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दिल्ली में एसआइआर: वामदलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा

दिल्ली में एसआइआर: वामदलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा

16 सितंबर 2026 को वामपंथी पार्टियों के संयुक्त मोर्चा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपना ज्ञापन सौंपा और इस बात पर चिंता जाहिर की कि दिल्ली में हुई एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत दिल्ली निर्वाचन आयोग द्वारा 48 लाख वोट हटा दिए गए हैं. यह दिल्ली के मतदाताओं के एक-तिहाई वोट हैं. यह एक बहुत गंभीर मामला है.

दिल्ली में कराए गए एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में इस बैठक में निम्नलिखित बिंदु सामने आए:

  1.  एसआईआर में हटाए गए अधिकांश वोट गरीब श्रमिक आबादी के हैं. वे झुग्गी बस्तियों, पुनर्वास काॅलोनियों और अनधिकृत काॅलोनियों में रहते हैं. पूर्णकालिक बीएलओ (BLO) की तैनाती न होना इस इतनी बड़ी मात्रा में वोटों के हटाए जाने का एक कारण है. सबसे गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को उनके लोकतांत्रिक मताधिकार से वंचित करना एक अपराध है.
  2. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों को बीएलओ द्वारा लागू नहीं किया गया. एसआईआर के लिए जारी किए गए फाॅर्म बीएलओ द्वारा सभी को वितरित नहीं किए गए. जिन्हें वितरित किए गए, उन सभी से वे एकत्र भी नहीं किए गए. जिन क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित आबादी रहती है, वहां निर्वाचन कार्यालय ने फाॅर्म भरवाने में कोई सहायता नहीं दी गई. परिणामस्वरूप, उन्हें बाजार में खुले साइबर कैफे में फाॅर्म भरवाने के लिए 250 से 500 रुपये देने पड़े. गरीब आबादी के सभी लोग यह खर्च नहीं उठा सकते. इस मामले की शिकायत समय पर राजनीतिक प्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के ए. ई. आर. ओ. से की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. परिणामस्वरूप, कई वैध मतदाताओं के वोट हटा दिए गए हैं.
  3. इस दौरान वामपंथी पार्टी नेताओं ने ऐसे कई मतदाताओं से भी मुलाकात की, जिनके नाम सभी आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद मतदाता सूची से हटा दिए गए.
  4. भाजपा सरकार विभाजन और भेदभाव की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए यह करा रही है. भाजपा बड़ी आबादी को पहचान पत्र से जुड़ी कई कल्याणकारी योजनाओं, जैसे राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति आदि से वंचित करना चाहती है. भाजपा सरकार यह पहले ही मुफ्त बस यात्रा में कर चुकी है. वामपंथी पार्टियां मोदी सरकार और भाजपा की विभाजनकारी और भेदभाव की राजनीति की कड़ी निंदा करती है, जो गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के चुनावी अधिकारों को कमजोर कर रही है. बड़े पैमाने पर मतदाताओं को हटाना कमजोर वर्गों को कल्याणकारी योजनाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है.
  5. हमने पाया कि निर्वाचन कार्यालय एक निष्पक्ष संस्था के रूप में काम नहीं कर रहा है, बल्कि भाजपा के कठपुतली के रूप में काम कर रहा है.
  6. एक और गंभीर मुद्दा यह है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और एसआईआर शुरू होने के बीच राजनीतिक दलों के बीएलए (BLA) के आवेदनों पर 11 लाख वोट हटा दिए गए हैं. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को जवाब देना चाहिए कि क्या इन 11 लाख मतदाताओं को उनके नाम हटाए जाने से पहले नोटिस दिया गया था? हम इस पर स्पष्टीकरण चाहते हैं.
  7. हमारे संज्ञान में यह आया है कि बुजुर्गों, महिलाओं, विशेष रूप से दिव्यांग नागरिकों के लिए, जो सुधार के लिए या मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने के लिए बीएलओ के पास जा रहे हैं, उनको कोई उचित सहायता नहीं मिल रही है.

वामदलों की मांगें:

  • (a). फाॅर्म 6 के साथ-साथ एसआईआर फाॅर्म भी स्वीकार किए जाते रहें. निर्वाचन आयोग को प्रत्येक वार्ड में एक सार्वजनिक रूप से विज्ञापित स्थान निर्दिष्ट करना चाहिए, जहां एक अधिकारी प्रतिदिन फाॅर्म प्राप्त करने के लिए उपलब्ध हो.
  • (b).  एसआईआर में हटाए गए सभी लोगों को आवश्यक नोटिस देकर सूचित किया जाए. झुग्गियों और पुनर्वास काॅलोनियों, अनधिकृत काॅलोनियों आदि में बीएलओ को सुबह जल्दी या देर शाम नोटिस वितरित करने चाहिए, ताकि काम पर जाने वाले मजदूर अपना नाम जुड़वा सकें.
  • (c). हटाए गए नामों की मतदाता सूची बीएलए को उपलब्ध करवायी जाए.
  • (d). 30 सितंबर की समय सीमा को ईसीआई-दिल्ली द्वारा बढ़ाया जाए, और बढ़ाए गए समय को सभी के लिए सुनिश्चित किया जाए.
  • (e).  बुजुर्गों, महिलाओं, विशेष रूप से दिव्यांग नागरिकों के लिए, जो सुधार के लिए या मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने के लिए बीएलओ के पास जा रहे हैं, उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

19 September, 2026