वर्ष 35 / अंक - 16 / महिला आरक्षण अभी लागू करो!

महिला आरक्षण अभी लागू करो!

महिला आरक्षण अभी लागू करो!

दो ढाई साल पहले, 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, मोदी सरकार ने नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया था. इस सत्र का परिणाम भारत के संविधान में 106वां संशोधन था, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू करने की बात कही गई. 2024 के चुनाव से ही इस आरक्षण को लागू करने की मांग को अनसुना कर दिया गया.

अब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले, जब इन दोनों विपक्ष-शासित राज्यों के सांसद चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, सरकार ने एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाया है, ताकि संविधान में संशोधन कर उसी महिला आरक्षण विधेयक को फिर से पारित किया जा सके – इस बार इसे जनगणना से अलग  करते हुए.

महिला आरक्षण का विचार मूल रूप से जनगणना से जुड़ा हुआ नहीं था. जनसंख्या के आधार पर यदि आरक्षण दिया जाए, तो महिलाओं के लिए 48-50% सीटें आरक्षित होनी चाहिए, न कि केवल एक-तिहाई (33%). दूसरी ओर, परिसीमन की प्रक्रिया में नवीनतम जनगणना के आंकड़ों को एक व्यापक ढांचे में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भारत की संघीय संरचना को मजबूत किया जा सके, न कि उसे कमजोर किया जाए. लेकिन सरकार स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण को एक औजार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि 2026 में 2011 की जनगणना के आधार पर एक विवादास्पद परिसीमन प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके.

महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के नाम पर किसी विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है. परिसीमन को सभी हितधारकों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श और सभी प्रासंगिक पहलुओं पर विचार करने के बाद ही किया जाना चाहिए, ताकि भारत की एकता – एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में – मजबूत हो सके.

महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए, वह भी संसद और विधानसभाओं की वर्तमान संरचना के आधार पर. भविष्य में यदि संसद या विधानसभाओं का विस्तार होता है, तो महिलाओं के लिए आरक्षण उसी अनुपात में स्वतः लागू हो जाएगा, जैसा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए होता है.

महिला आरक्षण अभी लागू करो! इसे परिसीमन से अलग करो! नए जनगणना के बाद ही निष्पक्ष परिसीमन करो!

–  दीपंकर भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा(माले)

18 April, 2026