वर्ष 35 / अंक - 14 / अंकिता के बहाने उत्तराखंड के सवालों पर चर्चा

अंकिता के बहाने उत्तराखंड के सवालों पर चर्चा

अंकिता के बहाने उत्तराखंड के सवालों पर चर्चा

-- त्रिलोचन भट्ट

अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के लिए सिर्फ एक बच्ची की हत्या और उसे न्याय दिलाने का मामला नहीं रह गया है. यह मुद्दा अब राजनीतिक सुचिता का भी मुद्दा है, उत्तराखंड में बेरोजगारी का भी मुद्दा है, यहां की जमीनों की निरंकुश खरीद-फरोख्त का भी मुद्दा है, इस राज्य की संस्कृति के संरक्षण का भी मुद्दा है, महिला सुरक्षा और बढ़ते अपराधों का मुद्दा तो है ही. यही वजह है कि इस मामले में तीन लोगों को निचली कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुना दिये जाने के बावजूद लोग सड़कों पर हैं और अंकिता के लिए सम्पूर्ण न्याय की मांग कर रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर वह वीआईपी कौन है, जो अपना मुंह काला करना चाहता था और उस कुंठित यौन-पिपासा के शिकार व्यक्ति को सरकारी तंत्र बचाने में क्यों लगा हुआ है?

इस मुद्दे को लेकर 14 जनवरी से उत्तराखंड में अंकिता न्याय यात्रा शुरू की गई थी. इससे पहले 4 जनवरी को देहरादून में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया था, जिसमें हजारों लोगो ने हिस्सा लिया था. न्याय यात्रा के पहला चरण बागेश्वर के ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले में सरयू बगड़ से शुरू हुआ. यहां जनसंगठनों की ओर से एक सभा की गई, जिसमें राज्यभर के अनेक गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया.

अगले दिनों में इस यात्रा के तहत बागेश्वर जिले में 5 नुक्कड़ सभाएं हुई. जबकि चमोली जिले में 4 सभाएं की गई. श्रीनगर गढ़वाल के गोला बाजार में पहले चरण की अंतिम नुक्कड़ सभा हुई. पहले चरण का समापन पौड़ी गढ़वाल जिले में अंकिता के गांव डोभ श्रीकोट में अंकिता के माता-पिता के साथ किया गया. पहले चरण में मुख्य रूप से भाकपा(माले) के इंद्रेश मैखुरी, मदन मोहन चमोली और उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट शामिल हुए. पीसी तिवारी, रमेश कृषक, अतुल सती, कपूर रावत, अंकित उछोली आदि भी पहले चरण की यात्रा की यात्रा में अलग-अलग जगहां पर शामिल हुए.

8 फरवरी को देहरादून में एक महापंचायत का आयोजन किया गया. इस महापंचायत में अंकिता के पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी भी शामिल हुए. अंकिता भंडारी न्याय यात्रा का दूसरा चरण 26 मार्च को शुरू किया गया. इसमें मुख्य रूप से इंद्रेश मैखुरी, त्रिलोचन भट्ट और जन संवाद समिति के सतीश धौलाखंडी शामिल हुए. दूसरे चरण में टिहरी जिले में कई जगहों पर नुक्कड़ सभाएं की गई. पहली नुक्कड़ सभा खाड़ी में अरण्य रंजन के अगुवाई में हुई. सतीश धौलाखंडी की जनगीतों के साथ नुक्कड़ सभा शुरू हुई. त्रिलोचन भट्ट ने अंकिता न्याय यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताया. इंद्रेश मैखुरी ने विस्तार से अंकिता भंडारी मामले की जानकारी दी. अरण्य रंजन ने अंकिता को सम्पूर्ण न्याय मिलने तक यात्रा जारी रखने की बात कहकर सभा का समापन गया.

अगली नुक्कड़ सभा 27 मार्च को चम्बा में हुई. यहां सुमन पार्क से गबर सिंह चौक तक सतीश धौलाखंडी के जनगीतों के साथ मार्च निकाला गया और जनसभा की गई. त्रिलोचन भट्ट ने बताया कि यह यात्रा क्यों जरूरी है. इंद्रेश मैखुरी ने अंकिता भंडारी के बहाने पहाड़ के तमाम सवालों पर बात की. अरण्य रंजन ने लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस यात्रा में शामिल होने की बात कही. कहा गया कि जिस दिन लोग सड़कों से हट जाएंगे, उस दिन फिर से सत्ता मनमानी पर उतर आएगी. वीआईपी के रूप में जिस दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को नाम लिया गया था, वे आंदोलन होने तक उत्तराखंड में नजर नहीं आये, लेकिन आंदोलन का शोर धीमा पड़ते ही फिर से प्रकट हो गये. इसलिए लगातार सड़कों पर रहना जरूरी है.

नई टिहरी में बौराड़ी के गणेश चौक पर नुक्कड़ सभा की गई. यहां पहले से ही टिहरी विस्थापितों के बिजली-पानी के बिलों को लेकर एक धरना चल रहा था. अंकिता न्याय यात्रा का धरना दे रहे लोगों ने ढोल बजाकर स्वागत किया. यहां भी अंकिता को न्याय दिलाने के साथ ही उत्तराखंड के तमाम मुद्दों पर बात हुई. धरना दे रहे टिहरी बांध विस्थापितों ने अपनी समस्याएं बताई और विस्थापनों की मांगों के बारे में बताया.

