दिल्ली : वाम-लोकतांत्रिक दलों का संयुक्त सम्मेलन
12 जनवरी को वेनेजुएला के लोगों के समर्थन में दिल्ली के सुरजीत भवन में भाकपा, भाकपा(माले), माकपा, एआईएफबी, आरएसपी, सपा, राजद, आप, द्रमुक और वीसीके द्वारा एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वेनेजुएला और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों पर चल रहे साम्राज्यवादी हमलों की निंदा की. इसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस, जिन्हें अमेरिकी सेना ने अगवा कर लिया था, की तत्काल रिहाई की मांग भी उठाई.
भाकपा(माले) के पोलितब्यूरो सदस्य कामरेड रवि राय ने सभा को संबोधित करते हुए वेनेजुएला के लोगों के साथ उनकी संप्रभुता और शांति की रक्षा में एकजुटता व्यक्त की. दिल्ली से बड़ी संख्या में लोगों ने सम्मेलन में भाग लिया और वेनेजुएला, क्यूबा और फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी आवाज उठाई.
सम्मेलन ने वेनेजुएला के संघर्षरत लोगों को समर्थन देने का प्रस्ताव भी अपनाया और क्यूबा के लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की, जो संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अमानवीय नाकेबंदी और सैन्य खतरों का सामना कर रहे हैं. सम्मेलन फिलिस्तीन के साथ भी खड़ा रहा और मोदी सरकार की चुप्पी और घुटनाटेकू विदेश नीति की निंदा की गई.
कोलकाता : वाम दलों का ‘वेनेजुएला एकजुटता मार्च
12 जनवरी को ही कोलकाता में, भाकपा(माले), भाकपा, माकपा और अन्य वाम दलों द्वारा एस्प्लेनेड से एक विशाल ‘वेनेजुएला एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया. मार्च ने वेनेजुएला, क्यूबा और कोलंबिया जैसे अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के लोगों के खिलाफ ट्रंप की औपनिवेशिक साम्राज्यवादी परियोजना की निंदा की.
विरोध मार्च को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के पोलितब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव कामरेड अभिजीत मजूमदार ने कहा कि हम लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में जो देख रहे हैं, वह लोगों के जीवन और गरिमा पर एक नग्न साम्राज्यवादी हमला है, इस क्षेत्र के लोगों को अधीन करने और उनके संसाधनों को लूटने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन 2025 में वेनेजुएला के खिलाफ अपनी आक्रामकता और ईरान पर बमबारी से उत्साहित और साम्राज्यवादी अहंकार से प्रेरित होकर अब दुनिया के उन सभी लोगों को धमकी दे रहा है जो विदेशी प्रभुत्व से मुक्त् होकर अपना भविष्य खुद तय करना चाहते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि यह शर्मनाक है कि भारत सरकार देश की उपनिवेश-विरोधी संघर्ष की ऐतिहासिक विरासत और ग्लोबल साउथ एकजुटता के साथ गद्दारी करते हुए आपराधिक रूप से खामोश है. उन्होंने सभी प्रगतिशील ताकतों से गरिमा, संप्रभुता और शांति की रक्षा में दुनिया के उत्पीड़ित और संघर्षरत लोगों के साथ एकजुट होने का आह्नान किया.
इसके अलावा, 11 जनवरी को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर अमेरिकी हमलों के विरोध में वाम दलों ने अमेरिकी ट्रम्प सरकार का पुतला फूंका.
रांची : वाम-लोकतांत्रिक दलों का राजभवन मार्च
अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के साथ अन्य देशों पर साम्राज्यवादी दादागिरी के विरोध में 22 जनवरी, 2026 को रांची में भाकपा(माले) के साथ तमाम वामपंथी एवं साम्राज्यवाद-विरोधी राजनीतिक संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से राजभवन मार्च निकाला गया. यह मार्च सैनिक मार्केट से बड़े जनसमूह के साथ राजभवन पहुंचा.
राजनीतिक दलों के साथ ट्रेड यूनियन और छात्रा संगठनों के प्रतिनिधि भी मार्च में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने ‘अमरीकी साम्राज्यवाद, वेनेजुएला से दूर हटो’, ‘राष्ट्रपति मादुरो को अविलंब रिहा करो’, ‘तेल के लिए खून बहाना बंद करो’, ‘युद्ध नहीं, शांति चाहिए’ और ‘भारत सरकार, वेनेजुएला के पक्ष में मजबूती से खड़ी हो’ जैसे नारे लगाए.
मार्च को संबोधित करते हुए ऐक्टू और भाकपा(माले) के नेता शुभेंदु सेन ने कहा कि अमरीकी साम्राज्यवाद की दादागिरी दुनिया के किसी स्वतंत्र देश को स्वीकार नहीं. वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन है. हम उनकी तुरंत रिहाई और सैनिक हस्तक्षेप की समाप्ति की मांग करते हैं. तेल के लिए चलाया जा रहा यह खूनी खेल बंद होना चाहिए.
वहीं भाकपा(माले) नेता अनंत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार को अमेरिकी दबाव छोड़कर वेनेजुएला के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए. ट्रंप की गुंडागर्दी नहीं चलेगी और मोदी सरकार को अमेरिकी सरकार की तलवा चाटने की नीति छोड़नी होगी. वेनेजुएला की जनता अपनी संप्रभुता की रक्षा के संघर्ष में आगे बढ़े, भारत के मेहनतकश उनके साथ हैं.
प्रदर्शन में शामिल हुई जेएमएम नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि हम सभी ने इस मामले को संसद में भी उठाने का प्रयास किया और आज रांची में भी राजभवन के समक्ष उठा रहे हैं. क्योंकि वैश्विक स्तर पर जो काम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहा है, वहीं काम राज्य सरकारों के साथ केन्द्र सरकार करने का प्रयास कर रही है, जो हम सभी साम्राज्यवाद विरोधी दल किसी शर्त पर होने नहीं देंगे.
संयुक्त मार्च में भाकपा(माले), ऐक्टू, ऐपवा और आइसा के साथ जेएमएम, भाकपा, माकपा और समाजवादी पार्टी समेत अन्य दलों के नेताओं समेत कई साम्राज्यवाद विरोधी और कार्यकर्ता शामिल रहे.