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संकल्प दिवस पर कॉरेपोरेट फासीवाद का मुकाबला करने का संकल्प

18_Dec_2016लालकुआं, बिन्दुखत्ता, 18 दिसम्बर 2016

भाकपा(माले) के पूर्व महासचिव कॉमरेड विनोद मिश्र की 18 वीं पुण्यतिथि पर भाकपा(माले) की जिला कमेटी ने संकल्प दिवस मनाया। कॉमरेड विनोद मिश्र को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर पुष्प अर्पित किये।

कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रथोली ने कहा कि विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी पार्टी को आगे बढ़ाने की सीख कॉमरेड विनोद मिश्र ने दी है। आज फिर से मोदी सरकार द्वारा तैयार कॉरेपोरेट फासीवाद का मुकाबला वामपंथ को करना है।

राजेन्द्र प्रथोली ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने कालेधन को निकालने के नाम पर देश में आर्थिक आपातकाल लगा रखा है। मोदी सरकार काला धन को आधी कीमत पर सफेद करने की सरकारी एजेंसी बन गयी है। अच्छे दिन लाने के नाम पर जो नोटबंदी की गयी उससे देश के बड़े पूंजीपति लाभान्वित हो रहे हैं। आम जनता की बैंक में जमा की गयी मेहनत की कमाई को अम्बानी-अडानी-विजय माल्या का कर्ज माफ करने में मोदी सरकार ने लगा दिया है। मेहनतकश जनता , आम आदमी नोटबंदी से परेशान हैं। लाखों मजदूरों का रोजगार नोटबंदी से छिन गया है, किसान बीज, खाद, पानी न मिलने से परेशान है, छोटे उद्योग व व्यापार बंद होने की कगार पर हैं। लेकिन मोदी सरकार इसे अच्छे दिन बोल रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नोटबंदी कर जिस कालेधन और जाली नोट को खत्म करने की बात की थी उसका परिणाम उल्टा ही आ रहा है। कालेधन के नाम पर बहुत ही छोटी राशि आयी है। जबकि पूरी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर कई गुना नुकसान मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले ने कर दिया है और 90 से अधिक लोग जान से हाथ धो चुके हैं। मोदी जी ने बैंक व एटीएम की लाइनों में लगी आम जनता को ही काले धन वाला बता रहे है जबकि खुद उनकी पार्टी के नेताओं के पास नये व पुराने नोट लाखों-करोड़ों की संख्या में पकड़े जा रहे हैं। उन्होंने मोदी सरकार के नोटबंदी के खिलाफ चल रहे अभियान को 30 दिसम्बर को जुलूस प्रदर्शन के माध्यम से समापन करने की बात कही।

कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए भाकपा(माले) प्रत्याशी पुरूषोत्तम शर्मा ने कहा कि भाकपा(माले) ने विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए अपनी पहचान बनाई है। भाकपा(माले) ने जनता को गोलबंद कर सड़कों पर उतारकर सरकारों को विकास कार्य करने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका हटाने की लड़ाई 2 साल तक भाकपा(माले) ने लड़कर जीती है। लेकिन लड़ाई जमीन का मालिकाना हक मिलने तक जारी रहेगी। उन्होंने बिन्दुखत्ता में बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से अपराधों के खिलाफ एकजुट होने का आवहान किया।

संकल्प सभा में आनन्द नेगी, भुवन जोशी, आनन्द सिजवाली, स्वरूप सिंह दानू, बसंती बिष्ट, विमला रौथाण, मुबारक शाह, राजेन्द्र शाह, पान सिंह कोरंगा, बिशनदत्त जोशी, नैन सिंह कोरंगा, कमलापति जोशी, दीवान सिंह जलाल, कमल जोशी, पुष्कर दुबड़िया, गोविंद , सौरभ, प्रवीन सिंह दानू, निर्मला शाही, हरीश गोस्वामी, मोहन थापा, खीम सिंह वर्मा, हुकुम सिंह, ज्ञानचंद, राधा देवी, सुरमा देवी, सुधा देवी,  गोपाल सिंह बोरा,पान सिंह  समेत कई लोग थे। संचालन ललित मटियाली ने किया।

भाकपा(माले) के विधाना सभा प्रत्याशी कॉमरेड पुरूषोत्तम शर्मा ने बैठक कर लोगों की समस्याएं सुनीं

लालकुआं,  5 दिसम्बर 2016

6 decभाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य पुरूषोत्त शर्मा ने लालकुआं विधानसभा में स्थित खत्तों का दौरा कर रेखाल खत्ता व डोली खत्ता में बैठक कर लोगों की समस्याएं सुनी और विधानसभा चुनाव में उनके मुद्दों पर उठाने की बात कही।

