सजा होने के तीन महीने से उपर हो जाने के बाद भी बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू सिंह की बिहार विधानसभा की सदस्यता रद्द नहीं होना गंभीर संवैधानिक एवं कानूनी सवाल है.
भाकपा(माले) ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर साहेबगंज विधायक राजू सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की है.
विदित हो कि 98-साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित भाजपा विधायक श्री राजू कुमार सिंह को 4 जुलाई 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हत्या एवं आर्म्स एक्ट के मामले में चार साल की सजा सुनाई. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. लेकिन सजा होने के तीन महीने से उपर हो जाने के बाद भी अभी तक भाजपा विधायक राजू सिंह की बिहार विधानसभा की सदस्यता रद्द नहीं की गई है. बिहार विधानसभा की उनकी सदस्यता समाप्त होने तथा साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र की सीट रिक्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया में हो रही देरी गंभीर संवैधानिक एवं कानूनी सवाल खड़े करती है.
भाकपा(माले) राज्य सचिव का. कुणाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, किसी व्यक्ति को दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास की सजा सुनाए जाने के दिन से ही उसकी सदस्यता रद्द हो जानी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा में अगियांव विधानसभा क्षेत्र (सुरक्षित) से भाकपा(माले) विधायक मनोज मंजिल को एक मामले में 12 फरवरी 2024 को उन्हें दोषी करार दिए जाने के बाद तत्काल उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी और इसके बाद अगियांव विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ करा दिए गए थे. ऐसे में यह आवश्यक है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों के मामलों में कानून का समान रूप से पालन हो. यदि समान कानूनी परिस्थितियों में अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो इससे विधानसभा की निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं. हमारी मांग है कि अविलंब उनकी सदस्यता रद्द की जाए.