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Updates

Protests Against Power Plant After the November protests against the proposed power plant near Sirkazhi in Nagapattinam district on January 21st, angry agricultural labourers and poor peasants once more held a protest demonstration in front of the Sub-Collectors’ office at

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TN Women’s Commission Shows Pro-Pricol Bias

Within a span of 6 days, from 24 September to 29 September 2009, Coimbatore police, as part of its systematic campaign to harass Pricol workers in the wake of the death of a management official, had baselessly targeted several women workers. They arrested two

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Jharkhand Elections and After

As widely expected, the recent elections in Jharkhand once again threw up a hung Assembly. None of the pre-poll combinations could come anywhere near the majority mark, with the Congress-JVM combination securing 25 seats and the BJP-JD(U) combine managing only 20.

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Displaced Poor Struggle Against Eviction in Patna

Protest dharnas were held in all thirteen blocks of the Patna Rural district on 12 January 2010 against the forcible eviction by the BJP-JD(U) protected feudal forces. The evicted people demanded immediate rehabilitation, and a district-level protest will now be held

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अराजक सिडकुल – पूंजीपतियों के समक्ष नतमस्तक सरकार और पिटना एक श्रमिक नेता का

बीती 20 मई को हल्द्वानी-रुद्रपुर हाईवे पर, पंतनगर में डाबर फैक्ट्री के सामने ऐसी घटना घटी, जो उत्तराखंड के शांत वातावरण को देखते हुए काफी खतरनाक मानी जानी चाहिए. सडक पर आम दिनों की तरह यातायात चल रहा था. एक टेम्पो को सफेद रंग की बिना नम्बर वाली स्कार्पियो गाडी से कुछ लोग हाथ देकर रुकवाते हैं. जैसे ही टेम्पो रुकता है, स्कार्पियो में से कुछ कपडे से चेहरा ढके लोग, हाथ में लाठी-डंडे लिए उतरते हैं. वे टेम्पो में घुस कर एक शख्स पर हमला बोल देते हैं. ये लाठी-डंडों से लैस लोग, इस शख्स को ताबड़तोड़ पीटना शुरू कर देते हैं और बाकी सवारियों को भगा देते हैं. छोटे कद के इस शख्स को हमलावर उठा कर गाडी में डालने की कोशिश करते हैं. लेकिन उस शख्स के प्रतिरोध के चलते, हमलावर कामयाब नहीं हो पाते है. व्यस्ततम सडक पर भीड़ जमा होने लगती है. खुलेआम, एक व्यक्ति को 4-5 चेहरा ढके लोगों द्वारा पीटे जाते देख, लोग हमलावरों से सवाल करते हैं कि ये कौन है, इसे क्यूँ मार रहे हो? जिस शख्स को मार पीट रहे थे, उसके काबू में न आने और लोगों के जमा होने के चलते हमलावर भाग खड़े हुए. जिस शख्स पर हमला हुआ, वो उत्तराखंड में मजदूर आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा और ट्रेड यूनियन एक्टू (आल इंडिया सेंट्रल काउन्सिल ऑफ ट्रेड यूनियंस) के उत्तराखंड महामंत्री कामरेड के. के. बोरा हैं. हमलावर कौन थे, ये दस दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस नहीं तलाश पायी है या शायद उसकी रूचि उन्हें तलाशने में है भी नहीं !

पुलिस कॉमरेड के. के. बोरा के हमलावरों को तलाशने में रूचि न होने का आरोप इसलिए दमदार मालूम पड़ता है क्यूंकि उक्त हमले के एक दिन पहले -19 मई को श्रम कार्यालय, रुद्रपुर में के. के. बोरा को बिना वारंट उठाने की पुलिस कोशिश कर चुकी थी. क्या यह महज संयोग है कि एक दिन पुलिस और अगले दिन चेहरा ढके हुए हमलावर, के. के. बोरा के प्रति अपनी खुन्नस का इजहार करने के लिए एक ही वाक्य इस्तेमाल करते हैं - “बहुत जुलूस निकालता है?”

लेकिन सवाल है कि के. के. बोरा नाम का यह शख्स ऐसा करता क्या है कि पुलिस और अपराधी दोनों इस से खार खाए बैठे थे और दोनों ही इसे उठा ले जाना चाहते थे? इस सवाल का जवाब यह है कि के. के. बोरा उत्तराखंड में सिडकुल (स्टेट इंडस्ट्रियल कारपोरेशन ऑफ़ उत्तराखंड लिमिटेड) के तहत लगे उद्योगों में पिछले एक दशक से लगातार मजदूरों के अधिकारों की पैरवी करते हैं, उनके लिए हर मोर्चे पर लड़ते रहे हैं. जैसा कि पूरे देश में नया चलन उभरा है कि मजदूर अधिकारों पर  पूरी तरह प्रतिबंध वाले औद्यगिक आस्थानों को बढावा दिया जा रहा है. सिडकुल में लगने वाले उद्योगों में भी इसी तरह के हालात हैं.

