एनजीओ को एमडीएम से बाहर करने, रसोइयों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, उनका मानदेय दस हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा चार श्रम कोड कानून रद्द करने की की प्रमुख मांग के साथ 19 जनवरी, 2026 को बिहार विद्यालय रसोइया संघ के बैनर तले बिहार की राजधानी पटना स्थित एमडीएम निदेशक के कार्यालय के समक्ष सरकारी विद्यालय में कार्यरत रसोइया अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन का नेतृत्व संघ की महासचिव सरोज चौबे, ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव रणविजय कुमार, भाकपा(माले) के पूर्व विधायक गोपाल रविदास, भाकपा(माले) नेता कमलेश कुमार, संघ की सचिव सोना देवी आदि ने किया.
इस दौरान सैकड़ों की तादाद में जुटीं रसोइया ने जीपीओ गोलंबर से जुलूस निकाला और एमडीएम कार्यालय के सामने सभा आयोजित की. सभा को संबोधित करते हुए बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की महासचिव सरोज चौबे ने कहा कि सरकार मध्याह्न भोजन योजना का एनजीओकरण कर रही है जिससे बच्चों को घटिया खाने की आपूर्ति की जा रही है. इसीलिए एनजीओ को एमडीएम से तत्काल बाहर करना होगा और साथ ही रसोइयों को सरकारी कर्मचारी घोषित करना होगा. उनका मानदेय तत्काल दस हजार रूपये प्रतिमाह करना होगा.
उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने से राज्य के लाखों रसोइयों के मानदेय बकाया का भुगतान लंबित है. रसोइयों को समय से पहले किसी न किसी बहाने जबरन रिटायर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें न तो कोई सामाजिक सुरक्षा मुहैया की जाती है और न ही स्वास्थ्य बीमा व पेंशन आदि. उनको न तो ड्रेस दिया जाता और न ही मातृत्व अवकाश. विशेष अवकाश का लाभ भी उनको नहीं दिया जाता. चार श्रम कोड कानून को रद्द करना होगा.
रणविजय कुमार ने कहा कि चुनाव पूर्व रसोइयों का वोट लेने के लिए उनका मानदेय बढ़ा दिया गया लेकिन अब उन्हें अन्य सुविधाएं देना तो दूर, कई-कई महीनों तक मानदेय भी नहीं दिया जाता. उनको इस बार भी तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला. क्रिसमस, नववर्ष व मकर संक्रांति जैसे त्योहार भी बीत गए, लेकिन रसोइयों के लिए ये सारे त्योहार फीके ही रहे. रसोइयों पर केवल काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है. उनसे झाड़ू लगवाया जाता है और शौचालय में पानी डलवाया जाता है.
पूर्व विधायक का. गोपाल रविदास ने कहा कि बिहार में एनजीओ को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. जबकि एनजीओ के द्वारा आपूर्ति किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता इतनी घटिया होती है कि बच्चे या तो खाना लेते नहीं और लेते भी है तो फेंक देते हैं. पूरी योजना में ऊपर से नीचे तक केवल भ्रष्टाचार व्याप्त है.
सभा के बाद सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने मध्याह्न भोजन योजना निदेशक से मिलकर उनको अपना ज्ञापन सौंपा. एमडीएम निदेशक ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया.
सभी वक्ताओं ने चार लेबर कोड के खिलाफ आंदोलन तेज करने और आगामी 12 फरवरी को होनेवाली देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का भी आह्वान किया.
20 जनवरी को रसोइयों की उपरोक्त लंबित मांगों के साथ भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, जमुई आदि समेत कई जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन आयोजित हुए.
