विभाजनकारी संस्कृति-विनाशकारी अर्थ नीति का विरोध
4-5 अप्रैल 2026 को रामगढ़ स्थित डॉ. वीपी केसरी नगर, उम्मीदलाल गोप सभागार (अक्षत बैंक्वेट हॉल, कुजू नया मोड़) में जन संस्कृति मंच का दो दिवसीय 5वां झारखंड राज्य सम्मेलन वैचारिक बहस, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक पुनर्गठन के साथ सम्पन्न हुआ.
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए चर्चित दस्तावेजी फिल्मकार मेघनाथ ने कहा कि आज संस्कृति का प्रश्न सबसे प्रमुख हो गया है. संस्कृति को ही हथियार बनाकर समाज और देशज परंपराओं को नष्ट करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने ‘डीजे बनाम नगाड़ा’ के रूपक के माध्यम से बाजारवादी संस्कृति के खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दौर अभिव्यक्ति पर संकट के साथ-साथ कारपोरेट लूट और बर्बर हमलों का भी दौर है, जिसमें संस्कृतिकर्मियों को अपनी भूमिका तय करनी होगी.
चर्चित भाषा विज्ञानी डॉ. बीएन ओहदार ने डॉ. रामदयाल मुंडा के समय स्थापित नौ भाषाओं की एकीकृत अध्ययन व्यवस्था को सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस व्यवस्था को तोड़ना और शिक्षा संस्थानों को कमजोर करना हमारी देशज संस्कृति और सामूहिक एकता पर योजनाबद्ध हमला है. वही, जनवादी लेखक संघ के अली इमाम खान ने वित्तीय पूंजी, कारपोरेट लूट और जल-जंगल-जमीन पर हो रहे हमलों को भी गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि आज की संस्कृति सत्ता के संरक्षण में धर्म आधारित और विभाजनकारी होती जा रही है, जो कभी राष्ट्रवाद तो कभी ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ के रूप में सामने आती है. प्रलेस के राज्य सचिव प्रो. मिथिलेश ने संस्कृतिकर्मियों से लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने और संविधान को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ रचनात्मक हस्तक्षेप करने का आह्वान किया.
उद्घाटन सत्र को इप्टा के पावेल और प्रो. सुशीला बेदिया (श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि), रांची सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया. सत्र का संचालन जसम के राज्य सचिव, कवि-आलोचक बलभद्र और अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार जावेद इस्लाम ने की. इससे पूर्व लेखक-संस्कृतिकर्मी सुरेंद्र कुमार बेदिया ने स्वागत वक्तव्य दिया और अंत में कृष्णा गोप ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
इसके बाद डॉ. रमेश शर्मा के संचालन में सम्मेलन स्थल श्रृंखलाबद्ध लोकगीतों से गुंज उठा. झारखंड की जनसंस्कृति और संघर्ष की अभिव्यक्ति से भरपूर गीतों और प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया. मशाल, जागरण, अंजोम, झंकार तथा खोरठा जन भाषा केंद्र से जुड़े टीमों के कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी.
दूसरे दिन आयोजित प्रतिनिधि सत्र में पूर्व राज्य सचिव डॉ. बलभद्र द्वारा कामकाज की रिपोर्ट पेश की. इस सत्र में संगठन को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिनमें जन-जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में रचनाकर्म को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक टीमों का विस्तार, जल-जंगल-जमीन से जुड़े जनसंघर्षों के साथ सक्रिय संबंध बनाना, स्त्रियों की भागीदारी बढ़ाना तथा अंधविश्वास और धार्मिक विद्वेष के खिलाफ रचनात्मक हस्तक्षेप शामिल थे.
इसके बाद 71 सदस्यीय राज्य परिषद् व 27 सदस्यों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया. सम्मेलन ने सुरेंद्र कुमार बेदिया को राज्य सचिव, कवि-संपादक शंभु बादल को राज्य अध्यक्ष तथा पत्रकार जावेद इस्लाम को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया.
जावेद इस्लाम और आरपी वर्मा की संयुक्त अध्यक्षता और जन्मेजय तिवारी के संचालन में चले इस सत्र को संबोधित करते हुए जसम के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सत्ता और बाजार मिलकर देश को एकरूप बनाने की कोशिश कर रहे हैं और अपसंस्कृति के जरिए सांस्कृतिक विविधता को नष्ट किया जा रहा है जिसका सबसे ज्यादा असर दलितों, स्त्रियों, आदिवासियों और मुस्लिम समुदाय पर पड़ रहा है.
सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ लेखक-कथाकार कौलेश्वर गोप को राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. सम्मेलन का समापन ‘हम होंगे कामयाब’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ.