हम ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के विचार और बुलडोजर राज का पूरी ताकत से विरोध करेंगे. लोगों को अपने वोट के अधिकार की रक्षा के लिए सतर्क और संगठित होना चाहिए. हम मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे विदेशी व्यापार समझौतों के खिलाफ बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू करेंगे, जो हमारी खेती और खुदरा व्यापार को बर्बाद कर रहे हैं – भाकपा(माले) लिबरेशन के महासचिव का. दीपकर भट्टाचार्य और आरएमपीआइ के नेता का. मंगत राम पासला ने लुधियाना (पंजाब) के अंबेडकर भवन में विगत 7 जून 2026 को आयोजित संयुक्त जनसुनवाई को संबोधित करते हुए यह कहा. दोनों नेताओं ने एक जैसी सोच रखने वाली सभी ताकतों को इकट्टा कर एक जनपक्षीय राजनीतिक विकल्प बनाने के लिए अपनी पूरी तकात लगाने ऐलान किया.
लाल और नीले झंडों से सजा लुधियाना (पंजाब) का ‘अंबेडकर भवन’ विगत 7 जून 2026 को सामाजिक बदलाव के लिए लड़ रही ताकतों की एकता का एक अलौकिक नजारा पेश कर रहा था. चिलचिलाती गर्मी के बावजूद, लुधियाना शहर समेत पंजाब के सभी जिलों से सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता – मजदूर-किसान, महिलायें और छात्र-नौजवान बड़ी संख्या में इस जन सुनवाई का हिस्सा बनने पहुंचे थे.
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विस्तारवादी, साम्राज्यवादी और नस्लवादी युद्धों और हमलों में मारे गए सभी बेगुनाह लोगों और दिल्ली के होटल में आग लगने की घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई जनसुनवाई की अध्यक्षता देश के चर्चित किसान नेताओं – का. रुलदू सिंह मानसा और का. रतन सिंह रंधावा ने की. भाकपा(माले) लिबरेशन (CPIML-L) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य और रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (RMPI) के महासचिव का. मंगत राम पासला इस जन सुनवाई के मुख्य वक्ता थे. पंजाब के जाने-माने अंबेडकरवादी विचारक एडवोकेट एसएल विरदी, आरएमपीआइ के राज्य सचिव का. परगट सिंह जमाराई, भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता का. सुखदर्शन सिंह नत्त, सामाजिक संघर्ष पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हरविंदर कौर, भारत मुक्ति मोर्चा के राज्य अध्यक्ष दलविंदर सिंह ने भी जन सुनवाई में अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर जयपाल सिंह ने और आए हुए नेताओं और लोगों का स्वागत कामरेड चित्तरंजन ने किया.
जन सुनवाई को सबोधित करते हुए का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के बाद एसआइआर की चपेट में आने वाला अगला राज्य पंजाब होगा. इन दोनों राज्यों में एसआइआर के जरिए लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. इस योजना को नाकाम करने के लिए पंजाबियों को जागरूक और संगठित होना होगा. बिहार और पश्चिम बंगाल का अनुभव हमें बताता है कि मतदाता सूची से नाम हटाना उस श्रृंखला का पहला कदम है जो किसी नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करते हैं. जबकि, ऐसे लोगों के घर, दुकानें वगैरह बुलडोजर से गिराकर उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है. इतना ही नहीं, मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को राशन और दूसरी जनकल्याणकरी योजनाओं के लाभ लेने से भी वंचित किया जा रहा है. ऊपर बताई गई पाॅलिसी-पैटर्न का सबसे अमानवीय पहलू यह है कि लोगों को कंसंट्रेशन कैंप (टाॅर्चर सेंटर) में बंद किया जा रहा है. लेकिन पंजाब के बहादुर लोग इन जनविरोधी नीतियों और बुलडोजर राज को जरूर रोकेंगे.
