झंझारपुर (मधुबनी), 20 जनवरी 2026 : मधुबनी जिले के भैरव स्थान के पट्टी टोल पर हुए मॉबलिंचिंग की घटना में जान गंवाने वाले मो. कयूम और अन्य पीड़ितो के मो. सद्दाम व मो. नसीम के परिजनों से भाकपा(माले) और इंसाफ मंच की एक टीम ने मुलाकात की.
इस टीम में शामिल इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, भाकपा(माले) राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार और लक्ष्मण राय, कपिल देव राउत, मो. शहजाद और मो. अली आदि ने झंझारपुर प्रखंड के हैंथी वाली टोला (महीनाथ पंचायत) पहुंची जो उपरोक्त पीड़ितों का गांव है. टीम ने घटना में घायल मो. नसीम और मो. सद्दाम की आपबीती और ग्रामीणों का बयान सुने.
भाकपा(माले) और इंसाफ मंच नेताओं ने कहा कि भैरव स्थान थानाध्यक्ष की भूमिका अपने स्वजातीय अभियुक्तों को बचाने का ही था. पोस्टमार्टम के बाद 36 घंटे बाद तक मो. कयूम का शव पड़ा रहा और उसके बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई. इससे पहले पूरा प्रशासन इस मामले को दबाने में लगा हुआ था. जांच टीम को पता चला कि जहां मो. कयूम की हत्या हुई, वहां पहले भी एक दलित तीतर पासवान और मुजफ्फरपुर के अल्पसंख्यक समुदाय के मजदूर की हत्या कर दी गई थी. प्रशासन से मिलकर इस घटना को भी दबा दिया गया था. प्रशासन ने इस घटना को भी दबाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी लेकिन अंततः ग्रामीणों के अड़ जाने पर उसको प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी.
भाकपा(माले) के राज्य कमिटी सदस्य सह इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद ने कहा कि घायलावस्था में पड़े मो. कयूम को बचाने में किसी का न आना सभ्य समाज और मानवता के लिए कलंक है और इससे पूरे समाज को शर्मसार होना चाहिए.
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते और जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और स्थानीय विधायक नीतीश मिश्रा के दवाब में स्थानीय पुलिस के जरिए थाना कमजोर दलित-अल्पसंख्यकों के न्याय पाने के अधिकार को दबाया जा रहा हैं. अभी तक पीड़ित परिवार से न तो कोई पदाधिकारी मिला और न ही स्थानीय विधायक और सांसद ने यह ‘जहमत’ उठायी है.
उन्होंने कहा कि इंसाफ मंच और भाकपा(माले) मुख्यमंत्री के समृद्ध यात्रा के दौरान मो. कयूम और अन्य पीड़ितो के लिए न्याय के सवाल पर आवाज बुलंद करेगा. उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को मिथिला प्रक्षेत्र के डीआईजी और कमिश्नर के समक्ष पीड़ितों के परिजनों की अगुआई में एक विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा.