[ लड़कियों की मुफ्त शिक्षा के लिए, सत्ता संरक्षित बलात्कार की संस्कृति के खिलाफ और सभी धर्म की महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए ऐपवा ने सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन 3 जनवरी-फातिमा शेख के जन्मदिन 9 जनवरी तक पूरे देश में बहनापा अभियान चलाया. यह बहानापा अभियान पूरे देश में चला. उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के बावजूद महिलाओं ने विभिन्न गांव, मोहल्लों में निकल कर इस कार्यक्रम को आयोजित किया.
आज केंद्र सरकार और राज्यों में स्थित भाजपा सरकारों ने ऊपर से इस देश के संविधान को खोखला और यहां की बहुलतावादी संस्कृति को खत्म कर रही है और नीचे समाज में ऐसे तत्वों को खुली छूट दे रखी है जो समाज में झूठ, धोखाधड़ी और गुंडागर्दी के जरिए नफरत फैलाते हैं. ऐसे में सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख की दोस्ती एक मिसाल है जिसने पौने दो सौ साल पहले कुरीतियों और महिलाओं की शिक्षा के विरोधियों को चुनौती दी थी. बिहार, बंगाल, असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में बहनापा अभियान चलाया गया. यहां प्रस्तुत है एक संक्षिप्त रिपोर्ट ]
बिहार
बिहार में इस एक सप्ताह के भीतर 200 से अधिक स्थानों पर यह अभियान चलाया गया है और अभी यह आगे भी जारी रहने वाला है.
राजधानी पटना में 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले और ज्योति राव की मूर्तियों पर माल्यार्पण हुआ और सभा हुई जिसे ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने संबोधित किया. 3 जनवरी को हज भवन के निकट दिव्या गौतम के नेतृत्व में सावित्रीबाई फुले फातिमा शेख की जयंती मनाई गई. 4 जनवरी को जक्कनपुर के चांदपुर बेला में आयोजित कार्यक्रम में लड़कियों और बच्चों के बीच कलम बांटी गई. यहां महिलाओं ने कहा कि धर्म के नाम पर भाजपा के लोग तलवार बांटते हैं और हमारे बच्चों को गुमराह करते हैं उसके बदले बच्चों में कलम बांटना इस बात का प्रतीक है कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा पैदा की जाए, पढ़ने लिखने का माहौल बनाया जाए. 7 जनवरी को दुजरा में हुए कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं और हिंदू महिलाओं – दोनों की बराबर उपस्थिति थी. कंकड़बाग में 8 जनवरी को हुए कार्यक्रम में अंकिता भंडारी के लिए न्याय की आवाज उठाई गई. 7-8 जनवरी को पटना सिटी के नरूदीगंज और मेहंदीगंज में तथा 9 जनवरी को समनपुरा में बहनापा अभियान चला. ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीरा दत्त, पटना नगर सचिव अनुराधा, राखी मेहता, विभा गुप्ता और दिव्या गौतम ने विभिन्न जगहों पर आयोजित इन कार्यक्रमों में शिरकत की. पटना नगर के इन कार्यक्रमों को सफल बनाने में भाकपा(माले) की नगर कमिटी ने सक्रिय भूमिका निभाई.
नवादा में भीषण ठंड के बावजूद 32 से अधिक स्थानों पर बहानापा अभियान का आयोजन किया गया. कामरेड सावित्री गुप्ता के नेतृत्व में गोविंदपुर, अकौना, जंगल बेलदारी, बीकू, दुर्गापुर रामे, नारदीगंज, पछियाडीह, भरपुरा, विपुरा, अमिरका बीघा, रुस्तमपुर और नवादा ग्रामीण के कई गांवों में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ. नवादा ग्रामीण में सुदामा देवी और अन्य साथियों ने कार्यक्रम का संचालन किया.