उन्होंने कहा कि पंजाब ने करीब साढ़े चार साल पहले ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव का सामना किया था. उस समय पंजाब के लोगों ने ‘आम आदमी पार्टी’ को राज्य के किसानों-मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की मांगों और मुद्दों को हल करने का एक शानदार मौका दिया था. लेकिन ‘आप’ सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में बुरी तरह विफल रही है. इस बीच मोदी सरकार पिछले दरवाजे से काॅर्पाेरेट-समर्थक कृषि कानून थोपनें में लगी हुई है. कानून को बदलकर एफसीआइ को अडानी ग्रुप को सौंपा जा रहा है और अमेरिका को देश के कृषि क्षेत्र और खुदरा ब्यापार पर कब्जा करने की खुली छूट दी जा रही है. पूरे भारत में 20,000 रुपये महीने की न्यूनतम मजदूरी की मांग कर रहे कारखना मजदूरों को देश विरोधी घोषित करके झूठे मुकदमों में जेल भेजा जा रहा है. जो छात्र-युवा बार-बार पेपर लीक होने की वजह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं, उन्हें न्यायपालिका भी काॅकरोच, पैरासाइट और संस्थाओं पर हमला करने वाला बता रही है. अपनी लड़ाकू परंपराओं को निभाते हुए पंजाब को सभी पीड़ित किसानों-मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के पक्ष में खड़ा होना चाहिए. हमें ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे गुमराह करने वाले नारों के खिलाफ और लोकतंत्र, संघीय ढांचे, धर्मनिरपेक्षता और ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांतों के पक्ष में डटकर खड़ा होना चाहिए.
आरएमपीआइ के महासचिव का. मंगत राम पासला ने कहा कि मोदी सरकार आरएसएस के एजेंडे के तहत देश के संविधान, धर्मनिरपेक्षता और संघीय ढांचे को खत्म करके एक धर्म-आधारित, कट्टर हिंदुत्ववादी राष्ट्र बनाने का रास्ता बना रही है. इस नापाक मकसद के लिए वह एक घोर सांप्रदायिक, जातिवादी और तानाशाही राजनीतिक व्यवस्था बनाना चाहती है. केंद्र को मजबूत करने की आड़ में देश में ढांचा खड़ा किया जा रहा है. इसका इरादा लोगों के वोट देने के अधिकार समेत सभी बुनियादी अधिकार छीनना है. संघ परिवार और भाजपा के कार्यकर्ता धार्मिक और राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों, दलितों और महिलाओं पर लगातार हमले कर रहे हैं. ये गुंडे पूरे देश में, जिसमें ज्यादातर हिंदू आबादी भी शामिल है, गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी अनगिनत मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. भारत के राजनीतिक और आर्थिक हितों को नजरअंदाज करते हुए, भाजपा सरकार अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों के साथ ऐसे व्यापार समझौते कर रही है जो हमारी खेती और खुदरा व्यापार को बर्बाद कर रहे हैं और देश को ‘नवउपनिवेशवादी’ गुलामी की जंजीरों में जकड़ रहे हैं.
का. पासला ने कहा कि भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों में ‘साम-दाम-दंड-भेद’ के सभी हथियारों का इस्तेमाल कर पंजाब में सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है. लेफ्ट पार्टियां, अंबेडकरवादी संगठन और समान सोच वाली अन्य ताकतें एसआइआर की मनमानी का पूरी ताकत से विरोध करने और पंजाब में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प बनाने का पक्का इरादा कर चुकी हैं.
कार्यक्रम में भाकपा(माले) के पंजाब राज्य प्रभारी का. पुरुषोत्तम शर्मा, राजविंदर सिंह राणा, किसान नेता डाॅ. सतनाम सिंह अजनाला, गुरनाम सिंह भीखी, महिपाल, रघबीर सिंह बेनीपाल, ऐपवा नेत्री जसबीर कौर नत्त, जयप्रकाश नारायण, गोविंद सिंह छाजली और बलबीर सिंह झमका आदि वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे.
– जयप्रकाश नारायण