वर्ष 35 / अंक - 08 / जितेंद्र पासवान और उनके साथियों को किस ‘अपराध’ की...

जितेंद्र पासवान और उनके साथियों को किस ‘अपराध’ की सजा मिली, मी लॉर्ड?

जितेंद्र पासवान और उनके साथियों को किस ‘अपराध’ की सजा मिली, मी लॉर्ड?

गोपालगंज जिले के विजयीपुर थाना क्षेत्र के कोरिया गांव की जिस घटना में का. जितेंद्र पासवान और उनके अन्य साथियों को निचली अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, वह आखिर है क्या? उनको सजा मिली है अटल पाण्डेय हत्याकांड में, लेकिन, इसके पीछे जमीन, जातीय वर्चस्व और सामाजिक प्रभुत्व बनाए रखने की एक लंबी कहानी है. यह गरीबों की जमीन और सम्मान की लड़ाई से जुड़ा प्रश्न है.

कोरिया गांव में वर्षों से सवर्ण वर्चस्व की स्थिति रही है.  राजकुमार खरवार, प्रेम खरवार, बबई खरवार और प्रभु खरवार की लगभग ढाई बीघा काश्तकारी जमीन पर नागेंद्र पांडेय का कब्जा था. संबंधित परिवार अपनी जमीन पर खेती करना चाहते थे, लेकिन सामाजिक दबाव और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण वे अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे थे.  यह तनाव लंबे समय से भीतर ही भीतर सुलग रहा था.

विवाद तब खुलकर सामने आया जब गांव की आर्थिक संरचना में बदलाव हुआ. पहले गांव के लोग नागेंद्र पांडेय के ट्रैक्टर से खेत जोतवाते थे. इससे उनका आर्थिक और सामाजिक प्रभाव कायम था, लेकिन जब गांव के ही कमलेश यादव ने ट्रैक्टर खरीदा और ग्रामीणों ने उनसे खेत जोतवाना शुरू किया, तो स्थानीय वर्चस्व को चुनौती मिली. खेत का ‘डरार जोतने’ का बहाना बनाकर कमलेश यादव की पिटाई की गई. यही वह बिंदु था जहां से विवाद शुरू हुआ और गांव दो धड़ों में बंटता दिखा.

इस घटना के विरोध में जजवलिया बाजार में सभा आयोजित की गई थी. इस सभा से गरीब तबके का मनोबल बढ़ा और उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग की. सीओ के जनता दरबार में आवेदन दिया गया. बताया जाता है कि नागेंद्र पांडेय जमीन के कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके. थाना और सीओ द्वारा पहले एक माह और फिर दस दिन का अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन कोई दस्तावेज सामने नहीं आया. सवाल उठता है कि यदि वैध कागजात नहीं थे, तो कब्जा किस आधार पर कायम था? और प्रशासन ने स्पष्ट निर्णय लेने में देरी क्यों की?

2 जनवरी 2021 को शाम लगभग चार बजे राजकुमार और प्रेम खरवार अपने खेत में गेहूं की बुआई कर रहे थे. उसी समय जाकर उनकी पिटाई की गई. इसके बाद घटनाक्रम ने हिंसक रूप लिया और इसी क्रम में अटल पांडेय की हत्या हो गई. हत्या के बाद दर्ज प्राथमिकी में कुल 19 लोगों को नामजद किया गया.

मामले में जितेंद्र पासवान पर “आदेश देने” का आरोप लगाया गया, जबकि पुलिस रिपोर्ट में उनके घटना स्थल पर मौजूद न रहने की बात दर्ज बताई जाती है. अंगद विश्वकर्मा, प्रेम और राजकुमार स्वयं घायल हो गए, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया. अब तक सात लोगों – प्रेम खरवार, राजकुमार खरवार, विश्वकर्मा शर्मा, सिकंदर पासवान, राकेश यादव, जितेंद्र पासवान और श्रीराम कुशवाहा – को सजा सुनाई जा चुकी है.

इस पूरे घटनाक्रम में कई प्रश्न अनुत्तरित हैं. क्या भूमि विवाद की जड़ तक जाकर निष्पक्ष जांच की गई? क्या सामाजिक पृष्ठभूमि और पूर्व की घटनाओं को पर्याप्त महत्व दिया गया? क्या जांच और अभियोजन की दिशा एकतरफा रही? यह मामला ग्रामीण समाज में भूमि, सम्मान और बराबरी के अधिकार की जटिल लड़ाई को सामने लाता है. जब गरीब और वंचित समुदाय अपने अधिकार के लिए खड़े होते हैं, तो उन्हें अन्याय झेलना पड़ता है.

इस मामले का एक राजनीतिक पक्ष भी है. का. जितेंद्र पासवान 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भोरे से महागठबंधन समर्थित भाकपा(माले) के उम्मीदवार थे और वर्तमान शिक्षा मंत्री सुनील कुमार से उनका सामना हुआ था. वोटों की गिनती के अंतिम दौर में उन्हें करीब 400 वोट से जबरन हरा दिया गया. लेकिन, यह सुनील कुमार के लिए खतरे की घंटी थी. यहीं से उन्हें केस मुकदमों में फंसाने की कार्रवाई शुरू हुई और अंत में उन्हें अटल हत्याकांड में बेहद गलत तरीके से फंसा ही दिया गया.

अतः इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष पुनः जांच जरूरी है, ताकि तथ्यों की समग्र समीक्षा हो सके और न्याय की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का संतोषजनक उत्तर मिल सके. न्याय की लड़ाई जारी रहेगी!

16-17 फरवरी को राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम 

का. जितेंद्र पासवान व अन्य निर्दाष साथियों को फर्जी मुकदमे में आजीवन कारावास की सजा सुनाये जाने के अन्यायपूर्ण फैसले के विरोध में 16-17 फरवरी 2026 को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया गया. इसके तहत राजधानी पटना समेत राज्य के कई शहरों में प्रतिवाद मार्च आयोजित हुए और सभा आयोति हुई.

बिहार शरीफ में भाकपा(माले) जिला सचिव सुरेन्द्र राम और इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य सहसचिव वीरेश कुमार के नेतृत्व में प्रतिवाद सभा आयोजित हुई जिसे मकसूदन शर्मा, महेन्द्र प्रसाद, सुनील कुमार, बाढ़न पासवान, अनिल पटेल, रेणु देवी, रामाधीन प्रसाद आदि ने संबोधित किया.

16 फरवरी को हिलसा में भी विरोध मार्च निकालकर सभा आयोजित की गई. आरवाइए के प्रखंड सचिव ब्रह्मदेव प्रसाद बिंद की अध्यक्षता हुई सभा को भाकपा(माले) जिला सचिव सुरेंद्र राम, दिनेश कुमार यादव, मुनीलाल यादव, प्रमोद यादव, संजय पासवान, चुन्नू चंद्रवंशी, डॉक्टर शैलेश यादव, शिव शंकर प्रसाद आदि ने सभा को संबोधित किया.

बेगूसराय में भाकपा(माले) और आरवाईए के बैनर तले प्रतिवाद मार्च निकाला गया. यह प्रतिवाद मार्च भाकपा(माले) जिला कार्यालय कमलेश्वरी भवन से निकाला गया. समाहरणालय द्वार पर पहुंच कर सभा आयोजित की गई. सभा को भाकपा(माले) जिला सचिव दिवाकर प्रसाद, चन्द्रदेव वर्मा, बैजू सिंह, नवल किशोर सिंह, गौड़ी पासवान, इन्द्रदेव राम, अमरजीत पासवान, एहतेशाम अहमद, अजय कुमार, संजय ठाकुर, गजेंद्र पंडित आदि ने संबोधित किया.

नवादा में विरोध मार्च करने के बाद सभा आयोजित हुई जिसे भाकपा(माले) जिला सचिव का. भोलाराम ने संबोधित किया. श्रीकांत चौहान, सुदामा देवी, श्याम देव विश्वकर्मा, अनुज कुमार, महावीर मांझी आदि दर्जनों नेता भी कार्यक्रम में उपस्थित थे. पूर्वी चंपारण जिले के छौड़ादानो में भी प्रतिवाद मार्च निकाला गया जो नारायण चौक, पकड़िया से चलकर मोतिहारी अंचल अंतर्गत स्वर्गीय बृजबिहारी गेट तक गया. भाकपा(माले) जिला सचिव प्रभुदेव यादव, प्रखंड सचिव रूपलाल शर्मा, राजकुमार शर्मा, जीतलाल सहनी, उपेंद्र सहनी और अमरेश कुमार आदि प्रतिरोध मार्च का नेतृत्व करने वालों में शामिल थे.

16 फरवरी को भागलपुर के स्थानीय स्टेशन चौक पर विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा(माले) के राज्य कमिटी सदस्य एसके शर्मा व जिला सचिव महेश प्रसाद यादव ने किया. पटना ग्रामीण के मसौढी, दुल्हिनबाजार व फुलवारी में भी प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित हुए.


21 February, 2026