वर्ष 35 / अंक - 36 / खान व खनिज संशोधन (विकास एवं विनियमन) विधेयक-2026...

खान व खनिज संशोधन (विकास एवं विनियमन) विधेयक-2026 वापस लो!

खान व खनिज संशोधन (विकास एवं विनियमन) विधेयक-2026 वापस लो!

भाकपा(माले) का राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम (30 अगस्त) के तहत रामगढ़ के चुम्बा (मांडू प्रखंड) में भाकपा(माले) कार्यक्रम आयोजित कर लोकसभा में पारित खान एवं खनिज (विकास विनियमन) विधेयक 2026 का जोरदार रूप से प्रतिवाद किया गया. भाकपा माले कार्यकर्ताओं में केंद्र की सरकार नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया गया एवं विधेयक की प्रतियां भी जलाई गई.

प्रतिवादकारियों ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने जल-जंगल-जमीन और खनिज की लूट और इन संसाधनों को काॅर्पाेरेट कंपनियों के हवाले करने के लिए ही यह विधेयक लाया है. जल-जंगल-जमीन हमारा है. स्थानीय अधिकार, हमारा अधिकार है, हमारा संसाधन हमारे लिए है, खनिज संपदा पर पहला हक झारखंड का है. हम इसे नहीं छीनने देंगे. झारखंड को संघीय अधिकारों से वंचित करने का साजिश और झारखंडी जनता के साथ गद्दारी नहीं चलेगी.

प्रतिवाद कार्यक्रम में उपस्थित भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य भुनेश्वर बेदिया ने कहा कि एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार सार्वजनिक संस्थानों-प्रतिष्ठानों और उद्योगों को एक के बाद एक बेचते चली जा रही है तो दूसरी तरफ अपने काॅरपोरेट मित्रों से इस झारखखड जैसे गरीब प्रदेश के संपूर्ण खनिज संपदा की बेलगाम लूट के लिए खान व खनिज संशोधन विधेयक (विकास एवं विनियमन) 2026 को लोकसभा से पारित की है. यह विधेयक झारखंडी जनता के साथ गद्दारी एवं कुठाराघात है. यह झारखंड को संघीय अधिकारों से वंचित करने की साजिश है. झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के विकास में रुकावट खड़ी करने का विद्वेषपूर्ण कदम है. इस विधेयक से झारखंड प्रदेश में चलाए जा रहे कई प्रकार के जन कल्याणकारी योजनाओं पर गंभीर असर पड़ेगा. केंद्र सरकार इस विधेयक को अविलंब वापस ले.


आदिवासी संगठनों की सहमति हासिल करे परिसीमन कमिटी - भाकपा(माले)

30 अगस्त, रांची: भाकपा(माले) राज्य कमिटी आदिवासी एकता महाजुटान रैली की घोषणाओं का समर्थन करती है और मांग करती है कि परिसीमन प्रक्रिया के पहले आरक्षित सीटों के मामले में परिसीमन कमिटी आदिवासी संगठनों की सहमति हासिल करे.

जनसंख्या अनुपात के नाम पर आदिवासी सीटों का प्रतिशत या उनकी प्रभावी राजनीतिक स्थिति कमजोर करने की किसी भी कोशिश को भाकपा(माले) स्वीकार नहीं करेगी.

आदिवासियों की सीटों के प्रतिशत या प्रभावी संख्या में गिरावट, आदिवासी समुदायों की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर घातक हमला होगा.

पार्टी केंद्र सरकार को सतर्क करती है कि आदिवासी सीटों के प्रतिशत या प्रभावी संख्या में गिरावट की कोई भी कोशिश झारखड के लिए विनाशकारी साबित होगी.

05 September, 2026