वर्ष 35 / अंक - 18 / अंबेडकर दिवस: भाजपा की ‘समरसता’ तार-तार

अंबेडकर दिवस: भाजपा की ‘समरसता’ तार-तार

अंबेडकर दिवस: भाजपा की ‘समरसता’ तार-तार

14 अप्रैल को, जब पूरे  देश में  बाबा साहब भीमराव अंबेडकर  की जयंती के अवसर पर उनको मानने वाले लोग तमाम तरह के  कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर (खीरी) के बांकेगंज कस्बे के समीप एक गांव मोतीपुर में बाबा साहब भीमराव की मूर्ति खंडित कर देने की अप्रिय घटना घटी.

आगे चलकर मीडिया ने खबर दी, ‘इस घटना से गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियां फूंक दी. पुलिस को कानून व्यवस्था सम्भालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.’

मीडिया में आने वाली ऐसी खबरों और आम लोगों के बीच हो रही तमाम चर्चाओं को देखते हुए और घटना की सत्यता को जानने के लिए भाकपा(माले) ने पार्टी की केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी के नेतृत्व में  एक जांच दल का गठन किया. इस दल में का. सावित्री, अनिता, माधुरी, फागु चौहान और देशराज भी शामिल थे.

जांच दल 18 अप्रैल को घटनास्थल पर जाने के लिए रवाना हुआ. जांच दल जब बांकेगंज रेलवे स्टेशन के बाहर आया तो उसने देखा कि रेलवे स्टेशन से लेकर मोतीपुर गांव (घटनास्थल) की ओर जाने वाली सड़क पर भारी पुलिस बल तैनात है. जांच दल मोतीपुर गांव के पास मुख्य सड़क पर एक मेडिकल स्टोर पर जहां कुछ स्थानीय लोग खड़े थे. जांच दल मेडिकल स्टोर पर खड़े लोगों से जानकारी ले ही रहा था कि वहां कुछ पुलिस वाले और कानूनगो पहुंच गया और उसने जांच दल से तरह-तरह के सवाल पूछने लगा. इतना ही नहीं, उन्होंने जांच दल को गांव में घुसने से रोक दिया कि पहले जिलाधिकारी महोदय से लिखित आदेश लेकर आईये, क्योंकि प्रशासन ने किसी भी राजनीतिक पार्टी को गांव के अंदर जाने पर रोक लगा रखी है.

उनसे उलझने के बजाय जांच दल ने जांच दल में शामिल दो स्थानीय साथियों – का. फागु और का. देशराज को गांव के अंदर भेजा. जांच दल ने यह पाया गया कि पुलिस गांव में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी कर रही है, आधार कार्ड देखकर ही किसी को गांव में घुसने दिया जा रहा है. गांव के अंदर तक भारी पुलिस बल तैनात है. जांच दल ने गांव में आने-जाने वाले लोगों से बातचीत की और बगल के गांव रामतलिया में पहुंची, जहां से बहुत सारे लोग 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती मनाने मोतीपुर पहुंचे थे.

जांच दल मिली जानकारी के मुताबिक मोतीपुर में एक सार्वजनिक जगह है जिसका इस्तेमाल लोग गोबर आदि फेंकने/इकट्टा करने में करते है. उसके एक हिस्से पर चंदा देवी (जाति-पासी) का जो स्थानीय विधायक की एजेंट और भाजपा की नेत्री है, अवैध कब्जा है. हर साल दलित समुदाय के लोग इसी सार्वजनिक जगह पर बाबा साहब की फोटो लगाकर  उनकी जयंती मनाते है. इस साल भी आसपास के कई गांव के लोग वहां जमा हुए, बाबा साहेब का फोटो लगाकर पुष्पांजलि दी और जुलूस निकाला. शाम को सामूहिक भोज का भी आयोजन था.

इसी क्रम में, शाम के करीब 5 बजे, जब जाटव बिरादरी के लोग उस सार्वजनिक जगह पर बाबा साहब की मूर्ति स्थापित करने लगे तो भाजपा नेता चंदा देवी ने यह कहते हुए उनका विरोध करना शुरू कर दिया कि यह एक सार्वजनिक जगह है. यहां बाबा साहब की मूर्ति नही लग सकती. भाजपा से जुड़े लोग भी चंदा देवी के समर्थन में इकट्टे हो गए. भाजपा के लोग नहीं चाहते थे कि बाबा साहब की मूर्ति गांव में लगे.

इसी बीच चंदा देवी ने फोन कर पुलिस को बुला लिया. पुलिस ने निष्पक्षता बरतते हुए दोनों पक्षो को शांत कराने के बजाय भाजपा नेताओं के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया और बाबा साहब की मूर्ति जबरन छीन कर ले जाने लगी. इसी छीना-झपटी में  मूर्ति खंडित हो गयी. लोगो ने इस घटना को बाबा साहेब का अपमान समझा – पुलिस और भाजपा के खिलाफ नारे लगाना और विरोध करना शुरू कर दिया. भाजपा नेताओं के इशारे पर पुलिस ने महिलाओं सहित सभी लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया. इसके बाद ही आक्रोशित जनता ने पुलिस पर हमला किया और उसकी गाड़ी में आग लगा दी.

इसके बाद जिला प्रशासन ने पूरे गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया. 73 नामजद व 200 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही के नाम पर पुलिस लोगों के घरों में जबरन घुस कर तोड़फोड़ मचाया और मारपीट करने लगी. लोग अपने घरों से पलायन करने पर मजबूर हो गए है.

रामतलिया गांव में लोगों ने दिखाया कि पुलिस ने घरों में घुसकर तोड़फोड़ की है. कई घरों में चारपाइयां, आलमारियां व नल टूटे हुए मिले. कई घरों में ताला लटका मिला क्योंकि घरवाले भागे हुए थे. गांव में मौजूद कुछ बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि पुलिस ने गांव में घुस कर कई लोगो को गिरफ्तार किया है, घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की है. श्रीराम, निर्मला, आशा देवी और गौरी आदि समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव में भय का माहौल है. लोग रात में भी सो भी नहीं पा रहे हैं. पुलिस अब तक 23 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.

भाजपा का अंबेडकर ‘प्रेम’ किसी से छुपा नहीं है. दलित वोट बैंक को साधने के लिए वह अंबेडकर जयंती को  ‘सामाजिक समरसता दिवस’ के रूप में मनाने का दिखावा भले करे, अंबेडकर के विचारों से उसका जो नफरत है, वह हर मौके पर खुल कर सामने आ जाता है. यहां भी चंदा देवी को आगे कर भाजपा ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापित करने की कोशिश को रोक दिया, पुलिस से लाठीचार्ज कराके उनके अनुयाइयों को बुरी तरह पिटवाया और संगीन धाराओं में एफआइआर दर्ज करके उन्हें जेल भेजवा रही है.

– कृष्णा अधिकारी


02 May, 2026