वर्ष 35 / अंक - 04 / कामरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस : ‘मैं भ...

कामरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस : ‘मैं भी महेन्द्र सिंह’ के उद्घोष से गूंज उठा बगोदर बस स्टैंड

कामरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस ‘मैं भी महेन्द्र सिंह’ के उद्घोष से गूंज उठा बगोदर बस स्टैंड 16 जनवरी 2026 को झारखंड में जनसंघर्षों के साथी, समय के सबसे लड़ाकू जनयोद्धा शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के 21वें शहादत दिवस के मौके पर बगोदर के ऐतिहासिक बस स्टैंड में किसान-मजदूरों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों व न्यायपसंद आम अवाम की शानदार गोलबंदी हुई. शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के शहादत दिवस पर खम्भरा, बगोदर और गिरिडीह जिला सहित झारखंड की राजधानी रांची, बुंडू, राहे, रामगढ़ के मांडू, गोला गिद्दी, बड़काकाना, हजारीबाग, धनबाद, लातेहार, कोडरमा, जामताड़ा देवघर, लोहरदगा, चतरा और गढ़वा सहित सभी जिलों में अपने शहीद संघर्षशील साथी कामरेड महेंद्र सिंह को नई ऊर्जा के साथ याद करते हुए संकल्प लिये गये. पूरे झारखंड ने अपने जननायक शहीद कामरेड सिंह को याद करते हुए अपने शोक को संकल्प में बदल दिया. बगोदर के भाकपा(माले) कार्यालय में स्थित महेंद्र सिंह की मूर्ति पर पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य सहित पार्टी की पोलित ब्यूरो, केंद्रीय कमेटी और राज्य कमेटी के सदस्यों और अन्य गणमान्य साथियों ने माल्यार्पण-पुष्पांजलि के साथ श्रद्धांजलि दी. साथ ही, साथी महेंद्र सिंह की पत्नी शांति देवी को भी उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर बगोदर बस पड़ाव में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे. 16 जनवरी का यह शहादत दिवस कार्यक्रम भाकपा(माले) का आयोजन नहीं रह जाता है. झारखंड के इस सबसे लोकप्रिय नेता के शहादत दिवस पर लोग स्वतः ही यहां भारी तादाद में उमड़ आते हैं. उनके शहादत दिवस को मनाने तथा बलिदान को याद करने यहां आ पहुंचते हैं. बगोदर बस स्टैंड में इस मौके पर जो संकल्प सभा आयोजित हुई उसे पार्टी के महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य, पोलित ब्यूरो सदस्यों – का. जनार्दन प्रसाद महतो, हलधर महतो, विनोद सिंह और मनोज भक्त, विधायक और केंद्रीय कमेटी के सदस्य अरूप चटर्जी, केन्द्रीय कमेटी सदस्य गीता मंडल, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार, ऐपवा की नेत्री जयंती चौधरी, आइसा की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा, सीताराम सिंह, पूरनमहतो, अशोक पासवान, उस्मान अंसारी, परमेश्वर महतो तथा पवन महतो ने संबोधित किया. भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने जन संकल्प सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पूरे देश में नफरत और हिंसा फैला रही है और देश को बांटने का काम कर रही है. अगर कोई बांग्ला में बात करता है तो उसे बांग्लादेशी घुसपैठिया बोला जाता है. भाजपा के नेता अपने ही देश के नागरिकों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं. लाल किला के पास जब बम विस्फोट हो जाता है तो उसकी आड़ में पूरे देश में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती अभियान छेड़ दिया जाता है लेकिन ठीक से उसकी जांच भी नहीं कराई जाती और कुछ भी नहीं निकल पाता. उन्होंने कहा कि देश के मजदूरों को सबक सिखाने की कोशिश में और उनकी आजादी, मजदूरी और अन्य अधिकारों को खत्म कर देने के लिए चार श्रम कानून लाया गया है. आज उस मनरेगा कानून को खत्म कर दिया जा रहा है, जिसके जरिए एक कोशिश की जा रही थी कि मजदूरों को दूसरे प्रदेश में जाकर काम नहीं करना पड़ेगा. इस तरह आज उस कानून को कमजोर कर तथा मजदूरों के हाथ से न्यूनतम आय का साधन छीन कर सरकार मजदूरों को प्रवासी मजदूर बना देना चाहती है. पूरे देश के संगठित-असंगठित मजदूरों पर चार श्रमिक कोड लाद कर मजदूरों के काम पाने की गारंटी का अधिकार छीनना उनको बेरोजगार बनाने और रास्ते पर बिठा देने के सिवा और क्या है? केंद्र सरकार ये सारे तरीके अपना चुकी है. उन्होंने कहा कि संविधान को ताक पर रखकर बिहार में एसआइआर (SIR) करायास गया और मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम काटे गए. अब उसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में तीन करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटने की साजिश चल रही है और उन्हें नोटिस भेजी गयी है. यह एसआइआर आम नागरिकों के वोट देने के अधिकार पर सीधा-सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार सारी सरकारी संस्थाओं को अपने हाथ की कठपुतली बना चुकी है. वह जनता पर दमनकारी कानून और नीतियां लागू कर रही है जबकि प्रधामंत्री मोदी अमेरिका के सामने नतमस्तक हैं और अपनी रीढ़ खड़ी नहीं कर पा रहे हैं. यहां तक कि हमारी सरकार साम्राज्यवादी ताकतों की गुंडागर्दी के खिलाफ मुखर होकर बोल भी नहीं पा रहे हैं. अमेरिकी साम्राज्यवाद गुंडागर्दी के तहत वेनेजुएला के संसाधनों पर हमला कर उसे कब्जा कर लेना चाहता है. एक स्वतंत्रा देश पर कब्जा कर वहां के प्रधान को अपहरण कर अपने देश ले आता है और मोदी जी ऐसे ट्रंप के आगे नतमस्तक दिखाई देते हैं,. का. दीपंकर भट्टाचार्य ने दक्षिण अफ्रीका के नाइजर में बंधक बना कर रखे गए पांच प्रवासी मजदूरों की वापसी पर उन्हें बधाई दी और मंच पर बुला कर उनका स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया. शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के पुत्रा और पूर्व विधायक का. विनोद सिंह ने कहा कि महेंद्र सिंह जन संघर्षों के नेता थे, जन आंदोलन के नेता थे. वे अपने जीवन के अंतिम दिन तक जनता के काम में लग रहे. उन्होंने सदन से लेकर सड़कों पर अनगिनत आंदोलनों का नेतृत्व किया. उनकी पहुंच बिल्कुल नीचे के लोगों तक थी. जननायक महेंद्र सिंह की इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की आज – जब देश आपराधिक मामलों का अड्डा बन गया है – सबसे ज्यादा जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश में आज जो भी लोग कंपनी राज और कॉर्पारेट के खिलाफ आंदोलन की बात करते हैं, मोदी सरकार उनको जेल में डाल देती है, लेकिन बलात्कारी बाबओ को पैरोल पर छोड़ देती हैं. पूरे देश में महिलाओं के साथ बलात्कार व हत्या की घटनायें आम हो चुकी हैं. मोदी राज में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश से हर रोज बलात्कार व हत्या की घटनाओं की खबर आ रही है. उत्तराखंड की सरकार अंकिता भंडारी के हत्यारों को बचाने में लगी हुई है. इसके लिए यहां तक कि न्यायालय का भी दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मोदी की सरकार देश की सबसे निकम्मी सरकार साबित हुई है. उसने देश में शिक्षा को महंगा कर दिया है, नौकरियों की व्यवस्था खत्म कर दी है और युवाओं को बेरोजगार बनाए रखने तथा उनके दिमाग में नफरत के बीज डालने में लगी रहती है. बगोदर के वर्तमान विधायक द्वारा पिछले दिनों महेंद्र सिंह की पहचान पर उंगली उठाने के बाद इस बार पूरे झारखंड में ‘मैं हूं महेंद्र सिंह’ के नारे के साथ पूरे झारखंड में महेंद्र सिंह का शहादत दिवस मनाया गया, बगोदर की जन संकल्प सभा में भी मंच से लेकर पूरी भीड़ में युवाओं और वक्ताओं ने भी ‘मैं हूं महेंद्र सिंह, मैं हूं महेंद्र सिंह’ का उद्घोष किया. इसी उद्घोष के साथ लाल झंडे से पटे बगोदर में कारवां आगे बढ़ता रहा. पूरे झारखंड में ही महेंद्र सिंह के 21वें शहादत दिवस को काफी जोश-खरोश और नई ऊर्जा के साथ मनाया गया. आज झारखंड में भी जिस तरह से जमीन की लूट हो रही है, और राज्य सरकार द्वारा जिस तरह से अडानी को जंगल व जमीन सौंपा जा रहा है, उसके खिलाफ भी आज के दिन के संकल्प दिवस आयोजनों में, खासतौर पर रामगढ़ और हजारीबाग में पुरजोर आवाज उठी. रांची में महेंद्र सिंह के शहादत दिवस आयोजन के मौके पर खूंटी जिले में सोमा मुंडा की हालिया हत्या पर रोष प्रकट किया गया और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किए गए. कॉ. महेन्द्र सिंह के 21वें शहादत दिवस के अवसर पर लिए गए प्रस्ताव जल-जंगल-जमीन, लोकतंत्र व आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प 1. मोदी सरकार ने मनरेगा कानून को समाप्त कर ग्रामीण भारत पर बड़ा हमला किया है तथा गरीबों की आजीविका और ग्रामीण संसाधनों के विकास को छीनने की साजिश की है. श्रम-कानूनों को निरस्त कर चार लेबर कोड थोपना मेहनतकश समुदाय को कॉर्पारेट हमलों के सामने निहत्था करना और उन्हें कॉर्पारेट गुलामी के लिए मजबूर करना है. मोदी सरकार इन कदमों को वापस ले. यह सभा जनता से अपील करती है कि व्यापक आंदोलन के जरिए सरकार को पीछे हटने पर विवश करे. सभा यह भी मांग करती है कि झारखंड विधानसभा इस विषय पर प्रस्ताव पारित करे. 2. जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्षरत खूंटी के आदिवासी नेता एदल पड़हा सोना मुंडा की हत्या की यह सभा कड़ी भर्त्सना करती है और उनकी हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों द्वारा किए गए बंद का पूर्ण समर्थन करती है. सभा हेमंत सरकार से मांग करती है कि उनके परिवार के आश्रितों को नौकरी दी जाए, उनके द्वारा संचालित स्कूल को विकसित किया जाए, और हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए. 3. यह सभा गोड्डा में मॉब-लिंचिंग के जरिए पप्पू अंसारी की हत्या की कड़ी निंदा करती है और गुनहगारों को शीघ्र सजा दिलाने की मांग करती है. सभा यह भी मांग करती है कि सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले तत्वों पर लगाम लगाई जाए तथा गौरक्षा के नाम पर हिंसा और वसूली करने वाले गिरोहों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए. 4. यह सभा राज्य में अडाणी के बढ़ते हस्तक्षेप के प्रति गहरी चिंता व्यक्त करती है और बड़कागांव-गोंदलपुरा में अधिग्रहण-विरोधी आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता प्रकट करती है. हम हेमंत सरकार से मांग करते हैं कि अडाणी के साथ हुए तमाम समझौते रद्द किए जाएं. गो्यस्त्रा में अडाणी द्वारा विस्थापित लोग आज भी रोजगार और उचित मुआवजे के लिए संघर्षरत हैं; राज्य सरकार उनके मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप करे. 5. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का हालिया बयान कि “2003 नागरिकता निर्धारण का आधार है” – अत्यंत भ्रामक है और मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (SIR) को भाजपा के राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार प्रभावित करने का प्रयास है. आदिवासियों, दलितों, संप्रदाय विशेष के लोगों और प्रवासी मजदूरों को मतदान अधिकार से वंचित करने के लिए SIR को हथियार की तरह इस्तेमाल करना संवैधानिक अपराध है. 6. सार्वजनिक संसाधनों और उपक्रमों के तेजी से हो रहे निजीकरण ने पर्यावरण को विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है तथा शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में हवा और पानी की भीषण किल्लत पैदा कर दी है. इस प्रक्रिया ने नियोजन और रोजगार के अवसर लगभग समाप्त कर दिए हैं. निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए. तमाम कोलियरियों और अन्य उपक्रमों में ठेका/अनुबंध पर काम करने वाले मजदूरों को एचटीसी द्वारा तय मजदूरी और सभी सुविधाएं तत्काल प्रदान की जाएं. 7. झारखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि-व्यवसाय के नाम पर भूमि-माफियाओं की दबंगई और अपराध बढ़ गए हैं, तथा भूमि अधिकारी उनके साथ मिलीभगत कर मनमानी कर रहे हैं. लैंड बैंक को समाप्त किया जाए और उसमें दर्ज जमीन को विमुक्त कर ग्राम सभाओं को वापस सौंपा जाए. भविष्य में किसी भी प्रकार के अधिग्रहण के लिए ग्राम सभाओं की सहमति अनिवार्य की जाए. 8. झारखंड विधानसभा द्वारा पूर्व में पारित ओबीसी-दलित आरक्षण को बढ़ाया जाए. राज्य में स्थानीयता की उपयुक्त नीति लागू की जाए तथा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों में इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए. आउटसोर्सिंग और अन्य निजी बहालियों में भी स्थानीयता नीति का सख्त अनुपालन हो. 9. झारखंड में कृषि विकास के लिए किसानों को डीजल और बिजली पर विशेष सब्सिडी दी जाए. सिंचाई-व्यवस्था सुदृढ़ की जाए और पुरानी नहर योजनाओं को अद्यतन कर पुनः क्रियाशील बनाया जाए. 10. यह सभा राज्य सरकार से मांग करती है कि शैक्षणिक परिसरों और संस्थानों में सांप्रदायिक तत्वों की घुसपैठ रोकी जाए. छात्रवृत्ति-वितरण में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगे और परिसरों में छात्रों की भागीदारी और सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करने हेतु छात्र संघ चुनाव नियमित रूप से करवाए जाएं.