इस दौरान खत्तों में हुई बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा(माले) प्रत्याशी कॉमरेड पुरूषोत्तम शर्मा ने विपक्ष विहीन उत्तराखंड विधानसभा में जनसंघर्षों की आवाज भाकपा (माले) को पहुंचाने की अपील की। आजादी के 70 साल तक भाजपा-कांग्रेस ने खत्तों में 1 लाख से ज्यादा आबादी को कोई भी बुनियादी व नागरिक पहचान दिलाने के बजाय वोट बैंक के रूप में ही इस्तेमाल किया है। 2011 से खत्तावासियों को आंदोलन से जोड़कर भाकपा माले ने कई सुविधाओं को दिलाया है। खत्तों का परिवार रजिस्टर बनवाना, समाज कल्याण विभाग की योजनाओं का लाभ, पहचान पत्र, आधार, आंगनबाड़ी केंद्र, आशा, सरकारी स्कूल और गोबर की बिक्री का अधिकार जैसे अधिकार खत्तावासियों को भाकपा (माले) के आंदोलन से मिले। उन्होंने कहा कि अगर वे लालकुआं से विधानसभा चुनाव जीतते हैं तो बिन्दुखत्ता सहित सभी खत्तों और वन भूमि पर बसे सभी गांवों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौंचालयों का अनुदान दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि खत्तों को ग्राम पंचायतों से जोड़ने और उन्हें विकास की मुख्य धारा जोड़ने के लिए माले संकल्पबद्ध है।

कामरेड शर्मा ने कहा कि खत्ता वासियों, वन भूमि पर बसे लोगों तथा लालकुआं की मजदूर बस्तियों की भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि सिडकुल के मजदूरों के शोषण दमन के खिलाफ चल रहे संघर्षों की आवाज विधान सभा में पहुंचाना जरूरी है। कामरेड शर्मा ने कहा कि क्षेत्र की पेयजल और सिचाई समस्या के स्थायी समाधान के लिए जमरानी में बाँध बनाने और भाबर क्षेत्र की आबादी से स्टोन क्रशरों को हटाने के लिए संघर्ष करेंगे।

कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता बहादुरसिंह जंगी ने किसान मजदूर विरोधी कांग्रेस भाजपा को उखाड़ फेंकने की अपील की । उन्होंने कहा कि भाकपा (माले) ने किसानों, मजदूरों और आम जनता के लिए संघषों की अगली कतार में खड़े कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। कार्यक्रम में माले नेता ललित मटियाली, कमल जोशी ने भी विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान महासभा के नेता किशन सिंह बिष्ट व जगदीष सनौरी ने की। बैठक में दीवान सिंह, सुरेश सिंह, हरीश सिंह, लक्ष्मण सिंह, जीवन चन्द्र, नारायण फर्त्याल, राम सिंह, सुन्दर सिंह, मुकेश बोरा, केदार सिंह, विजय, कुन्दन, चन्दन, हरीष बिष्ट, रमेष आर्या, जूप सिंह, गोपाल बोरा, शेर सिंह, पान सिंह, नवीन सिंह, गंगा देवी, हरूली देवी, कौशल्या देवी, हेमा, गीता, ललित बिष्ट, हरेन्द्र, विजय आर्या कार्यक्रम में गांव के युवाओं की अच्छी भागीदारी थी।

बिन्दुखत्ता नगर पालिका वापसी का शासनादेश जारी करने की मांग पर भाकपा (माले) का एक दिवसीय धरना 16 नवम्बर को

बिन्दुखत्ता, 7 नवम्बर 2016,
भाकपा (माले)और अखिल भारतीय किसान महासभा ने 16 नवम्बर को बिन्दुखत्ता नगर पालिका वापसी का शासनादेश जारी करने की मांग पर लालकुआं तहसील में विरोध धरना आयोजित करने की घोषणा की है। इस संबंध में आज कार रोड कार्यालय में दोनों संगठनों के मुख्य पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई।

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा ने इस एक दिवसीय धरने की घोषणा करते हुए कहा कि रावत सरकार बिन्दुखत्ता वासियों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा कि दो माह बीतने के बाद भी सरकार ने बिन्दुखत्ता नगर पालिका वापसी का शासनादेश जारी नहीं किया है। इसके साथ ही 14  अक्टूबर 2015 की आंदोलनकारियों पर लादे गए झूठे मुकदमे को भी इस सरकार ने वापस नहीं लिया है।

कामरेड शर्मा ने आरोप लगाया कि भूमि के मालिकाना के सवाल पर रावत सरकार गरीबों को गुमराह कर रही है। उन्होंने बिन्दुखत्ता की भूमि के मालिकाना हक के लिए भूमि के हस्तान्तरण की प्रक्रिया शुरू नहीं कराने के लिएट हरीश रावत सरकार की कड़ी  आलोचना की।

