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चौथे स्मृति दिवस पर कामरेड रामदेव वर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई

चौथे स्मृति दिवस पर कामरेड रामदेव वर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई

22 मई 2026 को मिथिलांचल के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता और समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र से 1985 से 2010 के बीच कई बार विधायक रहे का. रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस के मौके पर उनके गांव पतेलिया और समस्तीपुर में कई कार्यक्रम आयोजित हुए.

भाकपा(माले) महासचिव  का. दीपंकर भट्टाचार्य, पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्यों – अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेन्द्र झा व ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की महासचिव व विधान पार्षद शशि यादव, भाकपा(माले) केन्द्रीय कमेटी के सदस्यों – पूर्व विधायिका व का. रामदेव वर्मा की जीवनसंगिनी का. मंजू प्रकाश, समकालीन लोकयुद्ध के संपादक का. संतोष सहर व मीडिया प्रभारी कुमार परवेज सहित अन्य नेताओं ने पतेलिया गांव अवस्थित का. रामदेव वर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण व झंडोत्तोलन कार्यक्रम में शिरकत की. इस मौके पर ही का. दीपंकर भट्टाचार्य की अध्यक्षता में विधान पार्षद का. शशि यादव के हाथों गांव की मुख्य सड़क पर ‘का. रामदेव वर्मा स्मृति द्वार’ का शिलान्यास भी किया गया और भाकपा(माले) की समस्तीपुर जिला कमेटी द्वारा समस्तीपुर के जननायक कर्पूरी ठाकुर सभागार में ‘बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज’ विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया.

सेमिनार को संबोधित करते हुए का. शशि यादव ने कहा कि रामदेव वर्मा आजीवन कम्युनिस्ट बने रहे. हम सब संकल्प लेते हैं कि उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए संघर्ष की विरासत को मजबूत करेंगे. भाजपा बिहार में बुलडोजर राज लागू करना चाहती है, लेकिन जनता इसे सफल नहीं होने देगी. उन्होंने महिला आरक्षण को अविलंब लागू करने की मांग की, इसकी आड़ में संसदीय सीटों के मनमाना व भेदभावपूर्ण परिसीमन की भाजपाई चाल की कड़ी भत्र्सना की और महिलाओं-छात्राओं पर बढ़ती हिंसा  के खिलाफ संघर्ष की अपील की.

पूर्व विधायक और केंद्रीय कमिटी सदस्य मंजू प्रकाश ने कहा कि नई पीढ़ी को रामदेव वर्मा के संघर्षों से सीखने की जरूरत को सामने लाते हुए समस्तीपुर के सुन्दरैया नगर, जिसे गरीबों को बसाने के लिए तैयार किया गया था, कोे बुलडोजर से उजाड़ देने का विरोध करते हुए इस बस्ती को फिर से बसाने की लड़ाई छेड़ने की घोषणा की.

धीरेंद्र झा ने कहा कि का. रामदेव वर्मा की विरासत जनता के प्रतिरोध और सांप्रदायिकता विरोधी संघर्ष की विरासत है. जयमंगला गढ़ से लेकर उजियारपुर और मुसरीघरारी तक पार्टी कार्यकर्ताओं ने माॅब लिंचिंग, हत्या और अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है. आज समाजवादियों और कम्युनिस्टों की व्यापक एकता जरूरी है.

समस्तीपुर शहर में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, भीमराव आंबेडकर और कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण किया गया. इन कार्यक्रमों  में प्रो. सुरेंद्र सुमन, वंदना सिंह, डाॅ. प्रभात कुमार, रंजीत राम, फूल बाबू सिंह, ललन कुमार, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अजय कुमार आदि समेत  बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने हिस्सा लिया. सेमिनार का संचालन भाकपा(माले) के समस्तीपुर जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने किया.


सोशल मीडिया के प्रतिरोध को जमीन पर उतारें: दीपंकर भट्टाचार्य

सेमिनार के मुख्य वक्ता भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा:
“का. रामदेव वर्मा बीच के पांच वर्षों को छोड़कर 1980 से 2010 तक विधायक रहे और हर दौर में गरीबों, दलितों, वंचितों और मेहनतकश जनता की आवाज बनकर संघर्ष करते रहे. बड़े-बड़े राजनीतिक बदलावों के बावजूद रामदेव वर्मा ने कभी जनता का साथ नहीं छोड़ा और आज उनके संघर्षों की विरासत बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई को दिशा दे रही है.

पहले सरकारों को ‘लाठी-गोली और दमन की सरकार’ कहा जाता था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद ‘बुलडोजर राज’ नया राजनीतिक शब्द बन गया. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री को ‘बुलडोजर बाबा’ कहा गया और आज जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां बुलडोजर शासन का प्रतीक बन चुका है. उन्होंने कहा कि बिहार के बाद बंगाल के चुनाव परिणामों ने भी लोगों को चौंकाया है और अब वहां भी बुलडोजर संस्कृति लागू की जा रही है. आज देश में बुलडोजर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि भाजपा शासन की राजनीतिक पहचान और दमन का प्रतीक बन चुका है.

चुनाव के पहले बंगाल में झालमुड़ी की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब रेलवे स्टेशन के पास छोटे-छोटे झालमुड़ी और चाय दुकानदारों को उजाड़ने की खबरें चर्चा में हैं. इसका मतलब साफ है कि छोटे दुकानदारों और गरीब मेहनतकशों की रोजी-रोटी खत्म कर बड़ी कंपनियों के लिए रास्ता बनाया जा रहा है. यह हमला केवल दुकानों पर नहीं, बल्कि गरीबों की जिंदगी और आत्मनिर्भरता पर हमला है. बंगाल में बकरीद में बीफ के छोटे व्यापारियों पर पाबंदी लगा दी गई है और लाइसेंस के नाम पर छोटे दुकानदारों को खत्म कर काॅरपोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश रची जा रही है.

पहले कहा गया कि बुलडोजर अपराधियों और माफियाओं पर चलेगा, लेकिन अब बिना न्यायिक प्रक्रिया के किसी को भी अपराधी घोषित कर कार्रवाई की जा रही है. अपराधी कौन है? यह तय करने का अधिकार अदालतों और न्याय व्यवस्था का था, लेकिन अब सत्ता अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए बुलडोजर और एनकाउंटर की राजनीति चला रही है. किसी को बांग्लादेशी, अतिक्रमणकारी या देशविरोधी कहकर गरीबों, आदिवासियों, मुसलमानों, किसानों और विरोध की आवाजों को निशाना बनाया जा रहा है. बिहार में चुनाव के पहले गरीबों को दस हजार रुपये देने की बातें होती हैं और चुनाव के बाद उन्हीं गरीबों पर बुलडोजर चला दिया जाता है.

आज देश में सबसे बड़ा सवाल शिक्षा और रोजगार का है. नीट परीक्षा में पेपर लीक 22 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. पिछले दस वर्षों से लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और एनटीए जैसी संस्थाओं पर किसी लोकतांत्रिक जवाबदेही का नियंत्रण नहीं है. पूरी परीक्षा प्रणाली को संघ परिवार के प्रभाव में चलाया जा रहा है.

बिहार में राजधानी पटना में TRE-4 अभ्यर्थियों के आंदोलन पर लाठीचार्ज हुआ. लड़कियों तक को नहीं बख्शा गया और शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि छात्राओं को सड़क पर आने की जरूरत क्या थी. आज नौजवानों की आवाज को दबाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है.

आज डिग्रियां मिल रही हैं लेकिन स्थायी रोजगार खत्म हो रहे हैं. बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के सवाल राष्ट्रीय बहस से गायब हैं. उन्होंने कहा कि कभी पेट्रोल 40 रुपये होने के वादे किए जाते थे, लेकिन आज उसकी कीमत आसमान छू रही है, रुपया लगातार गिर रहा है और रसोई गैस गरीबों की पहुंच से बाहर हो गई है. मजदूरी और अधिकार की मांग करने वालों को जेल में डाला जा रहा है.

जब देश के प्रधान न्यायाधीश ने सोशल मीडिया एक्टिविस्टों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहा, तब देश की नई पीढ़ी ने उसी शब्द को प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर “भाजपा के खिलाफ काॅकरोच जनता पार्टी” के नाम से उभरा प्रतिरोध इस बात का संकेत है कि देश का नौजवान अब भाजपा के खिलाफ खुलकर खड़ा हो रहा है. जो नौजवान कभी ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते थे, वही आज बेरोजगारी, महंगाई और असुरक्षा के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज बन रहे हैं.

‘काॅकरोच’ दरअसल देश के नौजवानों के विरोध का विस्फोट है. अभी यह प्रतिरोध डिजिटल रूप में दिख रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह सड़कों पर भी दिखाई देगा. हमें सोशल मीडिया की इस आवाज को जमीन के आंदोलनों से जोड़ना होगा और शिक्षा मंत्री तथा केंद्र सरकार से जवाब मांगना होगा.

भाजपा पर बलात्कारियों का संरक्षण बनी हुई है. बिहार की नीट छात्रा को अब तक न्याय नहीं मिला. लेबर कोड, अंबानी-अडानी केंद्रित नीतियों और टाउनशिप परियोजनाओं के जरिए गरीबों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है. बिना उचित मुआवजे के जमीन अधिग्रहण की कोशिशें तेज हो रही हैं. इन सबके खिलाफ जनता की व्यापक आवाज को संगठित करना होगा.”


23 May, 2026