16 जनवरी 2026 को झारखंड में जनसंघर्षों के साथी, समय के सबसे लड़ाकू जनयोद्धा शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के 21वें शहादत दिवस के मौके पर बगोदर के ऐतिहासिक बस स्टैंड में किसान-मजदूरों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों व न्यायपसंद आम अवाम की शानदार गोलबंदी हुई. शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के शहादत दिवस पर खम्भरा, बगोदर  और गिरिडीह जिला सहित झारखंड की राजधानी रांची, बुंडू, राहे, रामगढ़ के मांडू, गोला गिद्दी, बड़काकाना, हजारीबाग, धनबाद, लातेहार, कोडरमा, जामताड़ा देवघर, लोहरदगा, चतरा और गढ़वा सहित सभी जिलों में अपने शहीद संघर्षशील साथी कामरेड महेंद्र सिंह को नई ऊर्जा के साथ याद करते हुए संकल्प लिये गये. पूरे झारखंड ने अपने जननायक शहीद कामरेड सिंह को याद करते हुए अपने शोक को संकल्प में बदल दिया.

बगोदर के भाकपा(माले) कार्यालय में स्थित महेंद्र सिंह की मूर्ति पर पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य सहित पार्टी की पोलित ब्यूरो, केंद्रीय कमेटी और राज्य कमेटी के सदस्यों और अन्य गणमान्य साथियों ने माल्यार्पण-पुष्पांजलि के साथ श्रद्धांजलि दी. साथ ही, साथी महेंद्र सिंह की पत्नी शांति देवी को भी उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

इस मौके पर बगोदर बस पड़ाव में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे. 16 जनवरी का यह शहादत दिवस कार्यक्रम भाकपा(माले) का आयोजन नहीं रह जाता है. झारखंड के इस सबसे लोकप्रिय नेता के शहादत दिवस पर लोग स्वतः ही यहां भारी तादाद में उमड़ आते हैं. उनके शहादत दिवस को मनाने तथा बलिदान को याद करने यहां आ पहुंचते हैं.

