वर्ष 34 / अंक-24 / आइलाज का लखनऊ में सेमिनार

आइलाज का लखनऊ में सेमिनार

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आल इंडिया लायर्स एसोसिएशन फार जस्टिस (आइलाज) की उत्तर प्रदेश इकाई ने बीते 17 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के महामना मदन मोहन मालवीय हाल में एक सेमिनार का आयोजन किया, जिसका विषय था – अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम. सेमिनार के मुख्य वक्ता थे आइलाज के राष्ट्रीय महासचिव व बंगलौर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता क्लिफ्टन डी रोजारियो.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सरकार और जनता के मध्य अधिवक्ता न्याय के केंद्र बिंदु हैं. ऐसे में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम पारित करना सरकारों के लिए अनिवार्य होना चाहिए. कोराना काल ने इस अधिनियम की जरूरत को बड़ी सिद्दत से महसूस कराया था. राजस्थान तथा कर्नाटक में ऐसा कानून बना हुआ है. आज न्याय व्यवस्था व अधिवक्ता हितों पर सरकारी हमला व हस्तक्षेप बढ़ गया है.

क्लिफ्टन ने कहा कि अधिवक्ता तथा मुवक्किल के मध्य पवित्र विश्वसनीय संबंध होता है. उसकी विश्वसनीयता बनाए रखना अधिवक्ता का अधिकार व कर्तव्य होता है, किन्तु सरकारी जांच एजेंसियों द्वारा अधिवक्ताओं के अधिकारों पर हमला व गैर कानूनी दबाव बनाया जाना चिंता का विषय है. राष्ट्रीय क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट में अधिवक्ताओं पर प्रतिवर्ष चार सौ से अधिक हत्या व जघन्य आपराधिक हमले पेशे के कारण होते हैं. अधिवक्ता के पेशे की स्वतंत्रता, हर तरह से उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए हमें संगठित आवाज उठानी होगी. आज हम सत्ता द्वारा न्याय व्यवस्था को खोखला करने, अपने प्रभाव में काम करने, जजों की राजनीतिक नियुक्ति तथा सत्ता पक्षीय न्यायिक फैसले की बढ़ती प्रवृत्ति को देख रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आइलाज आल इंडिया बार कौंसिल तथा राज्य बार कौंसिल से अलग नहीं है. किंतु हमें न्यायपालिका व अधिवक्ता संघों के लोकतंत्रकरण करने, महिला अधिवक्ताओं की गरिमा, सुविधाओं, अधिवक्ता हितों के साथ स्वतंत्र व जनपक्षीय न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने, संविधान, लोकतंत्र व नागरिक अधिकारों, समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय की आवाज मजबूती से उठानी होगी. आइलाज को सभी स्तरों के न्यायालयों में आधुनिक सुविधा संपन्न अधिवक्ता चेंबर व नये व कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले अधिवक्ताओं के लिए सम्मानजनक भत्ते के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए अधिवक्ताओं को संगठित करने की जिम्मेदारी लेनी होगी.

सेमिनार को संबोधित करते हुए आइलाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश व मथुरा जिला बार के पूर्व अध्यक्ष नशीर शाह ने कहा कि अधिवक्ताओं के आर्थिक, सामाजिक, लोकतांत्रिक हितों का संरक्षण जरूरी है. सांसदों, विधायकों के लिए सरकारी पेंशन की व्यवस्था है, किन्तु अधिवक्ताओं के लिए सम्मानजनक पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गैर लोकतांत्रिक तरीके से बार कौंसिल तथा अधिवक्ताओं से चर्चा किए बिना ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) देश पर थोप दी. इसमें बने कई कानून अंग्रेजी जमाने से भी ज्यादा दमनकारी हैं.

आइलाज केंद्रीय कमेटी सदस्य व सोनभद्र जिले के दुद्धी बार के अध्यक्ष प्रभु सिंह ने कहा कि सरकार अधिवक्ता अधिकारों पर हमला कर रही है. न्यायिक मानहानि के नाम पर अधिवक्ताओं को धमकाया जा रहा है. संविधान व लोकतंत्र पर सरकार द्वारा हमला किया जा रहा है. लोकतांत्रिक व्यवस्था की सभी संस्थाओं में सरकार का दखल बढ़ गया है. इसलिए न्याय व्यवस्था व लोकतंत्र पर बढ़ते सरकारी हमले के खिलाफ अधिवक्ताओं को अग्रिम पंक्ति में लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए आगे आना होगा. उन्होंने अधिवक्ता कल्याण राशि 15 लाख रुपए करने व नये अधिवक्ताओं के लिए प्रारंभिक तीन वर्ष के लिए न्यूनतम बीस हजार रुपए मासिक भत्ता की गारंटी की मांग की.

अधिवक्ता डा. नफीस ने कहा कि सरकार द्वारा समाज में भेदभाव पूर्ण नीति से समाज के कमजोर तबकों पर हमला किया जा रहा है. अधिवक्ताओं को अपने अधिकारों के साथ आम जनता के लोकतांत्रिक व संवैधानिक अधिकारों के लिए भी लड़ना होगा.

सेमिनार का अध्यक्षीय वक्तव्य  देते हुए लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम यादव ने कहा कि अदालतों में अभी भी अधिवक्ता का पेशा व सामाजिक पृष्ठभूमि को देखकर फैसले हो रहे हैं. उन्होंने अधिवक्ता अधिकारों के संरक्षण कानून बनाने के लिए बड़े आंदोलन की जरूरत को रेखांकित किया.

सेमिनार का संचालन लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ चन्द्रा ने किया. सेमिनार में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता माता प्रसाद पाल, अयोध्या बार के अध्यक्ष राजेश वर्मा, गोरखपुर बार के सुभाष चन्द्र पाल, कमल श्रीवास्तव लखनऊ, पीलीभीत जिला बार के शम्स विकास, हाईकोर्ट बार की युवा अधिवक्ता कंचन मौर्य, सौरभ श्रीवास्तव, संदीप कुमार यादव, राजित राम यादव, मंजू आदि ने अपने विचार रखे.


23 August, 2025