22 अगस्त 2025 को दुनिया में खाद्य सुरक्षा पर सबसे भरोसेमंद और सर्वाच्च संस्था इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (आईपीसी) ने पुष्टि की कि गाजा में इस वक्त अकाल चल रहा है, जो इस्राइल की लगातार घेराबंदी और नाकेबंदी का सीधा नतीजा है. इस संस्था के मुताबिक गाजा गवर्नरेट, जिसमें गाजा सिटी भी शामिल है, वहां पांच लाख से ज्यादा लोग भुखमरी का शिकार हो चुके हैं. आईपीसी ने चेतावनी दी कि सितंबर के आखिर तक दैर अल-बलाह और खान यूनिस भी अकाल की चपेट में आ जाएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक 5,14,000 लोग – यानी गाजा की कुल आबादी का लगभग चौथा हिस्सा – अकाल झेल रहे हैं. यह तादाद चंद हफ्तों में बढ़कर 6,41,000 तक पहुंचने की आशंका है.
इस अकाल का ऐलान ऐसे वक्त में हुआ है जब इस्राइल ने गाजा को पूरी तरह कब्जे में लेने और उसकी आबादी का जातीय सफाया करने के लिए जनसंहार की जंग और तेज कर दी है और भूख को एक हथियार बना लिया है. इस नए हमले का नाम ऑपरेशन गिडियन्स चेरीअट्स-II रखा गया है. इसके तहत इस्राइली फौज ने गाजा सिटी के अस्पतालों को हुक्म दिया कि सैकड़ों जख्मी मरीजों – जिनमें औरतें, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं – को बाहर निकाला जाए, जबकि उनमें से बहुत से लोग पहले ही भूख और मौत के कगार पर हैं.
अब तक 62,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी इस जनसंहार में शहीद हो चुके हैं और रोजाना सैकड़ों लोग इस्राइली बमबारी में मारे जा रहे हैं. यह बमबारी यहां तक कि अमरीकी और इस्राइली मदद से बने “गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन” (जीएचएफ) के राहत केंद्रों के पास भी की जा रही है. ये केंद्र मौत के जाल बन गए हैं, जहां भूखे फिलिस्तीनियों को खाने का लालच देकर बुलाया जाता है और फिर उनका जनसंहार कर दिया जाता है. असली मरने वालों की तादाद रिपोर्ट से कहीं ज्यादा है – सड़कों पर लाशें बिखरी हैं, पूरे परिवार मलबे में दफ्न हैं, और लगातार बमबारी की वजह से अनगिनत पीड़ित कभी दर्ज ही नहीं हो पाते.
फिलिस्तीनी वजूद को मिटाने के लिए इस्राइल की यह जनसंहारी जंग सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि राहतकर्मियों, अस्पतालों और पत्रकारों को भी सीधे निशाना बना रही है – और उसे ऐसा करने की पूरी छूट मिली हुई है. 10 अगस्त को इस्राइली सेना ने अल-शिफा अस्पताल के गेट के बाहर लगे पत्रकारों के टेंट पर बमबारी की, जहां अल-जजीरा की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी. इस हमले में गाजा सिटी की पूरी मीडिया टीम मारी गई, जिनमें मशहूर पत्रकार अनस अल-शरीफ और कई अन्य रिपोर्टर शामिल थे.
गाजा पर यह हमला इस्राइल की सेटलर-उपनिवेशवादी योजना का हिस्सा है. कब्जाए हुए वेस्ट बैंक में इस्राइल तेजी से नई बस्तियां बसाकर फिलिस्तीनी जमीन हथिया रहा है. एक नई योजना के तहत E1 कॉरिडोर के इर्दगिर्द कॉलोनियां बनाई जा रही हैं ताकि वेस्ट बैंक को बीच से दो हिस्सों में बांटा जा सके. यह इलाका बेहद अहम है क्योंकि यह उत्तर में रामल्लाह को दक्षिण में बैथलहम से जोड़ता है. वेस्ट बैंक को काटकर इस्राइल फिलिस्तीन की भौगोलिक एकता और निरंतरता को पूरी तरह खत्म कर देना चाहता है.
आज जो कुछ हो रहा है, वह पूरी दुनिया की आंखों के सामने हो रहा जनसंहार है. अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा पूरी तरह समर्थित और यूरोपीय देशों की मिलीभगत से हथियारबंद इस्राइल, भूख, बमबारी और विस्थापन का इस्तेमाल करके फिलिस्तीनी कौम को मिटा देने पर आमादा है. लेकिन मौत के साये में भी गाजा की अवाम का डटे रहना न सिर्फ जायोनिज्म की दरिंदगी को बेनकाब करता है बल्कि साम्राज्यवाद की दिवालियापन को भी लगातार उजागर करता है.
(लिबरेशन, सितम्बर 2025)