गाजा पट्टी पर इजरायली हमला शुरू होने के दो साल पूरे होने के अवसर पर पंजाब में पांच वामपंथी पार्टियों के ‘फासीवादी हमला विरोधी फ्रंट : पंजाब’ के आह्वान पर दो विशाल क्षेत्रीय कन्वेंशन आयोजित हुए. यह मोर्चा सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, सीपीआई, आरएमपीआई, सीपीआई(एमएल) एनडी और इंकलाबी केंद्र, पंजाब पर आधारित है.
इन कन्वेंशनों में इन हमलों को तुरंत बंद किए जाने की मांग करते हुए इजरायल-अमेरिकी गठजोड़ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए. माझा-दोआबा क्षेत्र का कन्वेंशन 6 अक्टूबर 2025 को जालंधर में और मालवा क्षेत्र का कन्वेंशन 7 अक्टूबर 2025 को बरनाला में आयोजित किया गया. इन कन्वेंशनों और प्रदर्शनों में सैकड़ों किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं ने शिरकत की. जालंधर में यह कन्वेंशन देश भगत यादगार हॉल और बरनाला में शक्ति कला मंदिर हॉल में आयोजित किया गया.
इन कन्वेंशनों को शामिल वामपंथी पार्टियों के केंद्रीय और सूबाई नेताओं – कॉमरेड गुरमीत सिंह बख्तपुर, सुखदर्शन सिंह नत्त, राजविंदर सिंह राणा, गोबिंद सिंह छाजली, मंगत राम पासला, प्रो. जयपाल सिंह, महीपाल सिंह, बंत सिंह बराड़, निर्मल सिंह धालीवाल, अजमेर सिंह, कुलविंदर सिंह वड़ैच, कंवलजीत खन्ना, नारायण दत्त और किरणजीत सिंह सेखों – द्वारा संबोधित किया गया.
वक्ताओं ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका और नाटो गुट की मदद और छत्रछाया के तहत नस्लवादी इजरायल पिछले सात दशकों से फिलिस्तीनी लोगों का उजाड़ता और नरसंहार करता आ रहा है. इजरायल ने पिछले दो वर्षों से गाजा पट्टी पर लगातार हमलों और बमबारी के माध्यम से भयानक तबाही मचायी है और अब तक 67 हजार से अधिक लोगों का कत्ल कर चुका है. यह संसार भर के अमनपसंद व मानवतावादी लोगों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. मरने वालों में अधिकतर मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं. इनके अलावा इनमें सैकड़ों डॉक्टर और पत्रकार भी शामिल हैं. गाजा पट्टी में बस्तियां, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटियां और अस्पतालों को ढहा कर मलबे में बदल दिया गया है. इजरायल को हथियार सप्लाई करने में भी अमेरिका और नाटो गुट सबसे आगे हैं. घर से बेघर हुए, उजड़ चुके और भूख-प्यास से पीड़ित बेकसूर फिलिस्तीनी लोग जख्मों और भूख की ताव न झेल पाने की वजह से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं. हजारों फिलिस्तीनी बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा पुरुष पड़ोसी देशों में हिजरत करने के लिए मजबूर हैं. बहुसंख्यक फिलिस्तीनी ऐसे हैं, जो पैसे की कमी के कारण पड़ोसी देशों में पलायन भी नहीं कर सकते. अमेरिकी साम्राज्य अरब देशों के तेल भंडारों पर अपना दबदबा और जकड़ बरकरार रखने तथा चीन की चुनौती का सामना करने के लिए बड़ी बेशर्मी से इजरायल को अपनी एक फौजी चौकी के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. उसकी सरपरस्ती के तहत ही नेतन्याहू सरकार इस घिनौने कत्लेआम को अंजाम दे रही है. साम्राजी शक्तियों के लिए सिर्फ अपना मुनाफा ही सब कुछ है. उनके लिए बच्चों-बुजुर्गों की भूख या बिना इलाज तड़प-तड़प कर मर जाना कोई मायने नहीं रखता है.
वक्ताओं ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति के लिए रखे बीस सूत्रीय कार्यक्रम को रद्द करते हुए कहा कि दुनिया का यह दरिंदा इस गंभीर मानवीय संकट का लाभ उठा कर फिलिस्तीन को अपनी बस्ती बनाना चाहता है. वक्ताओं द्वारा यह मांग जोर से उठाई गई कि भारत सरकार, नस्लवादी इजरायल से सभी राजनयिक और व्यापारिक संबंध पूर्ण रूप से खत्म करे.
इन कन्वेंशनों द्वारा गाजा से इजरायली फौजों को तुरंत निकालने, एक आजाद और प्रभुसत्ता संपन्न फिलिस्तीन स्थापित करने, इजरायल द्वारा गाजा के लिए राहत ले कर आ रहे ग्लोबल समुद फ्लोटिला मुहिम के मानवीय कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की सख्त निंदा करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने, इजरायल द्वारा की गई फिलिस्तीन की नाकाबंदी पूरी तरह खत्म करने तथा फिलिस्तीनी लोगों पर लगाई गई पाबंदियां हटाने, फिलिस्तीनियों को खाद्य सामग्री पहुंचाने पर से हर रोक खत्म करने के प्रस्ताव पारित हुए.
इसके साथ ही, मध्य भारत के सूबों में आदिवासियों और माओवादियों के झूठे मुकाबले बंद करने, कॉरपोरेट घरानों को जल, जंगल और जमीन लूटने की दी गई खुली छूट खत्म करने, भारी बाढ़ों से हुए पंजाब में लोगों के भारी नुकसान की फौरी तौर पर पूर्ति करने, कम से कम 70000/- रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने, बाढ़ों के कारण मजदूरों के घरों, पशुओं और रोजगार के हुए नुकसान की पूर्ति करने, बाढ़ों के कारण लोगों के अक्सर होने वाले नुकसान की रोकथाम के लिए नदियों के दोनों ओर मजबूत बांध बनाए जाने, बाढ़ों के कारणों की जांच करने के लिए एक ज्यूडिशियल कमीशन बनाने, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करने, बिहार से बाद पंजाब समेत पूरे देश में एसआईआर (स्पेशल वोट संशोधन) की वोट चोर मुहिम को बंद करने, अपनी सजाएं भुगत चुके और बिना केस चलाए जेल में बंद सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की जोरदार मांग करते कुछ अहम प्रस्ताव भी पारित किए गए.
– सुखदर्शन सिंह नत्त