वर्ष 34 / अंक-24 / उपराष्ट्रपति चुनाव पर भाकपा (माले) का वक्तव्य

उपराष्ट्रपति चुनाव पर भाकपा (माले) का वक्तव्य

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भारत का चुनाव आयोग जहां एक पक्षपातपूर्ण संगठन के रूप में बेपर्दा हो रहा है जो संविधान की रक्षा करने या स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लायक नहीं रह गया है, लेकिन लोकतंत्र की एक और संस्था, उपराष्ट्रपति पद का 9 सितंबर को चुनाव होना है.

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों के सांसदों वाले निर्वाचक मंडल द्वारा उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार, महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन और इण्डिया ब्लॉक के उम्मीदवार, सर्वाच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच मुकाबला होगा. भाकपा(माले) का मानना है कि यह चुनाव आरएसएस के एक कट्टर समर्थक और भारत के सबसे प्रतिष्ठित न्यायविदों और नागरिक स्वतंत्रता के जाने-माने समर्थकों में से एक के बीच की लड़ाई है. यह दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई है जो एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं.

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी ने सर्वाच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध संविधान के रक्षक के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया. इसका उदाहरण सलवा जुडूम को असंवैधानिक और राज्य द्वारा स्थापित एक हिंसक ग्रुप घोषित करने वाला निर्णय है. यह निर्णय संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और आदिवासियों के अधिकारों के हनन के पीछे के नव-उदारवादी विकास मॉडल की तीखी आलोचना करता है, साथ ही राज्य द्वारा मानवाधिकारों के हनन को भी उजागर करता है.

दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन, आरएसएस से जुड़े होने की एकमात्र शर्त पूरी करके चुनाव मैदान में उतरे हैं, जिसे हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के रूप में तथाकथित मान्यता दी गई है. भाकपा(माले) उपराष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल के सभी सदस्यों, विशेषकर मोदी सरकार का समर्थन करने वाले एनडीए दलों से, अपना वोट अंतरात्मा की आवाज पर देने की अपील करती है.

– केंद्रीय कमेटी, भाकपा-माले, लिबरेशन

23 August, 2025