श्री शर्मा ने बताया कि उपरोक्त तीनों मांगों को लेकर लालकुआं तहसील पर यह विरोध धरना होगा। बैठक में राजेन्द्र शाह, कैलाश पाण्डेय, बसंती बिष्ट, पुष्कर दुबड़िया, गोविंद जीना, सुरमा देवी, विमला रौथाण, मोहन सिंह थापा, पान सिंह कोरंगा, नारायण सिंह, मंगल सिंह कोश्यारी, विपिन बोरा,  छविराम, ललित मटियाली आदि लोग थे।

भाकपा(माले) की राज्य कमेटी की बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पुरुषोत्तम शर्मा तथा इंद्रेश मैखुरी का नाम तय

भाकपा(माले) की राज्य कमेटी की गोपेश्वर में चल रही दो दिवसीय बैठक के मौके पर आयोजित प्रेस वार्ता में भाकपा(माले) ने राज्य के जन सरोकारों के मुद्दों को उठाते हुए आगामी विधान सभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति घोषित करते हुए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड राजेन्द्र प्रथोली ने कहा कि, “भाकपा(माले) आगामी विधानसभा चुनाव अन्य वामपंथी पार्टियों के साथ मिल कर लड़ेगी। इस दिशा में बातचीत जारी है। प्राथमिक रूप से भाकपा(माले) दो विधानसभा क्षेत्रों-लाल कुआँ में कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा और कर्णप्रयाग में इन्द्रेश मैखुरी को अपना प्रत्याशी घोषित करती है। शेष प्रत्याशियों की घोषणा अन्य वामपंथी पार्टियों के साथ चर्चा के पश्चात की जायेगी।”

वार्ता को सम्बोधित करते हुए कॉमरेड प्रथोली ने कहा कि, “उत्तराखंड में सत्तासीन हरीश रावत सरकार माफियायों की संरक्षक सरकार है। जिसका पूरा ध्यान शराब, खनन जैसे मामलों पर ही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है। कुछ दिन पूर्व बागेश्वर में दलित युवक सोहन राम की हत्या हो गयी। कल ही रुद्रपुर में एक युवती के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। इससे पहले रुद्रपुर में ही मजदूरों के हकों के लिए संघर्षरत ट्रेड यूनियन नेता और एक्टू के प्रदेश महामंत्री कामरेड के.के.बोरा पर अपराधी तत्वों ने जानलेवा हमला किया। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि उत्तराखंड में विधानसभा में विपक्ष सिरे से गायब है। जनता के मुद्दे केंद्र में आयें – इसके लिए जनपक्षीय संघर्षशील विपक्ष के निर्माण की जरुरत है। प्रदेश में वामपंथी पार्टियाँ मिल कर जनपक्षीय विपक्ष के निर्माण के लिए प्रयास तेज करेंगी।“

कॉमरेड प्रथोली ने आगे कहा कि, “केदारनाथ में 2013 की आपदा में मृत लोगों के कंकाल मिलना दर्शाता है कि आपदा राहत के कार्य में किस कदर आपराधिक लापरवाही बरती गई। इस आपराधिक लापरवाही में कांग्रेस-भाजपा दोनों की संलिप्तता है। विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री रहते हुए ही आपदा में मारे गए लोगों के शव ढूँढने की कार्यवाही बंद करने का ऐलान हुआ था। राहत और बचाव कार्यों में आपराधिक लापरवाही बरतने वाले विजय बहुगुणा को अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बना कर भाजपा ने आपदा घोटाले में स्वयं को भागीदार बना लिया है। विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद मुख्यमंत्री बने हरीश रावत ने भी आपदा में मारे लोगों के खोजबीन की कोई कोशिश नहीं की। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हालात जस के तस हैं पर हरीश रावत की सरकार कैलाश खेर के कार्यक्रम पर करोड़ों रूपया लुटवा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि, “हरीश रावत के राज में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गया है। दागी अधिकारियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्य सचिव के विरोध के बावजूद मुख्य मंत्री हरीश रावत ने दागदार रिकॉर्ड वाले सुमेर सिंह यादव को ऊर्जा निगम के महानिदेशक पद पर पुनः सेवा विस्तार दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे गोविन्द सिंह कुंजवाल पर विधायक निधि की बंदरबांट और विधानसभा में अपने चहेतों को नियुक्त करने का आरोप लगा है। लोकसेवा आयोग की नियुक्तियों तक में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जिससे उत्तराखंड के प्रतिभावान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।”

प्रेस वार्ता में राज्य में चल रहे विभिन्न आंदोलनों से एकजुटता जाहिर करते हुए कहा गया कि, “एक ओर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की हड़ताल को दो महीने पूरे होने को हैं पर सरकार उनकी वाजिब मांगों की तरफ ध्यान तक नहीं दे रही है। आशा और भोजनमाताओं के मामले में सरकार ने सिर्फ कोरी घोषणा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। वही दूसरी तरफ बिन्दुखत्ता में चले साल भर से अधिक लम्बे आन्दोलन के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत बिन्दुखत्ता से नगरपालिका वापसी की घोषणा को मजबूर तो हुए लेकिन आज तक इस घोषणा को लागू करने के लिए वैधानिक कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी। साथ ही निर्दोष आन्दोलनकारियों के खिलाफ फर्जी मुकदमे भी चल रहे हैं।”

राज्य सरकार की कारपोरेट परस्ती पर कहा गया कि, “नैनिसार में जिंदल को जमीन आवंटन के खिलाफ चले आन्दोलन पर दर्ज एफ.आई.आर. उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने की भाकपा(माले) स्वागत करती है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि हरीश रावत सरकार कारोपोरेटों को जमीन लुटवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।”

प्रेस वार्ता में राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्र प्रथोली, राज्य कमेटी के सदस्य और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा, वरिष्ठ किसान नेता कामरेड बहादुर सिंह जंगी, कामरेड आनंद सिंह नेगी, एक्टू के प्रदेश महामंत्री कामरेड के.के.बोरा,  भाकपा(माले) के नैनीताल जिला सचिव कामरेड कैलाश पाण्डेय, कामरेड इन्द्रेश मैखुरी, गढ़वाल सचिव कामरेड अतुल सती, कामरेड के.पी.चंदोला, कामरेड ललित मटियाली,  कामरेड रूबी भारद्वाज आदि शामिल थे।

गोपेश्ववर (चमोली) में भाकपा(माले) की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक प्रारंभ

भाकपा(माले) की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक आज प्रारंभ हुई. बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्र प्रथोली ने कहा कि अच्छे दिनों का वायदा लेकर सत्ता में आई केंद्र की मोदी सरकार के राज में देश के मेहनतकश गरीबों, मजदूरों, किसानों के दुर्दिन आ गए हैं. मंहगाई, बेरोजगारी अपने चरम पर है. औद्योगिक विकास की दर पिछले एक दशक में सबसे निम्नतम स्तर पर पहुँच गयी है. दालों सहित तमाम जरुरी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों 40 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ चुकी हैं. परन्तु मोदी सरकार तेल कंपनियों की जेबें भरने के लिए आये दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है.

माले के राज्य सचिव ने कहा कि मोदी सरकार सीमा पर मौजूदा तनाव को उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में चुनावी फायदे के लिए भुनाना चाहती है. इसलिए पूरे देश में युद्धोन्माद पैदा किया जा रहा है. युद्धोन्माद और साम्प्रदायिक घृणा की आड़ में जहां चुनाव जीतने के जतन किये जा रहे हैं, वहीं रक्षा सौदों में कमीशन खोरी के किस्से भी छन-छन कर बाहर आ रहे हैं. भाजपा सांसद वरुण गाँधी के मामले में एक विदेशी व्हिसिल ब्लोअर द्वारा प्रधानमन्त्री को भेजी चिट्ठी से एक बार फिर यह साफ़ हुआ कि राष्टवाद के नाम पर पूरे देश में उन्माद पैदा करने वाली भाजपा के सांसद कैसे अय्याशियों में फंस कर राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़ करते हुए रक्षा सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विदेशी दलालों को उपलब्ध करवा रहे हैं.

कामरेड राजेन्द्र प्रथोली ने कहा कि उत्तराखंड में सत्तासीन हरीश रावत सरकार माफियायों की संरक्षक सरकार है, जिसका पूरा ध्यान शराब, खनन जैसे मामलों पर ही है. जनता के सवालों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है. लोकसेवा आयोग से लेकर तमाम नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, जिससे उत्तराखंड के प्रतिभावान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. आपदा पीड़ितों के घाव आज भी हरे हैं और सरकार कैलाश खेर पर करोड़ों रुपये लुटा रही है. उत्तराखंड की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ करने में सत्ता और विधानसभा में मौजूद विपक्ष-भाजपा एकजुट हैं. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की हड़ताल को दो महीने पूरे होने को हैं  पर सरकार उनकी वाजिब मांगों की तरफ ध्यान तक नहीं दे रही है. आशा और भोजनमाताओं के मामले में सरकार ने सिर्फ कोरी घोषणा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है. समग्र में देखें तो महिला कामगारों के प्रति राज्य सरकार का रवैया उदासीनता भरा ही है. उन्होंने कहा कि बिन्दुखत्ता में चले साल भर से अधिक लम्बे आन्दोलन के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत बिन्दुखत्ता से नगरपालिका वापसी की घोषणा को मजबूर हुए. लेकिन आज तक इस घोषणा को लागू करने के लिए वैधानिक कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी है. साथ ही निर्दोष आन्दोलनकारियों के खिलाफ फर्जी मुकदमे भी चल रहे हैं.