मुजफ्फरपुर में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष एक धरना और प्रदर्शन का आयोजन किया गया. इस अवसर पर संघ की राज्य महासचिव सरोज चौबे ने कहा कि मानदेय में मामूली वृद्धि करके और उसे 10 महीना तक सीमित रखकर सरकार ने रसोइयों के साथ धोखाधड़ी की है. उन्होंने रसोइयों को सरकारीकर्मी का दर्जा देने, एनजीओ को मध्याह्न भोजन योजना से अलग करने, रसोइयों को भी सेवानिवृत्ति लाभ देने एवं अन्य मांगों को लेकर आगामी विधानसभा सत्र के दौरान पटना में रसोइयों का एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की. उन्होंने चार लेबर कोर्ट को लागू करने और निजीकरण के खिलाफ एवं अन्य सवालों को लेकर 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से 12 फरवरी को होनेवाली देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया.
उन्होंने मनरेगा कानून में हाल के दिनों में हुए बदलाव का विरोध किया. साथ ही, पटना व अन्य जगहों पर महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या की घटनाओं का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण का झूठा दावा कर रही है.
मौके पर मौजूद भाकपा(माले) के जिला सचिव कृष्णमोहन ने कहा कि सरकार न्यूनतम मजदूरी कानून का भी पालन नहीं कर रही है. रसोइयों को एकजुट होकर अपनी लड़ाई लड़नी होगी.
पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गये ज्ञापन में रसोइयों का न्यूनतम मानदेय 10000 रुपये करने, उनको साल के 12 महीनों का मानदेय देने, एनजीओ को मध्याह्न भोजन योजना से अलग करने और रसोइयों को ईपीएफ, इएसआई और मातृत्व अवकाश की सुविधा देने की मांग की गई. साथ ही, उन्हें वर्ष में दो जोड़ा ड्रेस देनेए रसोइयों को चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी का दर्जा देने, उन्हें मनमाने तरीके से हटाने पर रोक लगाने, भोजन निर्माण के अलावा कोई दूसरा काम रसोइयों से नहीं लेने और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की मांग भी की गई.
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन द्वारा आहूत 12 फरवरी के देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने और विधानसभा पर प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया.
इस प्रदर्शन को संघ के संयोजक नीलकमल, ऐपवा नेता रानी प्रसाद, रसोईया संघ की सुधारानी सिंह, लीला देवी, किसान नेता जितेंद्र यादव, खेग्रामस के राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी और प्रमिला देवी, सावित्री देवी, रिंकू देवी, सुनीता देवी आदि सहित अन्य रसोइया बहनों ने भी संबोधित किया. इसके बाद धरना स्थल से जोरदार नारेबाजी करते हुए एक मार्च निकाला गया जो डाकघर चौराहे तक पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ.
दरभंगा जिले की विद्यालय रसोइयों ने भी अपनी 13 सूत्री मांगों के साथ संघ के जिला सचिव सुरेंद्र पासवान, जिला अध्यक्ष शोभा देवी और नीलम देवी के संयुक्त नेतृत्व में जिलाधिकारी के समक्ष धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम किया.
धरना को संबोधित करते हुए ऐक्टू जिला सचिव उमेश प्रसाद साह ने कहा कि विद्यालय में काम करने वाली रसोइया बहनें समाज के सबसे कमजोर वर्ग की होती हैं. पटना -दिल्ली की सरकारें महिला सशक्तीकरण के दावे करती हैं लेकिन इन गरीब महिलाओं को न्युनतम मजदूरी भी नहीं दे रही हैं. आर्थिक तंगहाली की वजह से वे आधुनिक गुलामी में जीने को मजबूर हैं.
धरना को संबोधित करते हुए सुरेंद्र पासवान ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों पर हमला करने के लिए केंद्र सरकार ने चार श्रम कोड को अधिसूचित कर दिया है. 12 फरवरी को दरभंगा में भी विद्यालय रसोइया और अन्य श्रमिक बड़ी संख्या में सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेंगे. सभा को खेग्रामस नेता सत्य नारायण पासवान, पप्पू, शोभा देवी, नीलम देवी, रेणु देवी, रूपा देवी आदि ने सम्बोधित किया.