भारत के उत्तराखंड, हिमांचल और जम्मू कश्मीर राज्यों में बादल फटने से लगातार हो रही तबाही की खबरों के बीच पाकिस्तान से भी प्रकृति की मार से बड़े पैमाने पर हताहत और व्यापक विनाश की खबरें मिल रही हैं.
पाकिस्तान के बुनेर में बादल फटने से मात्र एक घंटे में 150 मिमी से अधिक बारिश हुई. इससे विनाशकारी बाढ़ आई और भूस्खलन हुआ. इसमें 337 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. सैकड़ों घर और गांव पानी, कीचड़ और मलबे के बहाव में दब गए.
स्वाबी, स्वात, बाजौर, बट्टाग्राम, मनसेहरा, शांगला और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर सहित पूरे क्षेत्र में इस मानसून मौसम की आपदाओं से संबंधित मौतों का आंकड़ा अब बढ़कर 660 से ज्यादा हो गया है, जिसमें 360 से ज्यादा मौतें कुछ ही दिनों के अंदर हुई हैं.
इधर 20 अगस्त तक पाकिस्तान में हाल ही में हुई मानसूनी आपदाओं से जुड़ी कुल मौतें 706 हो गई हैं, जिनमें से 427 मौतें अकेले खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में हुई हैं.
स्वाबी के दलोरी बाला में पानी और चट्टानों का एक ऐसा सैलाब आया जिसने ‘कुछ ही सेकंड में’ तबाही मचा दी. इस घटना में दर्जनों लोगों की मौत हो गई और कई लापता हो गए.
बुनेर के पीर बाबा और कादर नगर में कई घर बह गए और उनमें रहने वाले पूरे परिवार बह गए. एक परिवार ने 24 सदस्यों को खो दिया, दूसरे ने 35, और अन्य एकल घरों में 28 लोग मारे गए.
खराब मौसम के कारण बचाव अभियान के दौरान एक बचाव हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के सभी पांच सदस्य मारे गए.
महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जिनमें सड़कें, पुल, सिंचाई चैनल आदि बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. राहत व बचाव के लिए दूरदराज के गांवों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है, जिससे बचाव और राहत कार्य बाधित हो रहे हैं.
हालांकि बुनेर जैसे पहाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, लेकिन पाकिस्तान के शहरी केंद्र भी इस आपदा से अछूते नहीं रहे. इस्लामाबाद, रावलपिंडी, चकवाल और गिलगित-बाल्टिस्तान में बादल फटने और बाढ़ जैसी भयंकर घटनाएं दर्ज की गईं. चकवाल में हुई लगभग 449 मिमी बारिश ने इलाकों को जलमग्न कर दिया. जिससे घर, पशुधन, सड़कें नष्ट हो गईं और यहाँ तक कि पेयजल जल संरचना भी क्षतिग्रस्त हो गई.
गिलगित-बाल्टिस्तान में अचानक आई बाढ़ ने घरों, कृषि भूमि, सड़कों और सिंचाई प्रणालियों को नुकसान पहुंचाया. वहां कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन अर्थव्यवस्था को अरबों रुपये का नुकसान हुआ.
पाकिस्तानी वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म होते वातावरण में नमी (आद्रता) की मात्रा बढ़ रही है. प्रत्येक 1 डिग्री सेंटीग्रेड वृद्धि पर लगभग 7% अधिक. जिससे बादल फटने, अचानक तीव्र बारिश की संभावना बढ़ जाती है. हिमालय और हिंदु कुश जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में, गर्म, नमी से भरपूर मानसूनी हवाएं तेजी से ठंडी होकर अचानक, सघन वर्षा का कारण बन सकती हैं. इसके बावजूद, कुछ मौसम विज्ञानियों का तर्क है कि बुनेर आपदा किसी सामान्य बादल फटने की घटना के बजाय, दो भारी वर्षा प्रणालियों के मिलन का परिणाम थी.
पाकिस्तानी सेना और नागरिक दोनों एजेंसियों की मदद से बचाव कार्य जारी हैं. प्रभावित क्षेत्रों में 25,000 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है. अधिकारियों ने आपातकाल की घोषणा कर दी है. सेना और वायु सेना के संसाधनों को जुटाया गया है. सरकार ने आपातकालीन आश्रय, भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और पीड़ितों को मुआवजा देने का वादा किया है.
जबकि हादसों से बच गए लोगों ने आरोप लगाया है कि मौसम विभाग ने समय पर खराब मौसम के कारण निकासी की चेतावनियां जारी नहीं की. अधिकारियों का तर्क है कि बारिश की तीव्रता और अचानकता के कारण समय पर चेतावनी देना लगभग असंभव हो गया था.
सरकारी नीतियां – जैसे केपी की आपदा जैसी घटनाओं में जोहिम न्यूनीकरण रणनीति – कागजों पर मौजूद हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन, सामुदायिक जागरूकता और स्थानीय स्तर पर तैयारी हर स्तर पर कमजोर बनी हुई है.
पाकिस्तान में हाल ही में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ – खासकर खैबर पख्तूनख्वा में – ने ऐसी चरम मौसम घटनाओं की विनाशकारी क्षमता को उजागर किया है. भारी जनहानि से लेकर तबाह हुए भू-दृश्यों और भारी बचाव अभियानों तक, यह आपदा एक ज्वलंत वास्तविकता को रेखांकित करती है. जलवायु-जनित आपदाएं अब असामान्य नहीं रहीं – वे नई सामान्य घटना होती जा रही हैं.
यह भयावह बादल फटने की घटना का एक स्पष्ट संदेश है. जमीनी स्तर पर, शासन के स्तर पर, मौसम विज्ञान के मोर्चे पर पाकिस्तान को और नई आधुनिक तकनीक का विकास, आपदा राहत बलों को त्वरित व हर तरह के संशाधनों सहित पीड़ितों तक त्वरित पहुंच लायक बनाना होगा. इतिहास को अपनी त्रासदियों को दोहराने से रोकने के लिए तैयारी, लचीलेपन और समन्वित प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिसका इस बार की आपदा में अभाव दिखता है.
(साउथ एशिया पीजेंट्स फेडरेशन के नेता बदरुल आलम की रिपोर्ट के आधार पर)