14 सितम्बर 2025, पटना : अरवल जिले के लक्ष्मणपुर-बाथे जनसंहार को देश के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम केआर नारायणन ने ‘राष्ट्रीय शर्म’ करार दिया था. इसी हृदयविदारक जनसंहार की सुनवाई 17 सितम्बर 2025 को माननीय सर्वाच्च न्यायालय में होने जा रही है.
ज्ञात हो कि साल 2012 में पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के इस सबसे जघन्य जनसंहार के सभी दोषियों को रिहा कर दिया था. यह फैसला बाथे के गरीबों और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय का दूसरा संहार साबित हुआ. तब भाकपा(माले) ने न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसके विरुद्ध बिहार सरकार ने भी सर्वाच्च न्यायालय में अपील दायर की थी. अब उस अपील पर सुनवाई होने जा रही है.
माले विधायक महानंद सिंह (अरवल) और गोपाल रविदास (फुलवारी) ने आज बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मांग की है कि न्याय और संवैधानिक दायित्व दोनों की मांग है कि बाथे जनसंहार के दोषियों को कठोर दंड मिले. इसके लिए बिहार सरकार को चाहिए कि समय रहते सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करे और मुकदमे की पैरवी के लिए एक सक्षम व अनुभवी अधिवक्ता की नियुक्ति करे, ताकि मुकदमे को प्रभावी ढंग से लड़ा जा सके. जो गलितयां पटना उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान रह गई, वह सर्वाच्च न्यायालय में न हो और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की गारंटी हो सके. भाकपा(माले) विधायकों ने उम्मीद जताई है कि बिहार सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी.