संयुक्त किसान मोर्चा ने 10 मार्च को बरनाला की सब्जी मंडी में एक विशाल रैली का आयोजन किया. इस रैली में अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते में कृषि और संबद्ध काम-धन्धों को शामिल करने का विरोध किया गया. रैली ने राज्य के हर खेत में नहर का पानी उपलब्ध कराने और हर घर में पीने के लिए स्वच्छ पानी पहुंचाने, किसानों और मजदूरों के ऋण माफ करने, प्रस्तावित बिजली और बीज बिलों को रद्द करने और एमएसपी और खरीद की गारंटी देने वाला कानून बनाने की की भी मांग की. रैली से आनेवाले दिनों में एक और बड़ा मोर्चा लगाने के लिए एक जन अभियान शुरू करने की घोषणा की गई. रैली ने अमेरिका के दबाव में किये गये व्यापार समझौते को कृषि और किसानों के लिए विनाशकारी बताते हुए इसके खिलाफ दृढ़ संघर्ष करने और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की गई.
वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया में अपनी चौधराहट दिखा रहा है. भारत सरकार पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते में कृषि और संबद्ध काम-धंधों को शामिल करने की सहमति कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगी. अमेरिकी किसानों को मिलने वाली भारी सब्सिडी और उनके विशाल जोतों की तुलना में, देश में पांच एकड़ से कम जमीन वाले 86 प्रतिशत किसान अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएंगे. यह स्पष्ट है कि इस समझौते में दोनों देशों के बीच कोई समानता नहीं है, बल्कि अमेरिका ने मनमाने कर और शुल्क लगाकर हमारे देश पर 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद जबरन थोपे हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण को जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए वक्ताओं ने उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस राष्ट्र-विरोधी और कृषि-विरोधी समझौते पर हस्ताक्षर न करने मांग की.
पंजाब में चिंताजनक जल संकट
पंजाब में जल संकट चिंताजनक है. पंजाब सरकार को जल संकट के समाधान के लिए जल संबंधी नदी तटवर्ती (रिपारियन) सिद्धांतों का पालन करना चाहिए. विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके सभी असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण समझौतों को रद्द किया जाना चाहिए. वक्ताओं ने पंजाब में कैंसर की बढ़ती समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि पंजाब के पानी में नाइट्रेट, आर्सेनिक, फ्लोराइड और मैग्नीशियम जैसे तत्वों की बढ़ती मात्रा के कारण कैंसर जैसी बीमारियों के फैलने की खबरें इस बात को रेखांकित करती हैं कि पंजाबियों को ‘हर खेत तक नहर का पानी और हर घर तक स्वच्छ पेयजल’ पहुंचाने के नारे को साकार करने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की ज्रूरत है.
नेताओं ने इसके लिए एक जन अभियान शुरू करने की घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए पंजाब के जल मुद्दे को नदी-तटीय सिद्धांत के अनुसार हल करना, राज्य के अधिकार को मान्यता देना और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की भेदभावपूर्ण धाराओं – 78, 79 और 80 को निरस्त करना आवश्यक है. उन्होंने मांग की कि इस मामले में राज्य के साथ किए गए सभी असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण समझौतों को विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके रद्द किया जाए.
आलू और मटर किसानों की दुर्दशा से बेपरवाह सरकार
इस बार आलू और मटर किसानों की दुर्दशा से यह स्पष्ट हो गया है कि कृषि विरोधी नीतियों के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है. एक ओर किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है तो दूसरी ओर सरकारें किसानों और मजदूरों पर बढ़ते कर्ज का कोई समाधान निकाल रही हैं. नेताओं ने एमएसपी और खरीद गारंटी पर कानून बनाने की मांग दोहराते हुए कहा कि पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने कॉरपोरेट घरानों का 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज माफ कर दिया है, लेकिन देश के अन्न भंडार को भरने वाले किसानों और मजदूरों के कर्ज के मुद्दे को पूरी तरह से भुला दिया है. उन्होंने इस मुद्दे को उठाने के लिए संघर्ष को तेज करने हेतु किसानों से सहयोग मांगा.
जनविरोधी है प्रस्तावित बिजली और बीज विधेयक
रैली के वक्ताओं ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली और बीज विधेयक को जनविरोधी विधेयक बताते हुए, जो राज्यों के अधिकारों को कम करता है, कहा कि बिजली वितरण क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण करके सरकारें बिजली को बाजार में मुनाफा लूटने की वस्तु बना रही हैं और आम उपभोक्ता को महंगी बिजली मुहैया कराकर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचा रही हैं. यही कारण है कि बिजली क्षेत्र के केंद्रीकरण से राज्यों की शक्तियां सीमित हो रही हैं. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट घरानों की जरूरतों के चलते स्मार्ट चिप प्री-पेड मीटर लगाए जा रहे हैं. इसी तरह, बीज विधेयक भी राज्यों की शक्तियों को कम करके कृषि अनुसंधान और बीज विकास को घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों के नियंत्रण में लाकर केंद्रीकरण की नीति पर आधारित है. उन्होंने इन दोनों जनविरोधी विधेयकों को वापस लेने की मांग की.
मंच से घोषणा की गई कि संसद में विद्युत विधेयक पेश होने के अगले दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा. यह भी घोषणा की गई कि भविष्य में उपरोक्त सभी मुद्दों पर जन आंदोलन को तेज किया जाएगा. संघर्ष की योजना बनाने के लिए 12 मार्च को चंडीगढ़ के किसान भवन में एक बैठक बुलाई गई है.
अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले का विरोध
रैली ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया और केंद्र सरकार से मध्य-पूर्व में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए उचित व्यवस्था करने और अमेरिका-इजरायल की आक्रामक नीति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की मांग की.
रैली ने तरनतारन में सहकारी चीनी मिल, सेनरो की जमीन को PUDA को हस्तांतरित करने के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया और मिल का आधुनिकीकरण कर इसे चलाने की मांग की गई.
पुलिस राज और फर्जी मुठभेडों के खिलाफ आक्रोश
सभा ने पंजाब सरकार द्वारा राज्य को पुलिस राज्य में बदलने की कार्रवाई पर निंदा प्रस्ताव पारित किया. इसमें किसानों, श्रमिकों, कर्मचारियों और आम लोगों के लोकतांत्रिक संघर्षों को कुचलने के लिए सरकार द्वारा बल प्रयोग की निंदा, सड़क निर्माण श्रमिकों के नेताओं, उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारी नेता तजिंदर सिंह और श्रमिक नेता मुकेश मलौद के खिलाफ मामले दर्ज करने और उनको जेल में बन्द करने की निंदा करते हुए उनकी रिहाई की मांग की गई.
सभा ने यह भी मांग की कि उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश गुरदासपुर जिले के गांव आंदियां के युवक रणजीत सिंह की फर्जी मुठभेड़ की जांच करे और आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करे.