प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमलों और उन्हें पंजाब से भगाने की कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाने, मनरेगा योजना के तहत रोजगार देने और बाढ़ की तबाही से हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग पर पंजाब में भाकपा(माले) से जुड़े मजदूर मुक्ति मोर्चा ने 29 सितम्बर 2025 को प्रदेश के कई जिला मुख्यालयों पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किए. मानसा, गुरदासपुर, संगरूर और अमृतसर में बड़ी संख्या में मजदूरों ने इन धरना प्रदर्शनों में हिस्सा लेकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे. कई अन्य जिलों से भी मजदूर मुक्ति मोर्चा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन भेजे.
पंजाब के होशियारपुर जिले में एक प्रवासी अपराधी द्वारा 6 वर्ष के बच्चे के साथ किए गए अमानवीय कृत्य व हत्या से पूरे पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों में गुस्से कई लहर फैल गई थी. यह पहले से ही राज्य में बढ़ते अपराधों और नशे के कारोबार को रोकने में विफल पंजाब सरकार के प्रति लोगों में जमे गुस्से का ही विस्फोट था. पर विभाजनकारी राजनीति का खेल खेलने वाली कुछ ताकतों ने इस मौके को अपनी विभाजनकारी राजनीति को आगे बढ़ाने के रूप में इस्तेमाल कर ‘प्रवासी भगाओ’ अभियान में तब्दील कर दिया. हालांकि मानवता की सेवा और रक्षा की दसों गुरुओं की सीख वाले पंजाब ने अपने स्वभाव के अनुरूप ऐसे तत्वों की विभाजनकारी राजनीति को नकार दिया और खुलकर प्रवासी मजदूरों का साथ दिया. तबकि वे ताकतें इस अभियान को परवान चढ़ाने की कोशिशों में लगी रहीं.
ऐसी स्थिति में भाकपा(माले) ने ऐसी विभाजनकारी ताकतों को जवाब देने और किसान-मजदूर एकता के बल पर सरकार की नाकामयाबी के खिलाफ संघर्ष खड़ा करने का निर्णय लिया. भाकपा(माले) के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने 7 और 22 सितम्बर के चंडीगढ़ दौरों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और इन विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ मजदूर-किसान एकता का आह्वान किया. पार्टी के मजदूर संगठन मजदूर मुक्ति मोर्चा ने 29 सितम्बर को इसी अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए. पंजाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी ‘प्रवासी भगाओ अभियान’ की निंदा कर इसे रोकने की मांग करते हुए 8 अक्टूबर को इस मांग सहित अपनी अन्य मांगों पर पंजाब के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करने की घेषणा की है.
पंजाब में पिछले छः माह से मनरेगा का काम लगभग बंद होने से ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कई क्षेत्रों में पिछले काम का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है. इधर बाढ़ की तबाही से नष्ट हुई फसलों के कारण खेती के मौसम में उनके रोजगार पर भी बड़ा असर हुआ है. मजदूर मनरेगा में काम की मांग कर रहे हैं. राज्य सरकार केंद्र द्वारा बजट जारी न करने के कारण असमर्थता जता रही है, जबकि केंद्र सरकार ने इस वत्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा के बजट में 40 प्रतिशत की कटौती कर दी है.
केंद्र की मोदी सरकार कह रही है कि उसने गांवों का इतना विकास कर दिया है कि अब गांवों से मनरेगा में रोजगार की मांग कम हो गई है. जबकि हकीकत यह है कि मनरेगा में मजदूरी की दर बहुत ही निम्न और अमानवीय है. इसके बावजूद, मजदूर पूरे देश में 200 दिन के काम की गारंटी की मांग कर रहे हैं और सरकार वर्ष में 40 दिन का औसत रोजगार भी मुहैय्या नहीं करा पा रही है.
प्रदर्शनकारियों ने इसके साथ ही पंजाब में बाढ़ से आई भयानक तबाही से पंजाब के प्रभावित किसानों, मजदूरों, व्यापारियों व अन्य तबको को हुए नुकसान की भरपाई की मांग की. सरकार द्वारा तबाही से हुई क्षति पूर्ति और तात्कालिक सहायता न देने और केंद्र सरकार द्वारा राज्य को हुए बीस हजार करोड़ के नुकसान के बदले मात्र 16 सौ करोड़ रुपए सहायता करने की भी निंदा की और जल्द ही पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपए जारी करने, सभी प्रभावित मजदूरों को तत्काल 20 हजार रुपए की सहायता देने, किसानों को 70 हजार रुपए प्रति एकड़ व एक लाख रूपया प्रति जानवर तथा पूरी तरह ध्वस्त मकानों के लिए 10 लाख रूपये व ज्यादा नुकसान हुए मकानों के लिए 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति के तत्काल भुगतान की मांग की है.