भाजपा के दलित सम्मेलनों पर टिपण्णी करते हुए माले के राज्य सचिव ने कहा कि गुजरात से लेकर देश के तमाम हिस्सों में भाजपा द्वारा संरक्षित गौ रक्षक दलितों का उत्पीडन कर रहे हैं. भाजपा के दलित सम्मान सम्मलेन उस उत्पीडन को ढकने की कोशिश मात्र हैं. मंच पर सम्मान होगा और गलियों में दलित भाजपाई उत्पीडन के शिकार बनेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं का यह कथन कि उत्तराखंड में शिल्पकार होते हैं, दलित नहीं, दरअसल जातीय भेदभाव को ही वैधता प्रदान करने के लिए दिया गया बयान है. पिछले दिनों बागेश्वर में दलित युवक सोहन राम की हत्या ने जातीय भेदभाव के वीभत्स रूप को सामने ला दिया है. दलितों का सम्मान तो जातीय भेदभाव के खात्मे के बाद ही संभव है.

बैठक में भाकपा(माले) की राज्य कमेटी के सदस्य और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा, वरिष्ठ किसान नेता कामरेड बहादुर सिंह जंगी, कामरेड आनंद सिंह नेगी, एक्टू के प्रदेश महामंत्री कामरेड के.के.बोरा, भाकपा(माले) के नैनीताल जिला सचिव कामरेड कैलाश पाण्डेय, कामरेड इन्द्रेश मैखुरी, गढ़वाल सचिव कामरेड अतुल सती, कामरेड के.पी.चंदोला,कमरेड ललित मटियाली, कामरेड रूबी भारद्वाज आदि शामिल थे.
समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी थी और कल भी चलेगी.


 – इंद्रेश मैखुरी

हल्द्वानी में ऐपवा की एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

2016_10_18_1अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) व ट्रेड यूनियन ऐक्टू द्वारा संयुक्त रूप से हल्द्वानी के नगर निगमा सभागार में “एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला” का आयोजन किया गया। महिला कार्यशाला में राज्य भर से आशा, आंगनबाड़ी, भोजन माता, किसान महिलाएं, घरेलू महिलाएं व छात्राएं शामिल हुईं।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए “ऐपवा” की राष्ट्रीय सचिव शशि यादव ने कहा कि, “देश में महिलाओं पर हमले तेज हुए हैं। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद इस तरह की प्रवृति में इजाफा हुआ है। आर.एस.एस. प्रमुख मोहन भागवत का यह कहना कि महिलाओं को घर की चाहरदीवारी में ही रहना चाहिए, इस मानसिकता को दिखाता है कि कामकाजी महिलाओं के प्रति उनका नजरिया क्या है। कुल मिलाकर महिलाओं के प्रति फासीवादी-दमनकारी रूझान बनाने की कोशिशें हो रही हैं।”

उन्होंने कहा कि, “इस प्रवृति का मुकाबला करते हुए महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आकर संघर्ष कर रही हैं। पर महिलाओं को अपने श्रम का सही दाम नहीं मिल रहा है। महिला कमगारों के लिए समान काम का समान वेतन का कानून झुनझुना साबित हो रहा है। आशा-आंगनबाड़ी-भोजनमाता-फैक्ट्री मजदूर के रूप में काम कर रही महिलाओं के श्रम का खुला शोषण हो रहा है। इस दमनकारी नीति के खिलाफ एक विशाल महिला आंदोलन जो श्रम के सम्मान और समान काम का समान वेतन और महिलाओं के लिए सम्मानजनक कार्य स्थितियों के लिए संघर्ष जैसे मुद्दों पर आधारित हो आज समय की मांग है।”

2016_10_18_2उन्होंने बताया कि, “देश के सभी महिला आंदोलनों को एक करने के लिए और महिलाओं पर बढ़ रहे फासीवादी-पितृसत्तात्मक हमले के खिलाफ ‘ऐपवा’ का राष्ट्रीय सम्मेलन पटना में 13-14 नवम्बर से होगा जिसमें उत्तराखण्ड समेत पूरे देश की महिलाएं शिरकत करेंगी।”

उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने आयी हुई सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि, “महिलाओं ने घर और बाहर दोनों जगह संघर्ष के बल पर ही सब कुछ हासिल किया है।”

