2016_10_18_1अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) व ट्रेड यूनियन ऐक्टू द्वारा संयुक्त रूप से हल्द्वानी के नगर निगमा सभागार में “एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला” का आयोजन किया गया। महिला कार्यशाला में राज्य भर से आशा, आंगनबाड़ी, भोजन माता, किसान महिलाएं, घरेलू महिलाएं व छात्राएं शामिल हुईं।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए “ऐपवा” की राष्ट्रीय सचिव शशि यादव ने कहा कि, “देश में महिलाओं पर हमले तेज हुए हैं। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद इस तरह की प्रवृति में इजाफा हुआ है। आर.एस.एस. प्रमुख मोहन भागवत का यह कहना कि महिलाओं को घर की चाहरदीवारी में ही रहना चाहिए, इस मानसिकता को दिखाता है कि कामकाजी महिलाओं के प्रति उनका नजरिया क्या है। कुल मिलाकर महिलाओं के प्रति फासीवादी-दमनकारी रूझान बनाने की कोशिशें हो रही हैं।”

उन्होंने कहा कि, “इस प्रवृति का मुकाबला करते हुए महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आकर संघर्ष कर रही हैं। पर महिलाओं को अपने श्रम का सही दाम नहीं मिल रहा है। महिला कमगारों के लिए समान काम का समान वेतन का कानून झुनझुना साबित हो रहा है। आशा-आंगनबाड़ी-भोजनमाता-फैक्ट्री मजदूर के रूप में काम कर रही महिलाओं के श्रम का खुला शोषण हो रहा है। इस दमनकारी नीति के खिलाफ एक विशाल महिला आंदोलन जो श्रम के सम्मान और समान काम का समान वेतन और महिलाओं के लिए सम्मानजनक कार्य स्थितियों के लिए संघर्ष जैसे मुद्दों पर आधारित हो आज समय की मांग है।”

2016_10_18_2उन्होंने बताया कि, “देश के सभी महिला आंदोलनों को एक करने के लिए और महिलाओं पर बढ़ रहे फासीवादी-पितृसत्तात्मक हमले के खिलाफ ‘ऐपवा’ का राष्ट्रीय सम्मेलन पटना में 13-14 नवम्बर से होगा जिसमें उत्तराखण्ड समेत पूरे देश की महिलाएं शिरकत करेंगी।”

उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने आयी हुई सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि, “महिलाओं ने घर और बाहर दोनों जगह संघर्ष के बल पर ही सब कुछ हासिल किया है।”

कार्यशाला की अध्यक्षता आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष दीपा पाण्डेय ने की। इस अवसर पर विमला रौथाण, बसंती बिष्ट, मीना आर्या, रीता कश्यप, इंद्रा देउपा, निर्मला पाल, हीरा भट्ट, सरोज पंत, उषा पंत, मुन्नी बिष्ट, रीना बाला, रमा, रूपा, ज्योति उपाध्याय, ममता आर्या लीला महर, भगवती सनवाल, रूबी भारद्वाज, शीला मौनी, लीला ठाकुर, जसमती कुंवर, कमला बधानी, रजनी भट्ट, कुलविंदर कौर, गोविंदी, लक्ष्मी, इंद्रा नेगी, पुरुषोत्तम शर्मा, बहादुर सिंह जंगी, राजेंद्र शाह, ललित मटियाली, आनंद नेगी, के. के. बोरा, संजय शर्मा, कैलाश पाण्डेय, आदि ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यशाला में आंगनबाड़ी वर्कर्स, मिंडा वर्कर्स के चल रहे आंदोलनों के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर उनकी मांगें माने जाने की अपील की गयी।