रद्द और स्टे के बीच अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं सहेंगे
जेन-जी राइजिंग, झारखंड चैप्टर के तहत 24 अगस्त 2026 को धनबाद के टाउन हाॅल में ‘छात्र-युवा संसद’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम से पहले धांधली की त्वरित जांच कर अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग के साथ जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चैक होते हुए आक्रोश मार्च निकाला गया, जिसमें आइसा-आरवाइए के हजारों छात्र-युवा शामिल हुए.
आक्रोश मार्च और छात्र-युवा संसद के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं को बार-बार रद्द करने और स्टे के चक्कर में अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करने, भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की त्वरित जांच कराने, अभ्यर्थियों को न्याय देने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करने सहित अन्य मांगें उठाई गईं.
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाकपा(माले) के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य शामिल हुए. उनके अलावा जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र-युवा आंदोलनों का नेतृत्व करने वाली जेएनयू छात्रसंघ की सह सचिव दानिश अली, जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय तथा आरवाइए (इंकलाबी नौजवान सभा) के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार ने भी इस कार्यक्रम को संबोधित किया.
नई पीढ़ी संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ा रही है: दानिश अली
जेएनयू छात्रसंघ की सह सचिव दानिश अली ने कहा कि आज जेन-जी और नई पीढ़ी का आंदोलन चल रहा है. युवा एकजुट होकर सवाल कर रहे हैं कि सरकार को अपनी जायज मांगों के लिए कैसे झुकाया जाए और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर कैसे बनाया जाए.
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती संघर्ष और प्रतिरोध की धरती रही है. इसी धरती पर बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत, सामंतवाद और तानाशाही के खिलाफ उलगुलान का बिगुल फूंका था. मात्र 24 वर्ष की उम्र में उन्हें जेल में बंद कर दिया गया, जहां उनकी शहादत हुई. ऐसे तमाम क्रांतिकारियों की शहादत के कारण ही आज हम आजाद हैं.
उन्होंने कहा कि आज जरूरी है कि संघर्ष की उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान दौर की तानाशाही के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाए. जंतर-मंतर से लेकर पटना और रांची तक छात्र-युवा संसद के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सड़क से संसद तक आवाज बुलंद की जा रही है.
उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र-युवा भी जेपीएससी और जेएसएससी सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में धांधली और टीडीपीएल जैसी निजी एजेंसी को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. सरकार को उनकी मांगों पर झुकने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है. अब जरूरत है कि इस लड़ाई को और मजबूत किया जाए.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार की गारंटी हो: नीरज कुमार
आरवाइए के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार ने कहा कि आइसा-आरवाइए झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व सम्मानजनक रोजगार की गारंटी और स्थानीय नियोजन नीति के सवाल पर आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में रहा है. जेपीएससी और जेएसएससी में पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन से लेकर विधानसभा मार्च तक छात्र-युवाओं को एकजुट करने में संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं. संगठन ‘सरकारी स्कूल-काॅलेज सुधारो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दो’ के नारे के साथ गांव-गांव अभियान चलाएगा.
उन्होंने कहा कि सरकार को मांगों पर झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा है, लेकिन अदालत में मजबूत पक्ष नहीं रख पाने के कारण झारखंड हाईकोर्ट द्वारा स्टे लगाया गया है. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य को रद्दीकरण और स्टे के बीच लटकाकर नहीं रखा जा सकता. धांधली के मामलों की समयबद्ध जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है.
छात्र-युवा संसद में सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह, आरवाइए के झारखंड अध्यक्ष संदीप जायसवाल, सोनू पांडेय, आइसा की झारखंड राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप, राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, राज्य उपाध्यक्ष स्नेहा महतो, राज्य सह सचिव रितेश मिश्रा, सोनू शर्मा सहित सैकड़ों छात्र-छात्राओं, युवाओं और आम लोगों की भागीदारी रही.
आरवाइए के राष्ट्रीय परिषद सदस्य सोनू पांडेय ने अध्यक्षता, रितेश मिश्रा ने मंच संचालन किया अभिषेक सिंह ने छात्र-युवा संसद का संकल्प प्रस्तुत किया.
छात्र-युवा आंदोलन को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत: दीपंकर भट्टाचार्य
छात्र-युवा संसद को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज देशभर में छात्र-युवा पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वे किसी भी सरकार और सिस्टम की बाधाओं के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा कि देश की स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर छात्रा-युवा संघर्ष कर रहे हैं. एक ओर जहां नीट में पेपर लीक का मुद्दा सामने आया है, वहीं दूसरी ओर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट सेे एक दूसरा नीट (NEET) सामने आया है जहां देश के एक चौथाई युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर हैं. युवाओं की यह स्थिति भी देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
उन्होंने कहा कि हम सभी को एकजुट होकर ऐसी तमाम व्यवस्थाओं के खिलाफ संघर्ष जारी रखना होगा. छात्रा आंदोलनों को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में युवाओं के आंदोलनों के मुद्दे मूल रूप से समान हैं. सरकार किसी भी दल की हो, यदि छात्रों की मांग जायज है तो उनका आंदोलन भी जायज है.
उन्होंने कहा कि आज राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को जेन-जी के साथ-साथ जेन-अल्फा की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा.
संघर्ष का 11 सूत्री संकल्प
- झारखंड सरकार एसआइटी गठित कर शक के दायरे में आई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की समयबद्ध जांच कराए, ताकि धांधली के तथ्य सामने आ सकें और अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके.
- सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करे, जहां जांच के तथ्यों और सबूतों को प्रस्तुत कर मामलों का त्वरित निपटारा और न्याय सुनिश्चित किया जा सके.
- पहली और दूसरी जेपीएससी में हुई धांधली की जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी, लेकिन अभी तक इसका निपटारा नहीं हुआ है. केंद्र सरकार और सीबीआइ इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए न्याय सुनिश्चित करें.
- भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को निजी कंपनियों को आउटसोर्स न किया जाए तथा परीक्षाएं सरकारी एजेंसी के माध्यम से कराई जाएं.
- राज्य में विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में हो रही देरी को दूर कर सभी विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति दी जाए.
- पिछली भाजपा सरकार के दौरान बंद किए गए सभी स्कूलों को पुनः चालू किया जाए.
- सभी विद्यालयों में स्कूल भवन, पर्याप्त शिक्षक, मध्याह्न भोजन, शौचालय एवं उसकी स्थायी सफाई व्यवस्था, पुस्तकालय तथा खेल के मैदान की समुचित व्यवस्था की जाए.
- सभी अनुमंडलों में सार्वजनिक लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाए.
- हेमंत सरकार अपने 5 लाख नौजवानों को रोजगार देने के वादे को पूरा करे.
- प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी एफआइआर वापस लिए जाएं.
- केंद्र सरकार द्वारा लाए गए झारखंड खनिज वहन भूमि उपकर एवं एमएमडीआर विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए, क्योंकि यह झारखंड के लिए बड़ा आर्थिक हमला है.