APPEAL

CPI(ML) Statement on Racist Violence

The CC noted with concern the recent incident of racist violence in Delhi in which a student from Congo was beaten to death. This is the latest in a series of such incidents in recent years – including the stripping of

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Firmly Grasp the Party’s Revolutionary Line and Unleash Bold Mass Initiatives on Every Front

Ever since Comrade VM breathed his last in the midst of a CC meeting in Lucknow on December 18, 1998, we have been observing December 18 as Sankalp Diwas or Pledge Day. Comrade VM will always be remembered for his historic role in

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Raise the Level of Mass Assertion; Expand the Realm of Party Initiatives

This April 22, as we observe the 41st foundation day of the CPI(ML), let us pay attention to some key areas of our mass practice and find out ways to raise the level of mass assertion and expand the realm

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Kashmir Solidarity Letter to PM by UK- and US-based Organisations

(On 20 August, coinciding with the Kashmir Solidarity Day called all over India by the All India Left Coordination, various organisations in the UK and US submitted a letter to the Indian Prime Minister via the Indian High Commission in London.

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Memorandum on Kashmir Submitted by All India Left Coordination

(The following memorandum was submitted by the leaders of the four constituents of All India Left Coordination on 12 August. Ed/.) To The Hon'ble President, Union of India Respected Madam, We the undersigned are deeply disturbed by the situation in the

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Support the CPI(ML) Election Campaign in Bihar

Stand by the Fighting People of Bihar in their Battle for Real Change and Rights Five years ago, the NDA-BJP alliance headed by Nitish Kumar rode the wave of resentment against the RJD’s prolonged reign of misrule, to come

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Call of April 22:

Strengthen the Student-Youth Upsurge! Build a Bulwark of People’s Resistance!! Save Democracy, Save India!!! This April 22 we will observe the 47th anniversary of the foundation of CPI(ML), and May 25 will mark the commencement of the 50th year of

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Defeat Modi’s Killer Brigade ! ** Intensify the Battle for Justice and Democracy !!

Even though the wound has far from healed, Gujarat is now scheduled to go to the polls on December 12. This will be the last Assembly election of year 2002. If the year began with the BJP's electoral rout in Punjab, Uttaranchal

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CPI(ML)’s Appeal to Voters in Bihar Panchayat Polls

Make Panchayats a Platform for Struggle against Corruption and People’s Problems! Establish People’s participation and Vigilance in Selecting and Executing Developmental Schemes! Dear voters, The whole country is reeling from the scourge of widespread corruption. Politicians, bureaucrats, army

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Stop Massacre of Civilians in Kashmir

Less than ten days after the PDP-BJP Government assumed power in Kashmir, Kashmir has witnessed a fresh bout of killings of civilian protesters by Army bullets. Five civilians have been killed, and several have suffered injuries that may cripple them

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मई दिवस 2016 का घोषणापत्र – प्रतिरोध संघर्ष में डटकर लड़ो भारतवासियो, लड़ो !

नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बने दो वर्ष बीत चुके हैं, और इस दौरान उन्होंने जिस ढर्रे पर देश का शासन चलाया है वह हमारे समाज और राजप्रणाली के लिये राजनीतिक विपदा से कम कुछ नहीं साबित हो रहा. इतिहास में इससे पहले भारत ने कभी ऐसी सरकार नहीं देखी जो जनता की दुख-दुर्दशा के प्रति इतनी असंवेदनशील और उदासीन हो. जहां देश के विशाल हिस्सों में लोग भयानक सूखा और अकाल जैसी स्थितियों से कराह रहे हैं, और कमरतोड़ कर्ज व खेती-किसानी के संकट से दबे दर्जनों किसान रोजाना आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं इससे पूरी तरह उदासीन केन्द्र सरकार 2022 तक किसानों की आय को दुगना करने का वादा कर खुद ही अपनी पीठ ठोक रही है. सूखे से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अपने राज्य में कृषि पर छाई खतरनाक विपदा की चिंता करने का समय नहीं है, वह तो जो भी ‘भारत माता की जय’ का नारा नहीं लगायेगा, उसे राज्य से निकाल बाहर निकालने की धमकियां जारी करने  में व्यस्त हैं और उनके मंत्रिमंडल की एक सदस्या सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के अपने दौरे को स्मार्टफोन पर सेल्फी लेकर यादगार बनाने में लगी हैं ! और प्रधानमंत्री के पास तो विदेश यात्राओं और चुनावी रैलियों में भाषणों के बाद समय नहीं बचता, कभी-कभार कुछ समय निकलता भी है तो वह रेडियो पर प्रवचन देने या फिर मादाम तुसाद म्यूजियम में अपनी मोम की मूर्ति को निहारने में ही कट जाता है.

