मिलना चाहिए, और जोर इस बात पर होना चाहिए कि हम अपनी गतिविधियों और पार्टी के विचारों को असरदार तरीके से प्रचार-प्रसार करें.
8. हमारी पार्टी की आने वाली 12वीं कांग्रेस, जो 2028 की शुरुआत में होनी है, अब दो साल से भी कम दूर है. हमें अपनी बेहतरीन परंपराओं को आगे बढ़ाने और आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी ताकत के साथ कांग्रेस में जुटना है. झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हाल में हुए कम्युनिस्ट ताकतों के एकीकरण और अलग-अलग मोर्चों पर पार्टी के काम के विस्तार को देखते हुए, हमें अब तक पांच लाख सदस्यता के स्तर तक पहुंच जाना चाहिए था. लेकिन हमारी नवीनीकरण (रिन्यूअल) प्रक्रिया में लगातार देरी और नए सदस्यों की भर्ती पर लगातार और व्यवस्थित जोर न होने की वजह से, हम अब भी करीब दो लाख के आसपास ही हैं. हमारा वार्षिक नवीनीकरण आमतौर पर 22 अप्रैल तक कभी पूरा नहीं होता और 28 जुलाई तक खिंचता रहता है. 22 अप्रैल, 28 जुलाई और 18 दिसंबर के आसपास मौसमी लेवी की वसूली और ब्रांच बैठकों के आयोजन का रिकाॅर्ड अब भी बहुत कमजोर है. सभी कमेटियां अपनी सदस्यता नवीनीकरण और भर्ती के तरीके को बेहतर बनाने के सुझाव दें. केन्द्रीय कमेटी ने तय किया है कि 22 अप्रैल के बाद जमा होने वाली सदस्यता नवीनीकरण रिपोर्ट पर लेट फीस लगाई जाएगी.
9. केन्द्रीय कमेटी के आह्वान के मुताबिक, सभी जिला कमेटियों, एरिया (ब्लाॅक) कमेटियों, लोकल (पंचायत) कमेटियों और पार्टी ब्रांचों की बैठक 16 से 31 जुलाई के बीच होनी चाहिए, जिसकी शुरुआत जिला कमेटियों से होगी और अंत ब्रांचों पर होगा. जिला कमेटियां पार्टी के जमीनी ढांचे (एरिया व लोकल कमेटियों और ब्रांचों) और केन्द्रीय कमेटी व राज्य कमेटियों जैसे ऊपरी कमेटियों के बीच पुल का काम करती हैं. इस दौरान जिला कमेटियों और नेतृत्वकारी टीमों को यह पक्का करना है कि इस नोट पर हर स्तर पर चर्चा हो और फीडबैक तुरंत केन्द्रीय कमेटी और संबंधित राज्य कमेटियों को भेजा जाए, जिसमें इस प्रक्रिया में शामिल हुई एरिया व लोकल कमेटियों और ब्रांचों की संख्या के साथ-साथ उन निचली कमेटियों और ब्रांचों का भी जिक्र हो जो बैठक और चर्चा करने में नाकाम रहीं.