भोजपुर के आरा शहर के क्रांति पार्क, बहिरो, नहर पर झोपड़पट्टी और मोती टोला मुशहर टोली में हुए बहानापा अभियान के कार्यक्रम में महिलाओं की अच्छी भागीदारी हुई. यहां कार्यक्रम का संचालन संगीता सिंह ने किया. आयर, जगदीशपुर में इंदू सिंह और सहार के मथुरापुर, बंसी डिहरी, वकील टोला, फतेहपुर मठिया और पेउर में प्रखंड सचिव सुनीता देवी के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित हुआ.
सिवान में 35 से अधिक जगहों पर बहानापा अभियान कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं. दरौली, जीरादेई, आंदर प्रखंडों में 35 से अधिक स्थानों पर ऐसा आयोजन हुआ. ऐपवा की राज्य अध्यक्ष सोहिला गुप्ता, मालती राम, मंजीता कौर, मंजू देवी आदि नेताओं ने इन कार्यक्रमों को संचालित किया.
गया शहर में 3 जनवरी को जिला सचिव रीता बर्णवाल के नेतृत्व में महिलाओं ने मार्च किया. 5 जनवरी को शेरघाटी में, 6 जनवरी को गुरारू में और 7- 8 जनवरी को डोभी के दो गांवों में कार्यक्रम आयोजित हुआ. रीता बर्णवाल, शीला वर्मा और अन्य साथियों ने शिरकत की.
राज्य के दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, गोपालगंज, पूर्णिया, बक्सर, बांका, जहानाबाद आदि जिलों में भी कई स्थानों पर ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें शनीचरी देवी, रानी सिंह, साधना शर्मा, रानी प्रसाद, प्रेमा देवी, गिरिजा देवी, संध्या पाल, रेणु देवी, सुलेखा देवी आदि ऐपवा नेत्री शामिल रहीं.
झारखंड
बहानापा सप्ताह में प्रदेश में बढ़ते सांप्रदायिक माहौल, बढ़ती महंगाई, महिलाओं पर माइक्रोफाइनेंस के बढ़ते लोन का दबाव, देश की न्याय व्यवस्था पर बढ़ते मनुवाद के असर और पूरे देश में महिला विरोधी माहौल पर चर्चा की गई. हर जगह महिलाओं ने बड़ी संख्या में इन आयोजनों में भाग लिया. राज्य के रांची, रामगढ़, देवघर, गिरीडीह, धनबाद, पलामू, हजारीबाग सहित कई जिलों में कार्यक्रम हुआ.
3 जनवरी को राज्य सचिव राज्य सचिव गीता मंडल के नेतृत्व में मोहनपुर (देवघर) में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें छात्राओं की भी अच्छी भागीदारी थी. रांची के बुंडू, कोकर, चुटिया और महेंद्र सिंह भवन में तीन से लेकर 9 जनवरी तक आयोजन हुए.
रामगढ़ जिला के घुटुआ बस्ती, बारीडीह, पड़रिया, पोचरा के वार्ड नंबर 7, गोला, बारीडीह गांव आदि में यह अभियान मनाया गया.
धनबाद जिला के सराय ढेला और बलियापुर, गिरिडीह जिले के राजधानवार के निमडीह पंचायत, बोधगोको पंचायत और बगोदर में कार्यक्रम हुए. गीता मंडल, अध्यक्ष सविता सिंह, जयंती चौधरी, नीता बेदिया, खुशबू कुमारी, अनिता देवी, सरोज देवी, नमिता, शांति सेन, ऐती तिर्की, कौशल्या दास, सरिता साहू, पिंकी भारती, लखीमुनी मुंडा और नंदिता भट्टाचार्य आदि नेत्रियों के सहयोग से बहानापा अभियान को सफल बनाया गया.
राजस्थान
उदयपुर में 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर एक गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें सावित्रीबाई के साथ ही फातिमा शेख को भी याद किया गया. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दलित लेखिका कुसुम मेघवाल थीं. प्रोफेसर सुधा चौधरी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख की दोस्ती आज भी उदाहरणीय है. पूर्व आईपीएस अधिकारी यासीन खान पठान, प्रोफेसर हेमचंद्र चंडालिया, नजमा मेवाफरोश, प्रो. शर्मिला सिंघवी, प्रो. एलआर पटेल आदि ने वक्तव्य रखे. ऐपवा राज्य सचिव फरहत बानो ने कार्यक्रम का संचालन किया.
