छात्राओं को पंख लगाने की बजाए पंख कतरने में लगे हैं नीतीश कुमार, स्कूल-काॅलेज बन गए हैं कत्लगाह: मीना तिवारी.

प्रेस हैंड आउट (11 January)
वैशाली के अंबेदकर कन्या वि़द्यालय छात्रा हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच कराये सरकार. हत्यारे-बलात्कारी की शिनाख्त कर अविलंब कड़ी सजा दी जाए.
17 जनवरी को राज्यव्यापी प्रतिवाद.
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पटना 11 जनवरी 2016
वैशाली के दौलतपुर के राजकीय अंबेदकर कन्या आवासीय विद्यालय की 10 वीं कक्षा में पढ़ रही मेरी बेटी ने दिनांक 6 जनवरी की शाम में मुझे फोन किया और मुझे स्कूल आने को कहा. अगली सुबह 7 जनवरी को मैं स्कूल पहुंची. बेटी ने मुझसे किसी सर का जिक्र करते हुए कहा कि – ‘सर गलत कार्य करने को कहते हैं. कहते हैं कि ऐसा करोगी तो परीक्षा में नंबर बढ़वा देंगे.’ इतना सुनने के बाद मैंने कहा कि प्राचार्य से बात करती हूं. मेरी बेटी ने मुझे रोकते हुए कहा -‘नहीं, मां, तुम्हारे जाने के बाद मुझे ये मारे-पीटेंगे.’ मैंने एक न सुनी और अपनी बेटी का झोला-सामान लेकर चलने को कहा. जब मैं अपनी बेटी को हाॅस्टल से घर ले जाने लगी, तो वहां के शिक्षकों ने उसे मेरे साथ जाने नहीं दिया. उसका झोला वगैरह छीन लिया और मुझे स्कूल के गेट से बाहर कर दिया गया. मैं निराश होकर घर लौट आई, शाम में उससे बात हुई.

अगले दिन फकुली पुलिस थाने के जरिए मुझे पता चला कि मेरी बेटी इस दुनिया में नहीं रही. जब मैं स्कूल पहुंची, तो उसके शरीर के चीथड़े कर दिए गए थे. उसके दोनों ब्रेस्ट और जांघ में चाकू मारा गया था. उसकी लाश को हाॅस्टल के नीचे वाली नाली में फेंक दिया गया था. लाश को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसकी बेदर्द हत्या के पहलेे उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को भी अंजाम दिया गया था. उक्त बातें मुजफ्फरपुर जिले के महादलित परिवार से आने वाली मृतक छात्रा की मां कुसुमी देवी ने बताया.

भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी सदस्य व ऐपवा की महासचिव काॅ. मीना तिवारी ने कहा कि इस बर्बर घटना की जांच करने माले-ऐपवा व आइसा की एक राज्यस्तरीय टीम वैशाली स्थित स्कूल और मृतका के घर पर पहुंची. इस टीम में उनके अलावा आइसा के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन, राज्य अध्यक्ष मोख्तार, वैशाली जिला ऐपवा की नेता शीला देवी, विश्वेश्वर यादव और मुजफ्फरपुर के साथी थे.

उन्होंने कहा कि जब उनकी टीम राजकीय अंबेदकर कन्या आवासीय उच्च विद्यालय पहुंची, तो पता चला कि स्कूल के प्राचार्य को सस्पेंड कर दिया गया है और प्रभारी प्राचार्य डीएम के यहां किसी बैठक में हैं. स्कूल में कुछ पुरुष शिक्षकों व रसोइया से मुलाकात हुई. स्कूल में कुछ महिला शिक्षक भी हैं. लेकिन कैंपस में न तो कोई शिक्षक रूकते हैं, न वार्डन. कहने को तीन गार्ड हैं, उसमें एक महिला है. महिला गार्ड अभी डीएम के यहां सेवा दे रही हैं. विद्यालय हाजीपुर-महुआ रोड में मुख्य शहर से तीन किमी की दूरी पर है. वह सुनसान इलाका है. स्कूली महिला छात्रावास में मेडिकल आदि चीजों की कोई व्यवस्था नहीं है. सब कुछ भगवान भरोसे है.

स्कूल में तो जांच टीम को कुछ खास पता नहीं चला, लेकिन मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड में मृतका की सहपाठियों ने कहा कि 7 जनवरी की रात में गार्ड ने उक्त छात्रा को पानी देने के बहाने आवाज देकर बुलाई. कुछ देर में उसके चिल्लाने की आवाज आई और फिर वह रात में दुबारा नहीं लौटी. सुबह उसकी लाश नाले में मिली.

छात्राओं के साथ इस तरह की घटना इस स्कूल में कोई नई बात नहीं है. एक दूसरी लड़की ने आज से 1 साल पहले किसी एक अन्य लड़की के साथ बलात्कार व उसकी हत्या की चर्चा की. खुद मृतका के साथ छठी क्लास में एक बार छेड़-छाड़ की घटना शिक्षकों द्वारा हुई, जिसका उसने जबरदस्त विरोध किया था. स्कूल का कैंपस पूरी तरह असुरक्षित है. मुख्य गेट में ताला तक नहीं है. जहां छात्राओं के परिजनों के अंदर प्रवेश पर रोक है, वहीं कैंपस के भीतर कल्याण पदाधिकारी, खाना बनाने वाले एनजीओ चलाने वाले लड़के और गार्ड की सहमति से बाहर से आने वाले लड़कों का प्रवेश बेरोक-टोक जारी रहता है.

जांच टीम ने कहा कि इस वीभत्स बलात्कार-हत्या कांड की उच्चस्तरीय जांच करायी जानी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी. ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि बिहार में तथाकथित सामाजिक न्याय की सरकार में कमजोर वर्ग की छात्राओं पर बढ़ता दमन सरकार का असली चेहरा उजागर हो रहा है. नीतीश सरकार छात्राओं के सशक्तीकरण का दावा कर रही है, लेकिन आज सरकारी विद्यालय तक छात्र-छात्राओं के लिए कत्लगाह बन चुके हैं. छात्राओं को पंख देने की बजाए, सरकार उनका पंख उखाड़ने में लगी है. स्कूलों-काॅलेजों में पढ़ने वाली छात्रायें भयानक शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न से गुजर रही हैं. सरकार लंबे-चैड़े वादे व डींग हांकने की बजाए इस वीभत्स स्थिति पर गंभीरता से विचार करे.

उन्होंने पीड़िता के परिवार को 20 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी और तमाम स्कूल-कैंपसों में सुरक्षा की मांग उठायी. उन्होंने कहा कि इस बर्बर घटना के खिलाफ पीड़ितो के न्याय के सवाल पर हम राज्यव्यापी आंदोलन चलायेंगे. आज 11 जनवरी की शाम सभी जिला मुख्यालयों पर कैंडल मार्च निकाला जाएगा, 17 जनवरी को रोहित वेमुला की शहादत दिवस के दिन भी राज्यव्यापी प्रतिवाद आयोजित किये जाएंगे.

मीना तिवारी, महासचिव, ऐपवा
कुसुमी देवी, पीड़िता की माता
शिवप्रकाश रंजन, राज्य सचिव आइसा
नवीन कुमार, राज्य सचिव, इनौस

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