बगोदर बस स्टैंड में इस मौके पर जो संकल्प सभा आयोजित हुई उसे पार्टी के महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य, पोलित ब्यूरो सदस्यों – का. जनार्दन प्रसाद महतो, हलधर महतो, विनोद सिंह और मनोज भक्त, विधायक और केंद्रीय कमेटी के सदस्य अरूप चटर्जी, केन्द्रीय कमेटी सदस्य गीता मंडल, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार, ऐपवा की नेत्री जयंती चौधरी, आइसा की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा, सीताराम सिंह, पूरनमहतो, अशोक पासवान, उस्मान अंसारी, परमेश्वर महतो तथा पवन महतो ने संबोधित किया.

भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने जन संकल्प सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पूरे देश में नफरत और हिंसा फैला रही है और देश को बांटने का काम कर रही है. अगर कोई बांग्ला में बात करता है तो उसे बांग्लादेशी घुसपैठिया बोला जाता है. भाजपा के नेता अपने ही देश के नागरिकों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं. लाल किला के पास जब बम विस्फोट हो जाता है तो उसकी आड़ में पूरे देश में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती अभियान छेड़ दिया जाता है लेकिन ठीक से उसकी जांच भी नहीं कराई जाती और कुछ भी नहीं निकल पाता.

उन्होंने कहा कि देश के मजदूरों को सबक सिखाने की कोशिश में और उनकी आजादी, मजदूरी और अन्य अधिकारों को खत्म कर देने के लिए चार श्रम कानून लाया गया है. आज उस मनरेगा कानून को खत्म कर दिया जा रहा है, जिसके जरिए एक कोशिश की जा रही थी कि मजदूरों को दूसरे प्रदेश में जाकर काम नहीं करना पड़ेगा. इस तरह आज उस कानून को कमजोर कर तथा मजदूरों के हाथ से न्यूनतम आय का साधन छीन कर सरकार मजदूरों को प्रवासी मजदूर बना देना चाहती है. पूरे देश के संगठित-असंगठित मजदूरों पर चार श्रमिक कोड लाद कर मजदूरों के काम पाने की गारंटी का अधिकार छीनना उनको बेरोजगार बनाने और रास्ते पर बिठा देने के सिवा और क्या है? केंद्र सरकार ये सारे तरीके अपना चुकी है.

उन्होंने कहा कि संविधान को ताक पर रखकर बिहार में एसआइआर (SIR) करायास गया और मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम काटे गए. अब उसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में तीन करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटने की साजिश चल रही है और उन्हें नोटिस भेजी गयी है. यह एसआइआर आम नागरिकों के वोट देने के अधिकार पर सीधा-सीधा हमला है.

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार सारी सरकारी संस्थाओं को अपने हाथ की कठपुतली बना चुकी है. वह जनता पर दमनकारी कानून और नीतियां लागू कर रही है जबकि प्रधामंत्री मोदी अमेरिका के सामने नतमस्तक हैं और अपनी रीढ़ खड़ी नहीं कर पा रहे हैं. यहां तक कि हमारी सरकार साम्राज्यवादी ताकतों की गुंडागर्दी के खिलाफ मुखर होकर बोल भी नहीं पा रहे हैं. अमेरिकी साम्राज्यवाद गुंडागर्दी के तहत वेनेजुएला के संसाधनों पर हमला कर उसे कब्जा कर लेना चाहता है. एक स्वतंत्रा देश पर कब्जा कर वहां के प्रधान को अपहरण कर अपने देश ले आता है और मोदी जी ऐसे ट्रंप के आगे नतमस्तक दिखाई देते हैं,.

का. दीपंकर भट्टाचार्य ने दक्षिण अफ्रीका के नाइजर में बंधक बना कर रखे गए पांच प्रवासी मजदूरों की वापसी पर उन्हें बधाई दी और मंच पर बुला कर  उनका स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया.

