वर्ष 35 / अंक - 04 / 165 दिन लंबा चेन्नई सफाई कर्मचारियों का संघर्ष विज...

165 दिन लंबा चेन्नई सफाई कर्मचारियों का संघर्ष विजय के साथ समाप्त

165 दिन लंबा चेन्नई सफाई कर्मचारियों का संघर्ष विजय के साथ समाप्त

160 दिनों से अधिक के अथक संघर्ष के बाद, 12 जनवरी को एलटीयूसी-ऐक्टू के तहत संगठित चेन्नई के सफाई कर्मचारियों ने अपनी लड़ाई सकारात्मक उपलब्धि पर समाप्त की, जिसमें डीएमके सरकार उनकी मुख्य मांगों पर सहमत हो गई. निजीकरण के प्रयासों को विफल करते हुए, कर्मचारियों को चेन्नई निगम द्वारा सीधा भुगतान किया जाना जारी रहेगा. मेयर आर प्रिया के साथ मंत्री पीके. शेखर बाबू अनशन कर रहे कर्मचारियों को जूस पिलाकर उपवास समाप्त कराने के लिए एलटीयूसी कार्यालय गए.

मंत्री ने आश्वासन दिया कि लगभग 1,400 कर्मचारियों की सेवाएं, जो 1 अगस्त 2025 से गिरफ्तारी, मुकदमों और पुलिस क्रूरता का सामना करते हुए लगातार संघर्ष कर रहे थे, जनवरी 2026 के अंत तक बहाल कर दी जाएंगी. उन्होंने मजदूरी न काटने का भी वादा किया.

यह संघर्ष 1,400 अस्थायी सफाई कर्मचारियों की सेवाएं ,जो 31 जुलाई 2025 तक मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के तहत सुरक्षित थी, 1 अगस्त 2025 को समाप्त किए जाने के बाद शुरू हुआ. निगम ने मांग की कि वे 5 से 20 साल की अपनी पिछली सेवा छोड़ दें और निजी ठेकेदारों के साथ रोजगार स्वीकार करें. ये कर्मचारी मुख्य रूप से अनुसाचित जातियों से आने वाले गरीब लोग और महिलाएं हैं.

1 अगस्त 2025 को रिप्पन बिल्डिंग में यह ऐतिहासिक संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें कर्मचारी चिलचिलाती गर्मी और बारिश में दिन-रात बैठे रहे. डीएमके सहयोगियों सीपीआई, सीपीआई(एम) और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों ने हड़ताल का समर्थन किया. 13 अगस्त 2025 को पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं, लेकिन उच्च न्यायालय ने 14 अगस्त 2025 को नेताओं को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की, जिससे यह एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया. कर्मचारियों की मांगें थीं कि 31 जुलाई 2025 की शर्तों के तहत रोजगार बहाल किया जाए, निगम से सीधे भुगतान जारी रखा जाए, खोई हुई मजदूरी के लिए मुआवजा दिया जाए और पुलिस मुकदमे वापस लिए जाएं.

सरकार को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर करने हेतु कर्मचारियों ने लगातार साप्ताहिक, और बाद में दैनिक संघर्ष जारी रखे, जिसमें कब्रिस्तानों में या कमर तक प्रदूषित पानी में खड़े होना शामिल था. उन्हें बार-बार गिरफ्तारियों का सामना करना पड़ा और वे पांच महीने से अधिक समय तक मजदूरी से वंचित रहे, जबकि उनके परिजनों ने अत्यधिक कठिनाइयां झेलीं. उनकी यूनियन एलटीयूसी-ऐक्टू जब भी संभव हुआ, चावल, तेल और दाल जैसी राहत सामग्रियां मुहैया कराती रही थी.

17 नवंबर 2025 से महिला कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय की अनुमति से बैंचों में अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया जो 57 दिनों तक चला. संघर्ष के समर्थन में प्रगतिशील बुद्धिजीवियों, कार्यकर्ताओं, लेखकों, प्रोफेसरों, वकीलों और नागरिकों ने एक हस्ताक्षर अभियान चलाया और सफाई कर्मचारियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक संवददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

भाकपा(माले)-लिबरेशन सभी बाधाओं के बावजूद अपने संघर्ष और अपने उत्साह को बनाए रखने के लिए सफाई कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों को बधाई देता है. हम सभी स्तरों पर यूनियन नेताओं के साथ-साथ सभी नागरिकों और प्रगतिशील संगठनों को भी हार्दिक बधाई देते हैं, जिन्होंने कर्मचारियों की लंबी और बहादुराना लड़ाई के प्रति एकजुटता व्यक्त की.

हम तमिलनाडु के मुख्य मंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके. स्टालिन को भी इस मुद्दे को सकारात्मक तरीके से सुलझाने के लिए धन्यवाद देते हैं. हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार और चेन्नई निगम जल्द से जल्द कर्मचारियों की सेवाओं को बहाल करने का अपना वादा पूरा करेंगे.


24 January, 2026