जयपुर में भी कई स्थानों पर महिलाओं के बीच यह कार्यक्रम मनाया गया. कामरेड मंजूलता के नेतृत्व में कामरेज ग्राम विनोदी में साथी लाली मेहरा के घर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां गुर्जर की थड़ी और सोडाला से भी महिलाएं शामिल हुईं.
अजमेर में लोहाखान प्रताप नगर में आयोजन हुआ जहां तस्कीन आदिल, लाडो कंवर और शकुंतला ने कार्यक्रम का संचालन किया.
उत्तर प्रदेश
लखनऊ में चार चरणों में बहनापा अभियान सम्पन्न हुआ. 2 जनवरी को मोहल्ला मीटिंग की गई. 3 जनवरी को शहर के नागरिक समाज के साथ सावित्रीबाई की जयंती मनाई गई जिसमें यूपी में बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं पर नागरिक प्रतिवाद दर्ज कराया गया जिसमें ऐपवा ने भी शिरकत की. 9 जनवरी को ऐपवा, जसम तथा आइसा की ओर से लखनऊ में ‘याद-ए-सावित्रीबाई फुले - फातिमा शेख’ का आयोजन किया गया. 8 जनवरी को भी मोहल्ला मीटिंग कर सावित्रीबाई और फातिमा की जयंती मनाई गई.
बनारस में 3 चरणों में यह अभियान चला. प्रमुख रूप से 3 जनवरी को ऐपवा यंग गर्ल्स के माध्यम से केजी से पीजी तक लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा के सवाल को उठाया. नई शिक्षा नीति और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ भी लड़कियों ने आवाज उठाई. गौरतलब है कि बनारस में घरेलू कामगार बस्ती की बेटियों के साथ ऐपवा पिछले तीन सालों से पाठशाला कार्यक्रम चला रही है जिसमें ड्रॉप आउट लड़कियां और अन्य गरीब वर्ग की लड़कियां अपने स्कूली पाठ्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक सरकारों से जुड़ी शिक्षा भी ग्रहण करती हैं. ऐपवा विगत तीन वर्षों से इस बस्ती में सावित्रीबाई और फातिमा शेख जयंती मना रही है. यंग गर्ल्स विभिन्न सृजनात्मक गतिविधियों के माध्यम से इसमें शामिल रहती हैं.
भदोही के एक गांव में इस अभियान को रोजी, रोटी व रोजगार के ज्वलंत सवालों के साथ जोड़कर मनाया गया. देवरिया में भी तीन चरणों में यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.
लखीमपुर खीरी में 3 जनवरी को पलिया में तीन चरणों में यह अभियान सम्पन्न हुआ . 9 जनवरी को जिले पर मार्च निकालने हुए इस अभियान का समापन किया गया.
अन्य राज्य
कर्नाटक में 4, 5 और 7 जनवरी को बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में कॉ. शिल्पा और निर्मला ने सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख का जन्मदिन कार्यक्रम आयोजित किया.
पश्चिम बंगाल के शिवदासपुर, हावड़ा, कोलकाता और हुगली आदि में कार्यक्रम आयोजित किए गए जहां मिताली, अर्चना घटक, चैताली सेन, इंद्राणी दत्त, चंद्रस्मिता, स्वप्न दास आदि शामिल हुईं.
कार्बी आंगलांग में 3 जनवरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रतिमा इंग्हपी ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया. आंध्र प्रदेश के विसानापेट और विजयवाड़ा में कामरेड अरुणा और कामरेड नागमणि के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित हुआ. दिल्ली के खोड़ा में सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन बनाया गया जिसमें दिल्ली की महिलाओं ने अपनी गीतों के माध्यम से सावित्रीबाई की विरासत को आगे बढ़ने का संकल्प लिया.