वर्ष 35 / अंक - 24 / बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर कार्यक्रमों की धूम

बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर कार्यक्रमों की धूम

बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर कार्यक्रमों की धूम

‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा की 126वीं शहादत दिवस के मौके पर संपूर्ण झारखंड में बहुविध आयोजित कार्यक्रमों की धूम रही. उलगुलान के महानायक बिरसा मुंडा के 127वें शहादत दिवस के अवसर पर भाकपा(माले) के झारखंड राज्य सचिव का. मनोज भक्त ने उनके उलगुलान के प्रारंभिक केंद्र डोम्बारी बुरू (खूंटी) तथा कोकर (रांची) स्थित समाधि स्थल पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की. इस अवसर पर उन्होंने बिरसा मुंडा को क्रांतिकारी सलाम पेश करते हुए उनकी संघर्षशील और जनपक्षधर विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया.

उन्होंने कहा कि जल-जंगल-जमीन तथा आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और प्रतिरोध के प्रतीक उलगुलान के महानायक बिरसा मुंडा आज भी शोषण, दमन और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं. उनका जीवन और संघर्ष आज की फासीवादी-कारपोरेटपरस्त शासन व्यवस्था के खिलाफ जारी जनप्रतिरोध की लड़ाइयों को दिशा प्रदान करता है. भाकपा(माले) हमेशा से बिरसा मुंडा की उलगुलानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संघर्षरत रही है. पार्टी उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में मजबूती से खड़ी रहेगी तथा डोम्बारी बुरू तथा आसपास के क्षेत्रों के समावेशी विकास, आदिवासी अधिकारों और जनसरोकारों के सवालों पर निरंतर संघर्ष करती रहेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि डिलिस्टिंग के माध्यम से आदिवासी समाज को विभाजित कर प्राकृतिक संसाधनों को काॅरपोरेट पूंजी के हवाले करने के भाजपा के मंसूबों को परास्त करना समय की मांग है. पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को मजबूत करना तथा बिरसा मुंडा की उलगुलानी परंपरा को आगे बढ़ाना आज का प्रमुख संकल्प होना चाहिए.

माल्यार्पण कार्यक्रम में राज्य कमेटी सदस्य आरएन सिंह, सनिका मुंडा, बुद्धन लाल मुंडा, आकाश रंजन, सोहेल अंसारी, विजय कुमार सहित दर्जनों साथी उपस्थित थे.

चतरा में इस मौके पर भाकपा(माले) के बैनर तले चतरा काॅलेज मैदान से डीएफओ कार्यालय तक विशाल मार्च एवं प्रदर्शन आयोजित किया गया. इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों की संख्या में आदिवासी व अन्य ग्रामीण समुदाय – मजदूर-किसान, महिला, युवा आदि शामिल हुए. हाथों में लाल झंडा और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए लोगों ने गगनभेदी नारों के साथ पूरे चतरा शहर को गुंजायमान कर दिया. यह मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए डीएफओ कार्यालय पहुंचा, जहां बहुत देर तक प्रदर्शन व सभा करने के बाद वनवासियों एवं ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तरी एवं दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारियों को मांग-पत्र सौंपा गया.

सभा को भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य व बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, पांकी (म.) जिला परिषद सदस्य खुशबू कुमारी, भाकपा(माले) के जिला प्रभारी भुनेश्वर बेदिया, आइसा राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ सहित दर्जनों नेताओं नेे संबोधित किया. सभा का संचालन भाकपा(माले) जिला सचिव मनोज प्रजापति ने किया.

वक्ताओं ने कहा कि ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन तथा आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था. हमें उनके सपनों को साकार करने तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लेना चाहिए.

कहा कि चतरा आज भी एक बड़ा आदिवासी बहुल वन क्षेत्र वाला जिला है, जहां वन अधिकार पट्टा, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क और बिजली आपूर्ति में बुनियादी समस्याएं गंभीर रूप से मौजूद हैं. वनवासी परिवार पीढ़ियों से जंगल और जमीन पर आश्रित हैं, लेकिन उन्हें आज भी अनको वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत प्राप्त अधिकार नहीं मिल पा रहा है. दूसरी ओर, वन विभाग द्वारा उत्पीड़न, बेदखली की कार्रवाई और झूठे मुकदमों के जरिए गरीबों को परेशान किया जा रहा है जबकि सर्वाेच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बिना समुचित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के किसी भी व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता. इसलिए वन विभाग और प्रशासन को संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए. वक्ताओं ने आदिवासी एवं पारंपरिक वनवासी परिवारों को अविलंब वन अधिकार पट्टा देने, ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी परिवार को वन भूमि से बेदखल करने पर रोक लगाने, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप वृक्षारोपण कर उसकी जिम्मेदारी ग्राम सभाओं को सौंपने तथा वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की.

उन्होंने वन भूमि को काॅरपोरेट कंपनियों के हवाले करने की नीतियों पर रोक लगाने, जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने. वर्ष 2025-26 के दौरान हाथियों द्वारा फसलों, मकानों एवं अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का अविलंब मुआवजा देने, वनवासियों पर दर्ज झूठे एवं मनगढ़ंत मुकदमों को वापस लेने, वन अधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा डाढ़ा पावर ग्रिड के लिए आवश्यक एनओसी जारी कर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग भी की. विदित हो कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित डाढ़ा पावर ग्रिड वन विभाग की एनओसी के अभाव में बंद पड़ा है, जिससे पूरे क्षेत्र के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है.

गोविंदपुर (धनबाद) में इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने, संगठन को मजबूत करने तथा मजदूर-किसान आंदोलनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाकपा(माले) के राज्य स्थायी समिति सदस्य कार्तिक प्रसाद, प्रखंड सचिव गोपाल महतो, वरिष्ठ साथी जमशेद अंसारी, राम विश्वकर्मा, शफीक अंसारी सहित अनेक साथी उपस्थित थे.

रैलीगढ़ा (हजारीबाग) स्थित पार्टी कार्यालय के समीप माल्यार्पण व श्रद्धांजलि के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) केंद्रीय कमेटी नेता का. आरडी मांझी ने बताया कि जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 9 -30 जून तक चलने वाले राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए तथा प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ जनजागरण पैदा किया जाएगा. का. राजेंद्र गोप, शाहिद अंसारी, सुंदरलाल व उमेश बेदिया, गोदान महतो, युनुस अंसारी, तपेश्वर करमाली, तुलसी हांसदा, खेमलाल महतो, उमेश राम, जगदीश महतो, सहित कई साथी मौजूद रहे. धरती आबा बिरसा मुंडा के संघर्षों को आगे बढ़ाने तथा जल, जंगल, जमीन और जनाधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ सभा समाप्त हुई.

13 June, 2026