वर्ष 35 / अंक - 38 / बिहार में बाढ़: न राहत, न ही बचाव

बिहार में बाढ़: न राहत, न ही बचाव

बिहार में बाढ़: न राहत, न ही बचाव

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है. राज्य के 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है, हजारों परिवार विस्थापित हैं और बड़े पैमाने पर फसलें बर्बाद हुई हैं. फिर भी बाढ़ पीड़ितों को पर्याप्त राहत और बचाव उपलब्ध कराने में सरकार की गंभीर उदासीनता सामने आ रही है.

बाढ़ की भयावह स्थिति और सरकारी राहत कार्यों में कमी के सवाल पर 16 सितम्बर 2026 को भाकपा(माले) ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की जिसे आरा के भाकपा(माले) सांसद सुदामा प्रसाद, पूर्व विधायक गोपाल रविदास तथा भागलपुर जोन प्रभारी मुकेश मुक्त ने संबोधित किया.

भाकपा(माले) सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि बिहार में बाढ़ प्रभावित आबादी लगातार बढ़ रही है. 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. सरकारी स्तर पर प्रभावित लोगों की संख्या के आंकड़े लगातार जारी किए जा रहे हैं, लेकिन बाढ़ से हुई मौतों का समुचित और पारदर्शी आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है. भाकपा(माले) ने अपने स्तर पर भोजपुर, भागलपुर और पटना ग्रामीण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौतों के आंकड़े जुटाए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को सामने रखते हैं.


भोजपुर जिले में अब तक 24 लोगों की बाढ़ के कारण मौत होने की जानकारी मिली है. यह संख्या और अधिक हो सकती है. वहीं भागलपुर जिले में अब तक 10 लोगों की मौत की जानकारी भाकपा(माले) ने जुटाई है. पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में भी बाढ़ के कारण अब तक 10 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है.

भाकपा(माले) नेताओं ने कहा कि 12 सितंबर को भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 114 पंचायतों के 456 गांव बाढ़ से पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रभावित थे. करीब 2 लाख 10 हजार परिवारों के लगभग 9 लाख 15 हजार लोग सीधे बाढ़ की चपेट में थे. हजारों घरों में पानी घुस गया है या पानी दरवाजे तक पहुंच चुका है. सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का, धान और सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है.

नेताओं ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल भोजन, पीने का पानी, दवा, पशुचारा, नाव और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की जरूरत है. लेकिन अनेक इलाकों में राहत कार्य जरूरत के अनुपात में नहीं पहुंच रहा है. जहां राहत कार्य चल भी रहे हैं, वहां राहत सामग्री के वितरण में अनियमितता और लूट की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. बाढ़ जैसी गंभीर आपदा के समय सरकार और प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाना चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर बड़ी आबादी अब भी मदद का इंतजार कर रही है.

पार्टी ने मांग की कि बाढ़ से हुई सभी मौतों का जिला एवं प्रखंडवार आधिकारिक आंकड़ा तत्काल सार्वजनिक किया जाए, मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक पर्याप्त राहत सामग्री पहुंचाई जाए. किसानों की बर्बाद फसल का तत्काल सर्वे कर मुआवजा दिया जाए. जिन परिवारों के घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए.

भाकपा(माल) ने कहा कि राहत वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए तथा पंचायत स्तर पर राहत वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. बाढ़ उतरने के बाद बीमारी और महामारी की आशंका को देखते हुए प्रभावित इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं.

भाकपा(माले) ने कहा कि बिहार सरकार बाढ़ की भयावहता को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखे, बल्कि जमीन पर राहत और बचाव कार्यों को तेज करे. बाढ़ पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा.

17-19  सितंबर को पूरे बिहार में विरोध प्रदर्शन

उपरोक्त मांगों को लेकर भाकपा(माले) 18 और 19 सितंबर को पूरे बिहार में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी. इस बीच पार्टी की ओर से बाढ़ राहत संग्रह अभियान भी चलाया जा रहा है.


19 September, 2026