वर्ष 35 / अंक - 16 / गुजरात के वलसाड में आदिवासी संघर्ष मोर्चा का कार्य...

गुजरात के वलसाड में आदिवासी संघर्ष मोर्चा का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुआ

गुजरात के वलसाड में आदिवासी संघर्ष मोर्चा का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुआ

12 अप्रैल 2026 को गुजरात प्रांत के बलसाड जिले में धरमपुर अनुमंडल मुख्यालय पर आदिवासी संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया गया.

का. लक्ष्मणभाई वारिया की पांचवीं पुण्यबिथि (8.06.1958 - 12. 04.2021) के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ आयोजन की शुरूआत हुई. इस मौके पर उनके परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे.

का. लक्ष्मणभाई वारिया ने ही सबसे पहले भाकपा(माले) के नेतृत्व में आदिवासियों को संगठित करना शुरू किया था और आगे चलकर इसमें अहम भूमिका निभाई थी. अमरीका-इजरायल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि तथा कालाबाजारी के कारण आदिवसी समुदाय दोहरी मार झेल रहा है. विकास के नाम पर इस इलाके में जबरन उनकी जमीन छीनी जा रही है. उनसे 12-12 घंटे तक कम से कम मजदूरी पर काम लिया जा रहा है. पहाड़ी इलाकों में पीने के पानी की भी भारी किल्लत है. वनाधिकार कानून को ताक पर रख दिया गया है. बार-बार मेमोरेंडम देने और धरना-प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन अपनी आंख बंद किए हुए है.

गुजरात के वलसाड जिले में मनरेगा के तहत काम बंद है और उसे शुरू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. पिछली 12 मार्च को तीन लेबर कोड के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल व प्रदर्शन में 500 से अधिक की संख्या में पूरे जिले के आदिवासियों ने ‘आदिवासी संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले धरमपुर अनुमंडल कार्यालय पर जुझारू प्रदर्शन में हिस्सा लिया और अपनी मांगों को बुलंद किया और व्यापक मजदूर आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता दर्शायी.

इस कन्वेंशन में निम्नलिखीत मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने और व्यापक तौर पर आदिवासियों को संगठित करने का निर्णय लिया गया.

  1. वनाधिकार कानून लागू होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा.
  2. औद्योगिक कॉरीडोर और बुलेट ट्रेन के नाम पर आदिवासियों की जमीन की जबरन दखली पर प्रतिबंध लागने की मांग पर आंदोलन तेज किया जाएगा.
  3. मनरेगा के तहत काम को अविलंब चालू करवाने की मांग पर आंदोलन होगा.
  4. औद्योगिक विकास के नाम पर काम के घंटों (8 घंटे) में कोई भी बढ़ोतरी और मजदूरी में कटौती बिल्कुल मान्य नहीं होगी.
  5. आदिवासी क्षेत्रों खासकर पहाड़ी इलाकों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर सड़कों का निर्माण हो.
  6. पहाड़ी इलाकों में पीने की पानी की समस्या को अविलंब दूर किया जाए.
  7. इस क्षेत्र में अधिकांश आदिवासी औद्योगिक संस्थानों में काम करते हैं. अतः तीन लेबर कोड के खिलाफ आदिवासियों को संगठित करने का काम भी इस मोर्चे को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करना होगा.

इस कन्वेंशन में लगभग 130 आदिवासी कार्यकर्ता शामिल थे. इनमें आधे से अधिक महिलायें थीं. आनन्द भाई की अध्यक्षता और अमित पटवारिया के संचालन में संपन्न हुए कन्वेंशन को भाकपा(माले) केन्द्रीय कमेटी के सदस्य का. प्रभात कुमार ने मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित किया.

इस कन्वेंशन ने सर्वसम्मति से का. आनन्द भाई को अपना अध्यक्ष और का. सुरेश भाई गायकवाड़ को जिला सचिव चुना. इसके अतिरिक्त धरमपुर, कपराड़ा, बलसाड और उमरगांव आदि जिलों के लिए भी आदिवासी संघर्ष मोर्चा के प्रभारियों की नियुक्ति की गई.

इस कन्वेंशन के पूर्व 11 अप्रैल को उमतगांव (धरमपुर) में भाकपा(माले) की बलसाड़ जिला कमेटी की विस्तारित बैठक आयोजित की गई. 12 फरवरी के भारत बंद, 23 मार्च को शहीदे आजम भागत सिंह के शहादत दिवस पर अहमदाबाद में आरवाइए की रैली और आदिवासी संषर्घ मोर्चा के नेतृत्व में धरमपुर में निकाली गई रैली की समीक्षा करने के साथ-साथ पार्टी को मजबूत बनाने के लिए पार्टी द्वारा जारी 22 अप्रैल आह्वान का अध्ययन किया गया.

पूरे जिले में सांप्रदायिक ताकतों व हिन्दुत्ववादी संगठनों द्वारा सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिशों का मुकाबला करने पर भी बातचीत हुई.

स्वाभाविक मौर पर पार्टी व संगठन की मजबूती ही फासिस्ट सरकार के नापाक इरादों को चकनाचूर करने में अहम भूमिका निभा सकती है और फासिस्ट विरोधी मोर्चे को गतिशीलता प्रदान कर सकती है. इतना ही नहीं, बर्तमान समय में चल रहे युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई, महंगाई के खिलाफ चल रहे प्रतिरोध आंदोलनों पर दमन, आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार का भी दृढ़ता से मुकाबला कर सकती है. मजबूत पार्टी ही प्रशासन पर अपना दबाव पैदा कर अपनी मांगों को मनवाने में भी सक्षम साबित हो सकती है.

कन्वेंशन से पूरे जिले में विभिन्न पार्टी ब्रांचों और तालुका कमेटियों की बैठक कर 22 अप्रैल के आह्वान का अध्ययन करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने का निर्णय लिया गया. का. आनंद भाई ने बैठक की अध्यक्षता और का. कमलेश गुरव ने संचालन किया. बैठक में का. प्रभात कुमार चौधरी, प्रदेश के नेता का. अमित पटवारिया, ऐपवा नेता सुमित्रा बेन, हरेश भाई, सतीश भाई, सुरेश भाई, माहन बिसारिया आदि उपस्थित थे.


18 April, 2026