कार्यशाला की अध्यक्षता आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष दीपा पाण्डेय ने की। इस अवसर पर विमला रौथाण, बसंती बिष्ट, मीना आर्या, रीता कश्यप, इंद्रा देउपा, निर्मला पाल, हीरा भट्ट, सरोज पंत, उषा पंत, मुन्नी बिष्ट, रीना बाला, रमा, रूपा, ज्योति उपाध्याय, ममता आर्या लीला महर, भगवती सनवाल, रूबी भारद्वाज, शीला मौनी, लीला ठाकुर, जसमती कुंवर, कमला बधानी, रजनी भट्ट, कुलविंदर कौर, गोविंदी, लक्ष्मी, इंद्रा नेगी, पुरुषोत्तम शर्मा, बहादुर सिंह जंगी, राजेंद्र शाह, ललित मटियाली, आनंद नेगी, के. के. बोरा, संजय शर्मा, कैलाश पाण्डेय, आदि ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यशाला में आंगनबाड़ी वर्कर्स, मिंडा वर्कर्स के चल रहे आंदोलनों के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर उनकी मांगें माने जाने की अपील की गयी।

बिन्दुखत्ता की थाती है – लाल झंडा थामे, लड़ने का जज्बा

6 सितम्बर को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नैनीताल जिले के बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाए जाने का फैसला वापस लेने का ऐलान किया. दरअसल जब लगभग डेढ़ वर्ष पहले बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनने की घोषणा उत्तराखंड सरकार ने की थी, तभी अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा(माले) ने इसका विरोध करते हुए, राजस्व गाँव बनाने की बिन्दुखत्ता की दशकों पुरानी मांग को पूरा किये जाने का सवाल उठाया था. इस मामले पर भाकपा(माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा की त्वरित पहलकदमी का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 18 दिसम्बर 2015 को बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाने की अंतरिम अधिसूचना जारी हुई और 20 दिसम्बर 2015 को भाकपा(माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा नगरपालिका बनाए जाने के खिलाफ, लिखित आपत्तियां लालकुँआ तहसील के जरिये और फैक्स द्वारा शहरी विकास विभाग को भेज दी गयी.

भाकपा(माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा ने सुनिश्चित किया कि नगरपालिका की घोषणा की आड़ में बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनाए जाने की, तकरीबन चार दशक से अधिक पुरानी लड़ाई को किनारे न धकेल दिया जाए. इस इलाके में लोगों को जमीन पर मालिकाना अधिकार दिलाने की यह लड़ाई भाकपा(माले) और उसके जनसंगठन सत्तर के दशक से लड़ते आये हैं. इस सतत संघर्ष का ही परिणाम है कि बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनने की मांग को सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करना पड़ा है. वर्तमान में लालकुँआ क्षेत्र के निर्दलीय विधायक और कांग्रेस सरकार में मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल के घोषणापत्र में भी बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनाने का वायदा शामिल था. लेकिन सरकार में मंत्री बनने के बाद दुर्गापाल ने राजस्व गाँव की मांग की ओर पीठ फेरते हुए इस इलाके को नगरपालिका घोषित करवा दिया.

लोग नगरपालिका नहीं राजस्व गाँव चाहते हैं, यह 28 जनवरी 2015 को अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा आयोजित किसान महापंचायत से ही स्पष्ट हो गया था. हजारों की तादाद में महिला, पुरुष लाल झंडा थामे लालकुँआ की सड़कों पर राजस्व गाँव और जमीन के मालिकाना अधिकार के पक्ष में नारे लगाते हुए उतरे. कोई भी जनता की राय की परवाह करने वाली सरकार होती तो उक्त रैली में उमड़े जनसैलाब को देख कर अपने फैसले को दुरुस्त कर लेती. पर चूँकि राज्य सरकार और उसकी प्राथमिकता में जमीन है, अपने कार्यकर्ता व उनकी ठेकेदारी है और जनता, उनकी प्राथमिकताओं के अंतिम पायदान से भी नीचे है. इसलिए लालकुआं में आज तक हुए सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक या कि संभवतः सबसे बड़े प्रदर्शन की अवहेलना करना ही सरकार की सर्वाधिक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी. इस आन्दोलन की अगुवाई करने वाले अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और भाकपा(माले) की राज्य कमेटी के सदस्य कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा ने उस समय आरोप लगाया था कि “राज्य सरकार और स्थानीय विधायक ने बिन्दुखत्ता की बेशकीमती जमीनों को भू माफिया के हवाले करने के लिए नगरपालिका का दांव चला है. उनके लिए माफिया बिल्डरों के हित सर्वोपरि हैं, इसलिए वे जनता के हितों और उसकी राय की अवहेलना कर रहे हैं. ”बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाते समय हरीश रावत सरकार न केवल जनमत की अवहेलना कर रही थी, बल्कि अपने शहरी  विकास विभाग की राय पर भी गौर करना, सरकार ने गवारा नहीं किया. शहरी विकास निदेशालय में संयुक्त निदेशक स्तर के एक अधिकारी ने दिसम्बर 2014 में इस लेखक को बताया था कि शहरी विकास विभाग के सचिव ने बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाए जाने के खिलाफ लिखित राय दी थी. अपने बात स्पष्ट करते हुए उक्त संयुक्त निदेशक रैंक के अफसर ने कहा कि “हम जब किसी जगह को नगरपालिका घोषित करेंगे तो अधिसूचना में यही तो लिखेंगे कि फलां-फलां राजस्व गाँव के खसरा संख्या – इतने से इतने को नगरपालिका बनाया जाता है. यह तो नहीं लिख सकते ना कि फलां-फलां वन प्रभाग के कम्पार्टमेंट संख्या इतने-इतने को नगरपालिका बनाया जाता है. ”धरातल पर जनता विरोध कर रही थी और प्रशासनिक स्तर पर अफसर इसकी मुखालफत कर रहे थे. तब फिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि हरीश रावत बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाए जाने पर अड़े रहे? इस रौशनी में तो कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा के आरोप सही मालूम पड़ते हैं.

