वर्ष 35 / अंक - 42 / एसकेएम की बैठक: एसआइआर व किसान मुद्दों पर तेज होग...

एसकेएम की बैठक: एसआइआर व किसान मुद्दों पर तेज होगा किसान आंदोलन

एसकेएम की बैठक: एसआइआर व किसान मुद्दों पर तेज होगा किसान आंदोलन

12 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल स्थित जाट भवन में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की राष्ट्रीय परिषद/आम सभा की बैठक में किसान आंदोलन को तेज करने और 26 नवंबर को नई दिल्ली सहित पूरे देश में विशाल प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया. प्रदर्शन के स्थानों का निर्णय एसकेएम की राज्य इकाइयां करेंगी. इस प्रदर्शन में लाखों किसान भाग लेंगे. 26 नवंबर ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दिल्ली की सीमाओं पर शुरू होने की छठी वर्षगांठ है.

बैठक में एसआइआर के मुद्दे पर छात्र एवं युवा प्रदर्शनकारियों के समर्थन में किसानों को लामबंद करने का निर्णय लिया गया. इसके तहत 23 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में सभी जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर विशाल प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया. एसकेएम का नेतृत्व नई दिल्ली में जारी संघर्ष में भाग लेगा.

एसकेएम ने नई दिल्ली में दिल्ली पुलिस और आरएसएस-भाजपा के आपराधिक तत्वों द्वारा प्रदर्शनकारियों, जिनमें युवा छात्राएं भी शामिल हैं, के खिलाफ की जा रही बर्बर दमनात्मक कार्रवाई और यातना की कड़ी निंदा की. एसकेएम ने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रखती है, तो देशभर के किसान उनकी – विशेषकर महिलाओं, छात्रों और युवाओं की – रक्षा के लिए आगे आएंगे. विरोध प्रदर्शन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करना संविधान तथा कानून के शासन के विरुद्ध है.

एसकेएम की बैठक ने न्यायपालिका, जिसमें सर्वाेच्च न्यायालय भी शामिल है, की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने राजधानी में व्यापक रूप से हो रहे अपराधों का स्वतः संज्ञान नहीं लिया और तत्काल कार्रवाई नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. बैठक ने देशभर के किसानों और आम जनता से लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में एकजुट होने का आह्वान किया.

एसकेएम ने एसआइआर को तत्काल रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके विरुद्ध अभियोजन चलाने, बिना पारदर्शिता के मतदाता सूचियों से हटाए गए सभी 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने तथा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में संशोधन करने की मांग की. एसकेएम ने यह भी मांग की कि चयन समिति में कैबिनेट मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए.

एसकेएम ने किसानों से सभी सात प्रमुख मांगें पूरी होने तक कई दिनों तक चलने वाले संघर्षों और लगातार आंदोलनात्मक कार्रवाइयों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया. ये मांगें हैं:

  1. एमएसपी की कानूनी गारंटी: C2+50% के फार्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाला कानून बनाया जाए.
  2. मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विरोध: सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रोका जाए.
  3. कर्ज माफी और मुआवजा: किसानों की कर्ज माफी की जाए तथा आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रूपये का मुआवजा दिया जाए.
  4. पेंशन और बीमा: किसानों के लिए पेंशन और बीमा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
  5. बिजली और बीज पर नियंत्रण: बिजली के निजीकरण और बीज विधेयक 2025 को रोका जाए.
  6. भूमि अधिकारों की रक्षा: किसानों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की जाए.
  7. श्रमिक अधिकार और रोजगार: चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए तथा मनरेगा को बहाल किया जाए.

डाॅ. अशोक धावले, जोगिंदर सिंह उगराहां, राकेश टिकैत, राजन क्षीरसागर, डाॅ. सुनीलम, जगतार सिंह बैवां और जोगिंदर नैन के सात सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने बैठक की अध्यक्षता की. रतन सिंह मान ने स्वागत किया और पी. कृष्णप्रसाद ने एजेंडा प्रस्तुत किया.

17 October, 2026