वर्ष 35 / अंक - 08 / ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस :...

ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस : समता आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का विरोध करें!

ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस : समता आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का विरोध करें!

12 और 13 फरवरी 2026 को यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन्स और रोहित एक्ट को लागू करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुए लगातार हमलों के बाद, पूरे देश में चल रहे इस व्यापक आंदोलन को बदनाम और कमजोर करने के लिए एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया गया है. इन हमलों और दुष्प्रचार के बावजूद, अखिल भारतीय वंचित अधिकार दिवस का आह्वान देशभर के 100 से अधिक केंद्रों पर सफलतापूर्वक मनाया गया.

16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई और यूजीसी रेगुलेशन्स तथा रोहित ऐक्ट के लिए संघर्ष को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रो. हेमलता महिश्वर, प्रो. इरफान हवीब, प्रो. अपूर्वानंद, अनिल चमड़िया और अनीता भारती ने संबोधित किया. प्रगतिशील छात्र संगठनों – ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ) – ने जारी आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंजलि और तन्वी ने अपने अनुभव साझा किए, जिन्हें हिंसक भीड़ द्वारा हमला झेलना पड़ा. उन्होंने मॉरिस नगर थाने में हुई घटनाओं और रुचि तिवारी द्वारा किए गए व्यवहार का भी उल्लेख किया.

प्रो. एस इरफान हबीब ने दिल्ली विश्वविद्यालय में उनके सार्वजनिक व्याख्यान को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा बाधित किए जाने की घटना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की गुंडागर्दी को ‘न्यू नॉर्मल’ बनाने की कोशिश की जा रही है. विश्वविद्यालयों को समानतामूलक और लोकतांत्रिक स्थान के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए समानता का संघर्ष अनिवार्य है.

प्रो. अपूर्वानंद ने विश्वविद्यालयों के भीतर विमर्श को मिटाने की संस्कृति पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि हालिया घटनाएं, जिनमें पुलिस थाने के भीतर हुई घटना भी शामिल है, गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

प्रो. हेमलता महश्वर ने एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों द्वारा वर्षों से झेले जा रहे उत्पीड़न पर प्रकाश डाला और कहा कि ये सुधार बहुसंख्यक समाज की स्थिति को बदलने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि वे लोकतंत्र की लड़ाई में केवल सहभागी नहीं बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें.

वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने जाति-विरोधी और समानतामूलक संघर्षों के खिलाफ ऐतिहासिक प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया. उन्होंने मीडिया की भ्रामक भूमिका की निंदा की और छात्रों के साथ एकजुटता जताई.

एसएफआई की आइशी घोष ने सामाजिक न्याय के लिए सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया. एसएफआई से जुड़े डीयू छात्र आरिफ ने विश्वविद्यालयों को जातिवाद की पकड़ से मुक्त करने की आवश्यकता बताई. एआईएसएफ के मोहित ने बहिष्करण की प्रवृत्तियों और जातीय हिंसा के खिलाफ संघर्ष की बात रखी. डीएसएफ के हार्दिक ने विश्वविद्यालयों में मौजूद संस्थागत अन्याय के अपने अनुभव साझा किए. आइसा के प्रसेनजीत ने संघर्ष को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने का आह्वान किया.

वे छात्र जिन्होंने डीयू में हुई हिंसा को झेला था, उन्होंने भी अपनी गवाही दी; डीयू के छात्र रोविन, जिन्होंने जातीय हमले का सामना किया, ने एबीवीपी और जातिवादी ताकतों द्वारा उत्पन्न व्यवधानों का उल्लेख किया और बताया कि उन्हें भीड़ द्वारा जातिसूचक गालियों का सामना करना पड़ा.

अंजलि ने घटना के बाद से सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों के बारे में बताया और मुख्यधारा मीडिया की शर्मनाक भूमिका की आलोचना की.

तन्वी ने एबीवीपी द्वारा लगातार फैलाए जा रहे हिंसक माहौल और उसके दोहराए जा रहे पैटर्न पर बात की जिसके खिलाफ संघर्ष और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

फोरम ने घोषणा की कि वह इन दमनकारी और हिंसक प्रयासों से डरने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा और उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में सभाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि नए अध्याय स्थापित किए जा सकें. बिहार में 25 फरवरी को एक राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, पूरे देश में जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित होंगे और व्यापक जन अभियान चलाया जाएगा.

प्रेस कांफ्रेंस से जातिवादी हिंसा के गठजोड़ को पराजित करने का आह्वान और इक्विटी गाइडलाइंस का सही और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की गई.



21 February, 2026