वर्ष 35 / अंक - 05 / कश्मीरी शॉल विक्रेता पर बर्बर हमले की निंदा

कश्मीरी शॉल विक्रेता पर बर्बर हमले की निंदा

कश्मीरी शॉल विक्रेता पर बर्बर हमले की निंदा

देहरादून के विकासनगर में एक युवा कश्मीरी शॉल विक्रेता पर बर्बर हमले की भाकपा(माले) तीव्र निंदा करती है. अप्रैल 2025 में ऐसी ही घटना मसूरी में हुई थी, तब एक प्रतिनिधिमंडल के सामने देहरादून के एसएसपी ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा था कि उन्होंने खुद कुपवाड़ा, वे शॉल बेचने वाले जहां के थे, वहां के एसएसपी से बात कर, खुद के खर्च पर, इन शॉल विक्रेताओं को उत्तराखंड आने का प्रस्ताव दिया है.

लेकिन अफसोस सुरक्षा का यह आश्वासन कुछ महीने भी नहीं टिक सका और देहरादून जिले के ही विकासनगर में फिर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमला हुआ है.

24 जनवरी को मसूरी में सूफी संत, कवि बाबा बुल्लेशाह की मजार तोड़े जाने की घटना के बाद यह सांप्रदायिक नफरत से भरी घृणा का एक और मामला सामने आया है. यह अत्यंत क्षोभ का विषय है कि देहरादून जिले समेत उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक भेदभाव और हिंसा आए दिन की बात बनते जा रहे हैं. देहरादून समेत पूरे राज्य में पुलिस कानून व्यवस्था कायम करने के बजाय सांप्रदायिक तत्वों के दबाव में अधिक नजर आती है क्योंकि ऐसे उत्पाती, उन्मादी तत्वों को सत्ताधारी भाजपा का संरक्षण हासिल है. प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं नफरत भरे भाषणों की अगुवाई करते रहते हैं. इस काम के लिए वे अमेरिकी थिंक टैंक- सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑरगेनाइज्ड हेट की सूची में पहले नंबर पर आते हैं और इस पर अफसोस जताने के बजाय अपने भाषणों को सही ठहराते हैं तो यह सांप्रदायिक उत्पाती तत्वों को भी इशारा होता है कि सुधारना नहीं है.

भाकपा(माले) यह मांग करती है कि प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा और उन्माद पर रोक लगाई जाए. उत्तराखंड पुलिस 2021 के उच्चतम न्यायालय के फैसले का अनुपालन करे, जिसमें स्पष्ट निर्देश है कि घृणा भरे भाषणों और कृत्यों में औपचारिक एफआईआर का इंतजार किये बिना पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे.

- इंद्रेश मैखुरी, राज्य सचिव, भाकपा(माले), उत्तराखंड

31 January, 2026