23 सितंबर 2026
भारत के चुनाव आयोग द्वारा आज जारी बयान आज के इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित तथ्यों की ही पुष्टि करता है, कि आयोग के भीतर गंभीर मतभेद हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी भूमिका है. चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे उन आपत्तियों की पुष्टि करते हैं जिन्हें हमारी पार्टी सहित कई लोगों द्वारा लगातर उठाया जाता रहा है. चुनाव आयोग द्वारा इसे एक तरफा तस्वीर बता कर कह देना कि चुनाव आयोग के अन्दर यह एक सामान्य प्रक्रिया है, दरअसल पूरे मामले को हल्का करने और बचाव न किए जा सकने वाले कृत्य का बचाव करने की एक दयनीय कोशिश है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट केवल उन अनियमितताओं की पुष्टि कर रही है, जिन्हें एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न सार्वजनिक ऑडिट और अध्ययनों में सामने लाया जा चुका है. इस एसआईआर की गलत प्रक्रिया के कारण पहले ही लाखों मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो कर तमाम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस के माध्यम से बनायी गयी गलत मतदाता सूचियों के आधार पर कराये गये चुनाव, चुनाव आयोग की तथाकथित 'सफलता' का सर्टिफिकेट कैसे बन सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट, जिसकी पुष्टि अब स्वयं चुनाव आयोग ने भी कर दी है, के आधार पर हम भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर निम्नलिखित मांगें उठा रहे हैं:
1. ज्ञानेश कुमार पर तत्काल महाभियोग चलाया जाए.
2. एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल निलंबित किया जाए.
3. गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए प्रत्येक मतदाता का मतदान का अधिकार तत्काल बहाल किया जाये.
4. एसआईआर शुरू किए जाने के बाद हुये सभी चुनावों को रद्द किया जाए और संबंधित राज्यों में दुबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जाए।
5. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की भावना के अनुरूप संवैधानिक संशोधन किया जाए तथा चुनाव आयोग के कामकाज में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं।
— केंद्रीय कमेटी, भाकपा माले) लिबरेशन