यह एक ऐसी सरकार है जो मात्र 31 प्रतिशत वोटों के बल पर सत्ता में आई, लेकिन पहले दिन से ही इसने नागरिकों के व्यापक हिस्सों के खिलाफ, यहां तक कि जिन्होंने वोट देकर इसे सत्ता में बैठाया उनमें से भी बहुतों के खिलाफ, स्थायी रूप से युध्‍द जैसे हालात बनाये हुए है. इसके भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को देश के सारे लोगों ने ठुकरा दिया है, मगर फिर भी यह सरकार बड़े पैमाने पर कृषि-भूमि का दूसरे कामों में इस्तेमाल करने और उसका अधिग्रहण करने में मुआवजा और पुनर्वास सम्बंधी 2013 के कानून के निर्देशों का बेशर्मी से खुला उल्लंघन कर रही है.

अपने ‘मेक इन इंडिया’ एजेंडा को जबर्दस्ती लागू करने के लिये यह सरकार देश के हर कानून और संस्था को तोड़मरोड़ रही है - चाहे वह श्रम अधिकार हों, पर्यावरण की रक्षा के उपाय हों, प्राकृतिक संसाधन हों, यहां तक कि देश के लोकतंत्र का सम्पूर्ण ढांचा भी - सब कुछ को विदेशी पंूजी निवेश के लिये गिरवी रखा जा रहा है. देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में असहमति जाहिर करने वाले छात्रों को ‘जातिवादी’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार देकर उन्हें योजनाबध्‍द रूप से राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है. देश भर की समस्त संस्थाओं में प्रभावशाली पदों पर और प्रमुख संवैधानिक पदों पर आरएसएस के कार्यकर्ताओं को बाकायदा बैठाया जा रहा है. गैर-भाजपा सरकारों को अस्थिर करने के लिये राष्ट्रपति शासन थोपा जा रहा है, जबकि भाजपा-शासित राज्यों में शासन का मतलब केवल राज्य प्रायोजित अव्यवस्था, आतंक और अनवरत साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण ही रह गया है.

जनता और उसके संवैधानिक अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं पर इस हमले के साथ-साथ, संघ गिरोह द्वारा इतिहास को झुठलाने की कुचेष्टापूर्ण कोशिशें भी जारी हैं. मोदी ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के नारे के साथ सत्ता में आये थे - अपने इस नारे की आड़ में उन्होंने न सिर्फ घोटालों से कलंकित बदनाम हो चुकी केन्द्र की मनमोहन सरकार तथा राज्यों में कांग्रेस-नीत सरकारों को सत्ता से बाहर करने का अभियान चलाया, बल्कि उसमें एक ऐसा विमर्श बनाने की कोशिश भी थी जो कांग्रेस को ऐतिहासिक रूप से खारिज करे और सच्चाई से दूर जाकर भाजपा के लिए एक काल्पनिक इतिहास को भी गढ़े. इस प्रक्रिया में सबसे पहले कांग्रेस के सरदार पटेल को भाजपा ने झपट लिया, और सरकार बनने के एक साल के अन्दर ही मोदी ने अपने बहु-प्रचारित ‘स्वच्छ भारत’ अभियान के जरिये गांधी को भी हड़पने की भरपूर कोशिश की. नेताजी सम्बंधी फाइलों को सार्वजनिक किये जाने और अम्बेडकर की 125वीं जन्मवार्षिकी के समारोह पर अब संघ-भाजपा सुभाष चन्द्र बोस और अम्बेडकर की विरासत पर भी अपना दावा ठोंकने को कमर कसे हुए है. संघ के विचारक हमें बता रहे हैं कि अम्बेडकर ने जो ‘जाति के विनाश’ का आह्वान किया था उसका मकसद तो हिंदू समाज को एकजुट करना था, यह बताते हुए आरएसएस के मुखपत्र ‘आर्गनाइजर’ ने अम्बेडकर को ‘महान एकताकार’ बताया है. अब आप समझ सकते हैं कि क्यों रोहित वेमुला और उनके साथियों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया गया और भगत सिंह व अम्बेडकर के विचारों का प्रसार कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुध्‍दिजीवियों पर संघी गुंडों द्वारा जानलेवा हमले किये गये.

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Call of April 22 : Strengthen the Student-Youth Upsurge! # Build a Bulwark of People’s Resistance!! # Save Democracy, Save India!!!

This April 22 we will observe the 47th anniversary of the foundation of CPI(ML), and May 25 will mark the commencement of the 50th year of the historic Naxalbari uprising which presaged the emergence of the CPI(ML) as the new

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