28 मार्च को पहली नुक्कड़ सभा घनसाली और दूसरी चमियाला में हुई. इन दोनों सभाओं के अगुवाई चेतना आंदोलन के विनोद बड़ौनी ने की. दोनों सभाओं में स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया. दूसरे चरण की अंतिम नुक्कड़ सभा 28 मार्च की आगराखाल में हुई. यहां सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय व्यवसायी सुरेन्द्र सिंह कंडारी ने नुक्कड़ सभा की अगुवाई की. जनगीत के बाद उत्तराखंड की तमाम मुद्दों पर इंद्रेश मैखुरी ने अपनी बात रखी. सुरेन्द्र सिंह कंडारी ने अंकिता न्याय यात्रा का अगला चरण जल्द शुरू किये जाने की उम्मीद के साथ दूसरे चरण के समापन की घोषणा की.

अंकिता न्याय यात्रा कोई कार्यक्रमबद्ध घोषित यात्रा नहीं है. पहले से तय नहीं होता कि अगली नुक्कड़ सभा कहां होनी है. इसलिए इन नुक्कड़ सभाओं में बहुत ज्यादा लोगों के एकत्रित होने की न तो उम्मीद होती है और न ही ऐसा संभव है. इसके बावजूद अनुभव किया गया कि आते-जाते लोग, दुकानों में खड़े ग्राहक और व्यापारी खुद-ब-खुद इन नुक्कड़ सभाओं का हिस्सा बन जाते हैं. कई लोग इन सभाओं को अपने सोशल मीडिया पर लाइव करते हैं तो कई वीडियो बनाते हैं. नुक्कड़ सभाओं के दौरान सैकड़ों पर्चे भी बांटे गये. आमतौर पर देखा जाता है कि इस तरह के पर्चे पर लोग एक नजर डालकर फेंक देते हैं, लेकिन अंकिता न्याय यात्रा के दौरान सैकड़ों पर्चे बांटे जाने के बावजूद एक भी पर्चा हमें नीचे गिरा हुआ नजर नहीं आया.

इंद्रेश मैखुरी और त्रिलोचन भट्ट ने नुक्कड़ सभाओं में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने का मामला तो अपनी जगह है ही. लेकिन, इसके साथ उत्तराखंड राज्य के कई दूसरे मुद्दे में जुड़े हुए हैं. सत्ताधारी पार्टी द्वारा जिस बेशर्मी के साथ आरोपियों का बचाव किया जा रहा है और उन्हें उनके मौजूदा पदों से हटाने तक की जरूरत नहीं समझी जा रही है, यह उत्तराखंड की जनता का अपमान है.

उनका कहना था कि सीबीआई जांच की घोषणा की गई है, लेकिन अंकिता के माता-पिता की शिकायत के बजाय अनिल जोशी की शिकायत पर की जा रही यह जांच कहां तक पहुंची, कोई नहीं जानता. यह मामला उत्तराखंड में बढ़ती बेरोजगारी का भी सवाल खड़ा करता है. सरकारी पद खाली पड़े हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं. धन्नासेठ उत्तराखंड में खुले हाथों जमीन खरीद रहे हैं. उन जमीनों में रिजॉर्ट के नाम पर अय्याशी के अड्डे बनाये जा रहे हैं, जहां हमारी महिलाओं को अंकिता बनाया जा रहा है. उन्होंने लोगों से कहा कि इन मुद्दों पर लगातार आवाज उठायें और सरकार से सवाल पूछें. अंकिता न्याय यात्रा का तीसरा चरण जल्द शुरू करने की घोषणा भी की गई.


ऋषिकेश विधायक का घर घेरा 

पूर्व घोषणा के अनुरूप 29 मार्च 2026 को ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’, द्वारा ऋषिकेश में विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का घेराव किया गया और वहां लगे दुष्यंत कुमार के पोस्टरों को हटा दिया गया.

मंच की कमला पंत ने कहा अंकिता हत्याकांड मामले में न्याय तब तक पूरा नहीं है, जब तक वीआईपी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता है. ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने मंत्री रहते हुए 3 वर्ष पहले अंकिता हत्याकांड में वीआईपी को कमरा बताकर इन घोर संदिग्ध अपराधियों को बचाने का अपराधिक कृत्य किया है.

घेराव कार्यक्रम को महिला मंच की निर्मला बिष्ट, उमा भट्ट सुजाता पाल, पंकज क्षेत्र, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, उषा डोभाल, कनिष्क जोशी, सूरज सिंह नेगी ,कमलेश खन्तवाल ने भी संबोधित किया.

नेताओं ने कहा कि एपस्टीन फाइल्स में भाजपा के मंत्रियों का नाम आ रहे हैं. महाराष्ट्र में भाजपा सरकार की महिला आयोग की अध्यक्ष का नाम महिला यौन अपराधों में आ रहा है. पूरे देश में भाजपा नेताओं द्वारा महिलाओं के शोषण की आए दिन खबरें आती हैं. उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा नेता शामिल हैं और भाजपा सरकार उन्हें बचाने में लगी है. भाजपा नेता अपराधियों के पोस्टर लगा रहे हैं और उनके गले में फूल-माला डाल रहे हैं. अंकिता भंडारी हत्याकांड में जब तक वीआईपी अपराधियों – दुष्यंत गौतम और अजय कुमार – की गिरफ्तारी नहीं हो जाती है, तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे.

मंच के सदस्यों ने  चेतावनी दी, ‘भाजपा नेता, दुष्यंत कुमार और अजय कुमार के पोस्टरों को तुरत हटाएं, वरना राज्य की जनता उन्हें हटा देगी. इस घेराव में 86 वर्षीय नेत्री पप्रा गुप्ता, मंजू बलोदी, विजया नैथानी, हेमलता, सुरेंद्र सिंह नेगी, शांता नेगी, बिना डंगवाल आदि समेत बड़ी संख्या नागरिक मौजूद रहे.


04 April, 2026