यहाँ लगने वाले उद्योगों को एक्साइज ड्यूटी समेत कई प्रकार के टैक्सों में छूट मिली, इसे नवउदारवादी भाषा में टैक्स हॉलिडे कहते हैं यानि टैक्स देने की छुट्टी. टैक्स न देना अन्यथा, गैरकानूनी कृत्य है. पर पूँजी और उसकी पिछलग्गू सरकारों की करामात देखिये, उन्होंने एक गैरकानूनी कृत्य को शब्दों की बाजीगरी से उत्सव में तब्दील कर दिया है - छुट्टी का उत्सव, टैक्स न देने का उत्सव ! सिडकुल में सिर्फ टैक्स में ही छूट नहीं है बल्कि बिजली में छूट हासिल है, परिवहन पर छूट है, जमीन मामूली दरों पर मिलती है. लेकिन उसकी एवज में इन उद्योगों में काम करने वाले युवाओं को न्यूनतम मजदूरी से लेकर बेहतर कार्यस्थितियों तक, कुछ भी हासिल नहीं होता है. रोजगार स्थायी नहीं है बल्कि ठेके पर ही मिलता है. प्रबंधन का मनमानापन अलग से झेलना होता है. पूरे सिडकुल को श्रम कानूनों से मुक्त टापू बनाने की कोशिश मालिक, सरकार, प्रशासन और पुलिस की निरंतर रहती है. इसीलिए समय-समय पर यह मजदूरों का असंतोष प्रकट होता रहता है.

के. के. बोरा पर हमले की तात्कालिक वजह भी ऐसी एक फैक्ट्री मिंडा इंडस्ट्रीज लिमिटेड में चल रहा मजदूर आन्दोलन प्रतीत होता है. बैटरी बनाने वाली इस फैक्ट्री में बीते आठ सालों से उत्पादन हो रहा है. लेकिन आठ सालों में इन्होने अपने यहाँ काम करने वाले मजदूरों को नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया. इस फैक्ट्री में लेड जैसे घातक रसायनों का प्रयोग होता है. इसलिए हर 6 महीने में काम करने वाले मजदूरों के खून की जांच करवाई जाती है. कामरेड के. के. बोरा बताते हैं कि कभी भी खून की जांच रिपोर्ट न सार्वजनिक की गयी और न ही जिनकी यह रिपोर्ट थी, उन्हें दिखाई गयी. ब्लड रिपोर्ट आने के बाद, कुछ मजदूरों को काम से निकल दिया जाता है. यह इस बात का संकेत है कि खतरनाक रसायनों के बीच काम करते-करते, उनकी चपेट में ये मजदूर आ चुके होते हैं. इस फैक्ट्री में मजदूर कितनी नारकीय परिस्थिति में काम करते हैं, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगा सकते हैं कि एक बार ए.एल.सी. (सहायक श्रम आयुक्त) फैक्ट्री की जांच करने गये तो वहां से लौट कर बोले कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है. जहाँ मात्र कुछ देर के लिए जाने पर एक अफसर के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता हो, वहां मजदूर सालों-साल काम करते हैं, तब तक करते हैं, जब तक कि जहरीले रसायन उनके शरीर को पूरी तरह नष्ट नहीं कर देते.

नियुक्ति पत्र, ओवरटाइम, बोनस का पैसा देने समेत विभिन्न मांगों और अपने निकाले गए साथियों की बहाली के लिए पिछले 85 दिन से मिंडा फैक्ट्री के मजदूर आन्दोलनरत हैं. के. के. बोरा आरोप लगाते हैं कि श्रम कार्यालय की फैक्ट्री प्रबंधन से मिलीभगत है. श्रम कार्यालय में वाद दायर करने के बाद प्रबन्धन को नोटिस तक नहीं भेजा गया, जिससे मजदूर श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुरक्षा से वंचित हो गए. हल्द्वानी में श्रम कार्यालय में 50 दिन धरना चलाने के बाद  मजदूरों को पहचान पत्र (आई कार्ड) और नियुक्ति पत्र प्राप्त हो सका. मिंडा प्रबन्धन की मनमानी और श्रम कार्यालय की उनके साथ मिलीभगत के खिलाफ मजदूर उच्च न्यायालय, नैनीताल गए. वहां दाखिल याचिका में उन्होंने मिंडा प्रबन्धन के अतिरिक्त श्रम कार्यालय को भी पार्टी बनाया है.

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Struggles against Land Mafia and Police Repression in UP

In Ghazipur district of UP, struggles to free land from land mafia and ensure the grant of pattas to landless poor have been ongoing since November 2009. On November 5, protests were held at different blocks demanding work and wages under MNREGA.

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Updates

6th Conference of the Paschim Banga Krishak Samiti Held The Paschim Banga Krishak Samiti (West Bengal Peasant Association) held its 6th Conference with an open session in Bardhaman followed by a two-day delegate session on 15-16 February. The conference took

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Obituary

Hari Sharma (1934-2010) Hari Prakash Sharma, writer, activist and friend of the Naxalbari movement, passed away at his home in Vancouver, Canada on March 16 following a prolonged battle with cancer. Born in UP and educated at Agra University and Delhi

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Updates

Construction Workers' March to Parliament On 15 March 2010, under the banner of the All India Central Council of Trade Unions (AICCTU)-affiliated All India Construction Workers’ Federation (AICWF), hundreds of construction workers from different states held a March to Parliament against

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Draconian Laws against CPI(ML) Activists in Ghazipur

Activists who organise the rural poor are being branded 'gangsters' and goondas' and booked under the draconian 'Gangster Act' and 'Goonda Act' in Mayawati's UP. On 15 February 2010, some criminals attacked the Bhadaura Primary Health Centre (PHC) in Gahmar PS of

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Updates

8th Party Congress of the Revolutionary Workers’ Party of Bangladesh (RWPB) A three-member delegation of the CPI(ML)(Liberation had been to Dhaka, the capital of Bangladesh, to attend the 8th Party Congress of the RWPB held on and from 1

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Country-wide People’s Rights Rallies Demand “Check Prices, Give Us Jobs – Carry Out Land Reforms!”

(Between 23 and 31 March this year, the CPI(ML) held mass rallies and other mass protests in the national capital and in several states demanding a check on price rise, and guarantee of jobs, housing and land reform. A Report.) Massive

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