वर्ष 35 / अंक - 14 / भगत सिंह के वारिस आरएसएस-मोदी शासन की कम्युनिस्ट-व...

भगत सिंह के वारिस आरएसएस-मोदी शासन की कम्युनिस्ट-विरोधी धमकियों से कभी नहीं डरेंगे

भगत सिंह के वारिस आरएसएस-मोदी शासन की कम्युनिस्ट-विरोधी धमकियों से कभी नहीं डरेंगे

30 मार्च 2026 को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर हुई चर्चा, उम्मीद के मुताबिक, मोदी सरकार के लिए पूरे कम्युनिस्ट आंदोलन को बदनाम करने का मंच बन गई. गृहमंत्री ने फिर वही आरएसएस के पुराने झूठ दोहराए और कम्युनिस्ट आंदोलन को “विदेशी” विचारधारा से प्रेरित बताया. यह वही घिसा-पिटा इल्जाम है, जो कम्युनिस्टों पर तब से लगाया जाता रहा है जब कम्युनिस्ट घोषणापत्र ने शोषण और उत्पीड़न से मुक्त दुनिया का सपना सामने रखा था – इंसानी मुक्ति की सबसे सार्वभौमिक विचारधारा को बदनाम करने की एक सस्ती कोशिश.

कम्युनिज्म ने भारत के बेहतरीन देशभक्तों को प्रेरित किया है – चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्ला खान, भगत सिंह और उनके साथियों की ‘एचएसआरए’ (HSRA) की विरासत से लेकर आजादी की लड़ाई के अनगिनत नायकों तक, और आजाद भारत में जनता के हक और भलाई के लिए लड़ने वाले योद्धाओं तक. इसके उलट, संघ परिवार हमेशा इतिहास के दूसरे छोर पर खड़ा रहा है – आजादी की लड़ाई के दौर में औपनिवेशिक हुकूमत के साथ खड़ा, और आज सत्ता में आकर देश के हितों को अमेरिकी साम्राज्यवाद के हाथों गिरवी रखता हुआ, मेहनतकश जनता को लूटकर अरबपतियों को मालामाल करता हुआ. 

जरा वक्त पर भी नजर डालिए. संसद के भीतर से कम्युनिस्टों के खिलाफ यह वैचारिक हमला दरअसल मोदी सरकार के अमेरिका-इजरायल की जंग और इस हमलावर धुरी के सामने किए गए शर्मनाक आत्मसमर्पण, और भारत के राष्ट्रीय हितों के साथ की गई सबसे बड़ी गद्दारी को छिपाने की कोशिश है.

अब यह वैचारिक ‘विच हंट’ (दमनचक्र) सिर्फ आरएसएस के कम्युनिस्ट-विरोधी एजेंडे तक सीमित नहीं रह गया है. ‘अर्बन नक्सल’, ‘आंदोलनजीवी’, ‘देशद्रोही’ जैसे कुटिल शब्द गढ़कर और उनका इस्तेमाल करके, सरकार असहमति की हर आवाज को निशाना बना रही है, ताकि भारत के तमाम संसाधनों को कुछ कॉर्पारेट हाथों में सौंपा जा सके.

भगत सिंह के वारिस आरएसएस और मोदी सरकार की इन कम्युनिस्ट-विरोधी गीदड़ भभकियों से कभी नहीं डरेंगे. कम्युनिस्ट आंदोलन इस एजेंडे का जवाब हर मोर्चे पर फासीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करके देगा.

-- दीपंकर भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा(माले)

04 April, 2026