वर्ष 35 / अंक - 13 / शहीदे आजम भगत सिंह व साथियों की 95वीं बरसी पर देवर...

शहीदे आजम भगत सिंह व साथियों की 95वीं बरसी पर देवरिया में किसान-मजदूर सम्मेलन

शहीदे आजम भगत सिंह व साथियों की 95वीं बरसी पर देवरिया में किसान-मजदूर सम्मेलन

जो साम्राज्यवाद के खिलाफ नहीं लड़ता वह राष्ट्रवादी नहीं हो सकता – का. दीपंकर भट्टाचार्य 

भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने 23 मार्च 2026 को देवरिया (उप्र) के गोरया घाट पर भाकपा(माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर आयोजित किसान-मजदूर सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है. जो व्यक्ति, विचार और सरकार साम्राज्यवाद के सामने समर्पण कर दे, वह राष्ट्रवादी नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका से समझौता कर देश के कृषि क्षेत्र को बर्बाद करने का रास्ता खोल दिया है. लेबर कोड के जरिए मजदूरों को गुलाम बनाने की कोशिश हो रही है. शिक्षा का निजीकरण के साथ-साथ भगवाकरण किया जा रहा है. आज  देश को खतरनाक दौर में पहुंचा दिया गया है. ऐसे समय में हमें आज सभी को साथ लेकर दूसरी आजादी का संघर्ष करना पड़ेगा जो भारत जैसे विशाल देश की विविधता के अनुरूप हो. आज हमें आधुनिक भारत के लिए बड़ी आजादी चाहिए.

उन्होंने कहा कि आज के दौर में भगत सिंह को याद करने का मतलब साम्राज्यवाद के खिलाफ देश की मुकम्मल आजादी के लिए गए संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए आगे बढ़ने का है. जब भगत सिंह और उनके साथी इंकलाब जिंदाबाद और साम्राज्यवाद मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए देश में एक नई लहर पैदा कर रहे थे तब आरएसएस-बीजेपी के प्रेरणा पुरुष सावरकर गिरफ्तारी के बाद लगातार माफी मांग रहे थे और राष्ट्रीयता को धर्म के आधार पर परिभाषित कर रहे थे. यही समय भगत सिंह के बनने का दौर था. 1919 में जलियांवाला घटना का प्रभाव 12 साल के भगत सिंह पर विशेष रूप से पड़ा. इसी दौर में गणराज्य, संविधान, दलित, महिला, किसान, अल्पसंख्यक के बारे में सोचा गया. आजादी की मुकम्मल सोच पैदा हुई कि आजादी कैसे मिलेगी और आजादी कैसी होगी?

कामरेड दीपंकर ने कहा कि भगत सिंह शहीद हुए और भविष्य का सपना दे गये. उनको पढ़ते हुए सब कुछ आज की बात लगती है. आज का समय खतरनाक समय है. संविधान के नाम पर शपथ लेना सत्ता की मजबूरी है लेकिन उसका काम संविधान को मिटाना है. आज जब खाड़ी मुल्क में एक करोड़ भारतीय कामगार के रूप में फंसे हुए है. देश की सत्ता इजरायल के साथ हर साल 50,000 मजदूर भेजने की डील करके आती है.

सम्मेलन को भाकपा(माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव,  जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह, खेग्रामस के प्रदेश सचिव राजेश साहनी, आल इंडिया लायर्स एसोसियेशन फॉर जस्टिस के जिला संयोजक रामकिशोर वर्मा, पैगाम-ए-अमन के संयोजक मोहम्मद खालिक, जन मुक्ति आंदोलन के जनार्दन शाही, भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोबर्धन गौड़, शिक्षा अधिकार मंच के सह संयोजक डॉ. चतुरानन ओझा, शिक्षिका डॉ. मंदाकिनी राय, समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप कुशवाहा, कवि-लेखक डॉ. अचल पुलस्तेय ने भी संबोधित किया.

भाकपा(माले) की वरिष्ठ नेता प्रेमलता पांडेय ने स्वागत वक्तव्य दिया. सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे जाने-माने किसान नेता शिवाजी राय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भगत सिंह-अंबेडकर के विचारों के अनुरूप व्यापक बदलाव के संघर्ष के लिए एकताबद्ध होने का आह्वान किया.

सम्मेलन में भाकपा(माले) की राज्य स्थायी समिति के सदस्य ओमप्रकाश सिंह, देवरिया के पूर्व पार्षद सुभाष राय, कांग्रेस नेता जवाहर लाल बर्नवाल, सपा अनुसूचित प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष हरेराम आर्य, भाकपा(माले) नेता पूनम यादव सहित सैकड़ों लोग – महिला, पुरूष, छात्र-युवा और वरिष्ठ नागरिक – उपस्थित थे.



28 March, 2026