वर्ष 35 / अंक - 40 / दिल्ली विवि में छात्र आंदोलन: यौन हिंसा का विरोध,...

दिल्ली विवि में छात्र आंदोलन: यौन हिंसा का विरोध, पितृसत्ता को खत्म करने की मांग

दिल्ली विवि में छात्र आंदोलन: यौन हिंसा का विरोध, पितृसत्ता को खत्म करने की मांग

आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप के बाद, यौन हिंसा और पितृसत्तात्मक पाबंदियों के खिलाफ विरोध कर रही महिलाओं के समर्थन में दिल्ली में लेडी श्रीराम काॅलेज फाॅर विमेन की सैकड़ों छात्राएं सड़कों पर उतरीं. इन विरोध प्रदर्शनों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई काॅलेजों के छात्रों को एक साथ ला खड़ा किया है. वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि महिलाओं को बिना किसी डर के पढ़ने, काम करने, यात्रा करने और सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल करने की आजादी होनी चाहिए.

दिल्ली विवि की छात्राओं ने काॅलेज और आस्था कुंज पार्क के आस-पास के इलाकों में सिर्फ महिलाओं के लिए एक एकजुटता मार्च निकाला और उसके बाद धरना दिया. इस विरोध प्रदर्शन का मकसद सार्वजनिक जगहों पर अपना हक जताना और सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदियां लगाने की कोशिशों को नकारना था. छात्राओं ने रेप कल्चर, माॅरल पुलिसिंग और पितृसत्ता के खिलाफ नारे लगाए, जैसे: ‘मिरांडा से लेडी श्रीराम तक, उन्नाव से दिल्ली तक, पितृसत्ता को खत्म करो!’

28 सितंबर को मिरांडा हाउस और दिल्ली यूनिवर्सिटी के दूसरे काॅलेजों के छात्रों ने ‘हम औरतें आजाद हैं’ के बैनर तले मार्च निकालकर विरोध जारी रखा. छात्रों ने सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की, जैसे कि सड़कों पर अच्छी रोशनी, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक शौचालयों तक आसान पहुंच. उन्होंने यौन हिंसा के जवाब में हाॅस्टल में कर्फ्यू लगाने और महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदियां लगाने का विरोध किया. उनका कहना था कि महिलाओं के साथ हुए अपराधों की सजा महिलाओं को नहीं दी जा सकती.

छात्रों के साथ-साथ वामपंथी और प्रगतिशील छात्रा कार्यकर्ताओं – आइसा कार्यकर्ताओं – ने भी इस मुहिम का समर्थन किया.

केंद्र और दिल्ली में बीजेपी सरकारें महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही हैं. हाल के महीनों में दिल्ली और देश भर से रेप, यौन उत्पीड़न और हिंसा के कई मामले सामने आए हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को सजा दिलाने में बीजेपी सरकारों की नाकामी को उजागर करते हैं. हिंसा को बढ़ावा देने वाले ढांचों और सामाजिक हालात का सामना करने के बजाय, सरकार का रवैया महिलाओं पर पाबंदियां लगाने और उनकी आवाजाही व आजादी को नियंत्रित करने का ही रहा है.

महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद महिलाओं पर नहीं डाली जा सकती. कर्फ्यू, हाॅस्टल के समय पर पाबंदियां और रात में सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल न करने की चेतावनी देने से रेप कल्चर या पितृसत्तात्मक सत्ता को कोई चुनौती नहीं मिलती. असल में जरूरत है दोषियों की जवाबदेही तय करने, असरदार पुलिसिंग और ऐसे सार्वजनिक अधिसंरचना की, जिससे महिलाएं बेझिझक आ-जा सकें. इसलिए, छात्रों के ये विरोध-प्रदर्शन सिर्फ सुरक्षित कैंपस की मांग नहीं हैं. ये उस सिस्टम को चुनौती हैं जो महिलाओं की आजादी पर तो कंट्रोल करना चाहता है, लेकिन उन्हें हिंसा से बचाने में नाकाम रहता है. छात्र साफ शब्दों में कह रहे हैं: हम औरतें आजाद हैं. पितृसत्ता को खत्म करो.

03 October, 2026