बिन्दुखत्ता, लालकुआं में प्रदर्शनों के बाद बिन्दुखत्ता से नगरपालिका वापसी और राजस्व गाँव बनाने की मांग को लाल झंडा थामे हजारों की तादाद में लोग देहरादून आये. 17 मार्च 2015 को इन्होने विधानसभा पर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक रही होगी, अपने साथी पुलिस अधिकारी से कह रहे थे कि “कितनी पुरानी मांग है बिन्दुखत्ता की, जब हम पढ़ते थे तब से सुनते आये हैं, लेकिन कोई इनकी सुनवाई करता ही नहीं है.” इस विधानसभा घेराव में प्रशासन के मार्फत मुख्यमंत्री से वार्ता का प्रस्ताव प्रदर्शनकारियों तक पहुंचा. इस पर कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा, बिन्दुखत्ता के भूमि संघर्ष के अगुवा नेता कामरेड बहादुर सिंह जंगी, भुवन जोशी, भाकपा(माले) के नैनीताल जिला सचिव कामरेड कैलाश पाण्डेय आदि का प्रतिनिधिमंडल विधानसभा में मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिला. मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाना सरकार की कोई जिद नहीं है. उन्होंने कहा कि वे अपने लोगों से पूछेंगे और अगर लोग नहीं चाहेंगे तो नगरपालिका नहीं बनेगी. लेकिन मुख्यमंत्री का यह  आश्वासन चौबीस घंटे भी नहीं टिक सका और उससे पहले ही कालकवलित हो गया. मुख्यमंत्री से आश्वासन लेकर लोग ट्रेन से अगले दिन जब बिन्दुखत्ता पहुंचे तो अखबारों में राज्य सरकार द्वारा बिन्दुखत्ता नगरपालिका का प्रशासक नियुक्त किये जाने की खबर उनका स्वागत कर रही थी. लोगों के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि जो देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनसे कहा, वह सच था या जो अखबार में छपा है, वह सच है! मुख्यमंत्री हरीश रावत के आश्वासन देने और प्रशासक नियुक्त किये जाने के इस घटनाक्रम में एक दिक्कततलब बात और थी. हो सकता है कि राजनेता के तौर पर गोलमोल बात करना, जनता को भ्रम में रखना हरीश रावत उचित और अपरिहार्य समझते हों, इसे लोग झेल भी सकते हैं. लेकिन राज्य का मुख्यमंत्री गलतबयानी करे, नीतिगत मसलों पर लोगों को भ्रम में रखे, उसके कहने के ठीक विपरीत कार्यवाही हो, यह न तो उचित है और न स्वीकार्य.

लेकिन बिन्दुखत्ता के लोगों का संघर्ष न तो प्रशासक नियुक्त करने पर रुका और ना ही नगरपालिका के उद्घाटन की घोषणा पर. इस बीच में नगरपालिका वापसी के लिए लालकुआं तहसील में धरना और अनशन भी चलाया गया. साथ ही उच्च न्यायालय, नैनीताल में जनहित याचिका भी दाखिल की गयी. चूँकि उत्तराखंड सरकार के पास बिन्दुखत्ता में नगरपालिका बनाने के निर्णय को सही साबित करने का कोई ठोस कानूनी आधार था ही नहीं, इसलिए उच्च न्यायालय में मामले को लटकाए रखने के पैंतरे ही राज्य सरकार ने अजमाए. जहाँ एक और उच्च न्यायालय में राज्य सरकार जवाब तक दाखिल नहीं कर रही थी, वहीँ धरातल पर वह बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाने की अपनी हठ को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी. इसी क्रम में स्थानीय विधायक और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल द्वारा बिन्दुखत्ता में नगरपालिका कार्यालय के उद्घाटन का उपक्रम 14 अक्टूबर 2015 को किया गया. इस कदम का भी बिन्दुखत्ता की जनता ने तीव्र प्रतिवाद किया. मंत्री के काफिले का घेराव हुआ, काले झंडे दिखाए गए. पुलिस और मंत्री समथकों द्वारा नगरपालिका का विरोध करने वालों के साथ जम कर अभद्रता की गयी. इसके खिलाफ मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग आदि जगहों पर शिकायतें दर्ज की गयी. महिलाओं के साथ अभद्रता करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का पत्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को भेजा गया पर इसमें ग्यारह महीने बाद तक पुलिस बयान ही ले रही है. दूसरी और पुलिस ने 47 नामजद और 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. लेकिन आन्दोलनकारियों के हौसले मुकदमों से भी नहीं डिगे और ना ही वे पुलिस द्वारा चिन्हित तरीके से डराए-धमकाए जाने के अंदाज में की गयी पूछताछ से ही घबराए. आन्दोलन का दबाव और जनता के संघर्ष के जज्बे का ही परिणाम था कि पुलिस उक्त मामले में कोई गिरफ्तारी करने का साहस नहीं जुटा पायी. अलबत्ता लोगों को धरना, प्रदर्शनों में आने से रोकने की कोशिश में पुलिस अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को डराती-धमकाती जरुर रही. आन्दोलन की अगुवाई कर रहे कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा तो पुलिस और विशेष तौर पर लालकुआं के कोतवाल पर मंत्री के कार्यकर्ता की तरह काम करने का आरोप लगाते हैं. राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष लालकुआं के कोतवाल बी.सी.पन्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन सम्मानित किया गया. स्वाभाविक तौर पर यह प्रश्न तो उठता ही है कि क्या यह सम्मान, पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान बिन्दुखत्ता में पालिका विरोधी आन्दोलन में कानून के दायरे से बाहर जाकर की गयी उनकी ‘सेवाओं’ के लिए है?

यह घोषणा होने के बाद कि बिन्दुखत्ता को नगरपालिका बनाने का फैसला वापस ले लिया गया है तो कुछ सवाल स्वाभाविक तौर पर पैदा होते हैं. जब पहले पहल नगरपालिका बनाने की घोषणा हुई तो कांग्रेसियों और श्रम मंत्री दुर्गापाल के लोगों ने नगरपालिका का विरोध करने वालों को विकास विरोधी करार दिया था. आज सवाल यह कि बिन्दुखत्ता से नगरपालिका वापस लेकर राज्य सरकार, श्रम मंत्री स्वयं इन विकास विरोधियों के रास्ते पर क्यूँ चल पड़े हैं? क्या चुनावी हार के डर से वे उस रास्ते चल रहे हैं, जिसको वे चिल्ला-चिल्ला कर विकास विरोधी ठहरा रहे थे? सवाल यह भी उठता है कि लोगों को उनकी जमीन पर मालिकाना अधिकार मिले, यह मांग विकास विरोधी कैसे है? जो लोगों की जमीन बिकवाने का इंतजाम कर दे, वह विकास समर्थक और जो लोगों की जमीन पर उनके मालिकाना अधिकार की मांग उठाये, वह विकास विरोधी? सवाल तो यह भी कि बिन्दुखत्ता में पौने तीन सौ लोगों पर मुकदमा तो नगरपालिका का विरोध करने के लिए किया गया था, आज जब नगरपालिका को सरकार द्वारा ही रद्द कर दिया गया है तो यह मुकदमा किस बात का है और क्यूँ चलना चाहिए?

चार दशक से लाल झंडा थामे बिन्दुखत्ता निरंतर सत्ता को चुनौती देता रहा है. यहाँ सडक, बिजली, राशन कार्ड जैसी तमाम सुविधाएं लोगों ने संघर्ष करके हासिल की हैं. राज्य सरकार को नगरपालिका वापस लेने के लिए विवश करके, एक बार फिर यहाँ की जनता ने जमीन पर अपने मालिकाना अधिकार पाने की लडाई का एक मोर्चा फतह किया है. हालांकि राजस्व गाँव बनने के लिए अभी और संघर्ष की दरकार है. पर


-इन्द्रेश मैखुरी