28 सितंबर को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस पर बाबा बूझा सिंह भवन (मानसा, पंजाब) में देश की मौजूदा परिस्थितियों पर एक विचार गोष्ठी आयोजित हुई और मोटरसाइकिल मार्च निकाला गया और भगत सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया.
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) केंद्रीय कमेटी सदस्य का. राजविंदर सिंह राणा ने कहा कि अंग्रेजों के शासन के दौरान केवल पूंजीपतियों और जमींदारों को ही वोट देने का अधिकार था. भगत सिंह, उनके साथियों और हजारों देशभक्तों के बलिदानों की बदौलत देश आजाद हुआ और डाॅ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के वोट देने का अधिकार दिया. अब मोदी सरकार अपने पसंदीदा चुनाव आयुक्तों के माध्यम से आम लोगों से यह संवैधानिक अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है. एसआइआर के माध्यम से देशभर में लगभग 13 करोड़ आम लोगों के वोट काट दिए गए हैं, जो लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला है. उन्होंने पंजाब में चल रही एसआइआर प्रक्रिया को तुरंत बंद पुरानी मतदाता सूचियों के आधार पर ही मतदान का अधिकार बहाल करने की मांग की. आरवाइए नेता हैप्पी मान, आइसा नेता सुखजीत रामानंदी तथा हरविंदर चोटियां ने युवाओं को आरवाइए के ‘रोजगार दो आंदोलन’ में युवाओं सें शामिल होने का आह्वान किया और मान सरकार ‘नशे के खिलाफ युद्ध’ अभियान को फर्जी बताया.
गोष्ठी को ऐपवा नेत्री जसवीर कौर नत्त, भाकपा(माले) जिला सचिव सुरिंदर शर्मा, अमरीक फफड़े, गुरजंट सिंह मानसा, नरेंद्र कौर, कंवलदीप सिंह, बलविंदर घरागणा, गुरसेवक सिंह मान आदि ने भी संबोधित किया.