शहीद कामरेड महेंद्र सिंह के पुत्र और पूर्व विधायक का. विनोद सिंह ने कहा कि महेंद्र सिंह जन संघर्षों के नेता थे, जन आंदोलन के नेता थे. वे अपने जीवन के अंतिम दिन तक जनता के काम में लग रहे. उन्होंने सदन से लेकर सड़कों पर अनगिनत आंदोलनों का नेतृत्व किया. उनकी पहुंच बिल्कुल नीचे के लोगों तक थी. जननायक महेंद्र सिंह की इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की आज – जब देश आपराधिक मामलों का अड्डा बन गया है – सबसे ज्यादा जरूरत है.

उन्होंने कहा कि देश में आज जो भी लोग कंपनी राज और कॉर्पारेट के खिलाफ आंदोलन की बात करते हैं, मोदी सरकार उनको जेल में डाल देती है, लेकिन बलात्कारी बाबओ को पैरोल पर छोड़ देती हैं. पूरे देश में महिलाओं के साथ बलात्कार व हत्या की घटनायें आम हो चुकी हैं. मोदी राज में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश से हर रोज बलात्कार व हत्या की घटनाओं की खबर आ रही है. उत्तराखंड की सरकार अंकिता भंडारी के हत्यारों को बचाने में लगी हुई है. इसके लिए यहां तक कि न्यायालय का भी दुरुपयोग किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि मोदी की सरकार देश की सबसे निकम्मी सरकार साबित हुई है. उसने देश में शिक्षा को महंगा कर दिया है, नौकरियों की व्यवस्था खत्म कर दी है और युवाओं को बेरोजगार बनाए रखने तथा उनके दिमाग में नफरत के बीज डालने में लगी रहती है.

बगोदर के वर्तमान विधायक द्वारा पिछले दिनों महेंद्र सिंह की पहचान पर उंगली उठाने के बाद इस बार पूरे झारखंड में ‘मैं हूं महेंद्र सिंह’ के नारे के साथ पूरे झारखंड में महेंद्र सिंह का शहादत दिवस मनाया गया, बगोदर की जन संकल्प सभा में भी मंच से लेकर पूरी भीड़ में युवाओं और वक्ताओं ने भी ‘मैं हूं महेंद्र सिंह, मैं हूं महेंद्र सिंह’ का उद्घोष किया. इसी उद्घोष के साथ लाल झंडे से पटे बगोदर में कारवां आगे बढ़ता रहा.

पूरे झारखंड में ही महेंद्र सिंह के 21वें शहादत दिवस को काफी जोश-खरोश और नई ऊर्जा के साथ मनाया गया. आज झारखंड में भी जिस तरह से जमीन की लूट हो रही है, और राज्य सरकार द्वारा जिस तरह से अडानी को जंगल व जमीन सौंपा जा रहा है, उसके खिलाफ भी आज के दिन के संकल्प दिवस आयोजनों में, खासतौर पर रामगढ़ और हजारीबाग में पुरजोर आवाज उठी.

रांची में महेंद्र सिंह के शहादत दिवस आयोजन के मौके पर खूंटी जिले में सोमा मुंडा की हालिया हत्या पर रोष प्रकट किया गया और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किए गए.


कॉ. महेन्द्र सिंह के 21वें शहादत दिवस के अवसर पर लिए गए प्रस्ताव

जल-जंगल-जमीन, लोकतंत्र व आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प

1. मोदी सरकार ने मनरेगा कानून को समाप्त कर ग्रामीण भारत पर बड़ा हमला किया है तथा गरीबों की आजीविका और ग्रामीण संसाधनों के विकास को छीनने की साजिश की है. श्रम-कानूनों को निरस्त कर चार लेबर कोड थोपना मेहनतकश समुदाय को कॉर्पारेट हमलों के सामने निहत्था करना और उन्हें कॉर्पारेट गुलामी के लिए मजबूर करना है. मोदी सरकार इन कदमों को वापस ले. यह सभा जनता से अपील करती है कि व्यापक आंदोलन के जरिए सरकार को पीछे हटने पर विवश करे. सभा यह भी मांग करती है कि झारखंड विधानसभा इस विषय पर प्रस्ताव पारित करे.

2. जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्षरत खूंटी के आदिवासी नेता एदल पड़हा सोना मुंडा की हत्या की यह सभा कड़ी भर्त्सना करती है और उनकी हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों द्वारा किए गए बंद का पूर्ण समर्थन करती है. सभा हेमंत सरकार से मांग करती है कि उनके परिवार के आश्रितों को नौकरी दी जाए, उनके द्वारा संचालित स्कूल को विकसित किया जाए, और हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए.

3. यह सभा गोड्डा में मॉब-लिंचिंग के जरिए पप्पू अंसारी की हत्या की कड़ी निंदा करती है और गुनहगारों को शीघ्र सजा दिलाने की मांग करती है. सभा यह भी मांग करती है कि सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले तत्वों पर लगाम लगाई जाए तथा गौरक्षा के नाम पर हिंसा और वसूली करने वाले गिरोहों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

4. यह सभा राज्य में अडाणी के बढ़ते हस्तक्षेप के प्रति गहरी चिंता व्यक्त करती है और बड़कागांव-गोंदलपुरा में अधिग्रहण-विरोधी आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता प्रकट करती है. हम हेमंत सरकार से मांग करते हैं कि अडाणी के साथ हुए तमाम समझौते रद्द किए जाएं. गो्यस्त्रा में अडाणी द्वारा विस्थापित लोग आज भी रोजगार और उचित मुआवजे के लिए संघर्षरत हैं; राज्य सरकार उनके मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप करे.

5. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का हालिया बयान कि “2003 नागरिकता निर्धारण का आधार है” – अत्यंत भ्रामक है और मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (SIR) को भाजपा के राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार प्रभावित करने का प्रयास है. आदिवासियों, दलितों, संप्रदाय विशेष के लोगों और प्रवासी मजदूरों को मतदान अधिकार से वंचित करने के लिए SIR को हथियार की तरह इस्तेमाल करना संवैधानिक अपराध है.

6. सार्वजनिक संसाधनों और उपक्रमों के तेजी से हो रहे निजीकरण ने पर्यावरण को विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है तथा शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में हवा और पानी की भीषण किल्लत पैदा कर दी है. इस प्रक्रिया ने नियोजन और रोजगार के अवसर लगभग समाप्त कर दिए हैं. निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए. तमाम कोलियरियों और अन्य उपक्रमों में ठेका/अनुबंध पर काम करने वाले मजदूरों को एचटीसी द्वारा तय मजदूरी और सभी सुविधाएं तत्काल प्रदान की जाएं.

7. झारखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि-व्यवसाय के नाम पर भूमि-माफियाओं की दबंगई और अपराध बढ़ गए हैं, तथा भूमि अधिकारी उनके साथ मिलीभगत कर मनमानी कर रहे हैं. लैंड बैंक को समाप्त किया जाए और उसमें दर्ज जमीन को विमुक्त कर ग्राम सभाओं को वापस सौंपा जाए. भविष्य में किसी भी प्रकार के अधिग्रहण के लिए ग्राम सभाओं की सहमति अनिवार्य की जाए.

8. झारखंड विधानसभा द्वारा पूर्व में पारित ओबीसी-दलित आरक्षण को बढ़ाया जाए. राज्य में स्थानीयता की उपयुक्त नीति लागू की जाए तथा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों में इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए. आउटसोर्सिंग और अन्य निजी बहालियों में भी स्थानीयता नीति का सख्त अनुपालन हो.

9. झारखंड में कृषि विकास के लिए किसानों को डीजल और बिजली पर विशेष सब्सिडी दी जाए. सिंचाई-व्यवस्था सुदृढ़ की जाए और पुरानी नहर योजनाओं को अद्यतन कर पुनः क्रियाशील बनाया जाए.

10. यह सभा राज्य सरकार से मांग करती है कि शैक्षणिक परिसरों और संस्थानों में सांप्रदायिक तत्वों की घुसपैठ रोकी जाए. छात्रवृत्ति-वितरण में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगे और परिसरों में छात्रों की भागीदारी और सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करने हेतु छात्र संघ चुनाव नियमित रूप से करवाए जाएं.



24 January, 2026