वर्ष 35 / अंक - 36 / वामपंथी और किसान कार्यकर्ताओं पर निगरानी डोजियर

वामपंथी और किसान कार्यकर्ताओं पर निगरानी डोजियर

वामपंथी और किसान कार्यकर्ताओं पर निगरानी डोजियर

उत्तर प्रदेश की योगी-भाजपा सरकार ने वामपंथी दलों और किसान आंदोलनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ बदले की भावना से बड़े पैमाने पर दमनकारी कार्रवाई शुरू की है. राज्य पुलिस ने अपने खुफिया तंत्र को पूरे प्रदेश के राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर विस्तृत ‘निगरानी डोजियर’ (सर्विलांस डोजियर) तैयार करने का निर्देश दिया है.

यह कदम भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल और चेतावनियों के बाद उठाया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार अब राजनीतिक रूप से निशाना बनाने और असहमति व जन-आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल कर रही है.

पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था), उत्तर प्रदेश द्वारा जारी पत्र संख्या डी.जी.-896(1) 2026 (डोजियर)/11046, दिनांक 18 अगस्त 2026 के माध्यम से एक पुलिस सर्कुलर जारी कर डोजियर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, प्रयागराज जोन ने ‘सूचना डोजियर (सीएए/एनआरसी/सक्रिय सदस्यों की सूची)/2026’ शीर्षक से एक पत्र जारी किया, जिसमें सक्रिय वामपंथी राजनीतिक दलों और संगठनों के व्यक्तियों व पदाधिकारियों के विस्तृत डोजियर तैयार करने और उन्हें 20 अगस्त तक जमा करने का निर्देश दिया गया.

डोजियर के प्रारूप में कार्यकर्ताओं के बारे में अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारियों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है. इसमें उनके नाम और पते, आधार, पैन और पासपोर्ट का विवरण, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की पूरी जानकारी मांगी गई है. इसके अलावा पारिवारिक वंशावली (फैमिली ट्री), आपराधिक इतिहास, व्यवसाय, संपत्ति विवाद व अन्य विवाद, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का विवरण, आय के स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संपर्कों की जानकारी भी मांगी गई है.

इसी तरह के सूचना पत्रक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भाकपा(माले) और अन्य वामपंथी कार्यकर्ताओं को भेजे गए हैं. स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) के कर्मी फोन पर कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रहे हैं और व्हाट्सएप व फोन काॅल के जरिए अधिकांश जानकारियां मांग रहे हैं. इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को यह चेतावनी भी दी जा रही है कि जानकारी न देने पर वे खुद जिम्मेदार होंगे.

भाकपा(माले) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव सुधाकर यादव ने इस राजनीतिक उत्पीड़न की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति और जन-आंदोलनों को कुचलने के लिए नेताओं और कार्यकर्ताओं के निजी जीवन में गैर-कानूनी दखल देने हेतु खुफिया तंत्र को लगाया गया है. भाकपा(माले) ने कहा कि राजनीतिक निगरानी के लिए इतनी व्यापक व्यक्तिगत जानकारी जुटाना मौलिक निजता के अधिकार का खुला उल्लंघन है. योगी सरकार छात्रों, नौजवानों (जिनमें जेन जी और जेन अल्फा शामिल हैं) और सचेत नागरिकों के बढ़ते प्रतिरोध से पूरी तरह घबराई हुई है. वह सवाल पूछने, विरोध करने और लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले हर नागरिक से डर रही है. उत्तर प्रदेश को फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में मौतों के जरिए पहले ही ‘पुलिस राज’ बना दिया गया है और अब इसे पूरी तरह ‘निगरानी राज्य’ (सर्विलांस स्टेट) में तब्दील करने की तैयारी चल रही है. उन्होंने राजनीतिक निगरानी डोजियर तैयार करने पर तत्काल रोक लगाने तथा वामपंथी कार्यकर्ताओं, किसान आंदोलन के कार्यकर्ताओं और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सभी लोगों को निशाना बनाने के लिए पुलिस व खुफिया तंत्र का दुरुपयोग बंद करने की मांग की है.

05 September, 2026