वर्ष 34 / अंक-33 / तमिलनाडु में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों...

तमिलनाडु में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों के विरोध में वामपंथी दलों का संयुक्त वक्तव्य

तमिलनाडु में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों के विरोध में वामपंथी दलों का संयुक्त वक्तव्य

वामपंथी दल तमिलनाडु में भाजपा और अन्य हिंदुत्ववादियों द्वारा मदुरै जिले की तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद खड़ा कर साम्प्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशों की कड़ी निंदा करते हैं. इन प्रयासों के पीछे केवल राजनीतिक लाभ उठाने की दुर्भावनापूर्ण मंशा है.

तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर तीन मंदिर, एक दरगाह और कई प्राचीन जैन गुफाएं स्थित हैं. सदियों से यह पहाड़ी साम्प्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक रही है. विभिन्न धर्मों के लोग यहां परस्पर सम्मान के साथ अपने धार्मिक अनुष्ठान करते आए हैं, और अलग-अलग समुदाय बिना किसी विघ्न के साथ रहते आए हैं.

लेकिन तमिलनाडु में राजनीतिक लाभ पाने के लिए भाजपा नेताओं ने इस वर्ष फरवरी में इस स्थान को ‘दक्षिण की अयोध्या’ बताकर बाहरी लोगों को यहां लाया और जानबूझकर एक घटना भड़काने की कोशिश की. उन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग भी माहौल को दूषित करने और फूट डालने के लिए किया.

अब, दिसंबर में, इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने दुर्भाग्यवश पहले दिए गए न्यायालयी फैसलों, ऐतिहासिक अभिलेखों और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम को नजरअंदाज कर दिया है. कोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता को सिकंदर बादूशा दरगाह के समीप स्थित ब्रिटिश कालीन सर्वे स्तंभ पर कार्तिगई दीपम् प्रज्ज्वलित करने की अनुमति देना साम्प्रदायिक ताकतों को एक अवसर प्रदान करता है. एकल-न्यायाधीश पीठ ने राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए याचिकाकर्ता को इस कार्य के लिए सीआइएसएफ की सुरक्षा मांगने की भी अनुमति दे दी. ये निर्णय न केवल पिछले फैसलों की अवहेलना करते हैं बल्कि कानून-व्यवस्था के मामलों में राज्य सरकार के अधिकार को दरकिनार कर संविधान की संघीय भावना को भी कमजोर करते हैं.

हम मदुरै और तमिलनाडु के लोगों की सराहना करते हैं  है कि उन्होंने साम्प्रदायिक घृणा की राजनीति के विरुद्ध एकजुट रहते हुए, और राज्य की बहुलतावादी परंपराओं को कायम रखते हुए, साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया. इस मुद्दे को सख्ती और विवेक से संभालने में राज्य की डीएमके सरकार का रवैया अनुकरणीय रहा है. यह आलोचनीय है कि एआइडीएमके जैसी पार्टियां इस मामले में साम्प्रदायिक तत्वों का समर्थन कर रही हैं.

हम मदुरै के सांसद सु. वेंकटेशन को निशाना बनाए जाने और हिंदुत्ववादी समूहों द्वारा दी गई जान की धमकियों की भी कड़ी निंदा करते हैं. और देश के सभी लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष नागरिकों से आह्वान करते हैं कि वे संघ परिवार की साम्प्रदायिक राजनीति को दृढ़ता से अस्वीकार करें, जो मोदी सरकार द्वारा लोगों की आजीविका और संवैधानिक अधिकारों पर जारी हमलों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है.

डी. राजा (महासचिव, भाकपा)
एम. ए. बेबी (महासचिव, माकपा)
दीपंकर भट्टाचार्य (महासचिव, सीपीआइ-एमएल)
मनोज भट्टाचार्य (महासचिव, आरएसपी)
जी. देवराजन (महासचिव, फॉरवर्ड ब्लॉक)

13 December, 2025