आदिवासी संघर्ष मोर्चा पलामू प्रमंडल स्तरीय एक दिवसीय कन्वेंशन
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर से झारखंड के रामगढ़ जिला के पतरातू, रामगढ़, गोला व हजारीबाग जिला के डाडी अंचल-प्रखंड इकाई के नेतृत्व में आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर अंचल-प्रखंड मुख्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया. सैंकड़ो महिला-पुरुषों की भागीदारी में जोरदार नारेबाजी की गई और मांग पत्र अधिकारियों की अनुपस्थिति में अंचल के बड़ा बाबू को सुपुर्द की गई.
वक्ताओं ने कहा कि अंचल-प्रखंड कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण आदिवासियों की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है. आदिवासियों की जमीन अबतक पूर्ण रुप से आनलाईन नहीं की गई और न आनलाईन रसीद निर्गत की जा रही है. जिससे कई समस्या उत्पन्न हो रही है. लोगों का जाति प्रमाण नहीं बन रहा है. जमीनों की खरीद-बिक्री नहीं हो रही है. अंचल से वंशावली का सत्यापन नहीं होता है. आवेदन देने के बावजूद आदिवासियों के भू-वापसी आदेशों पर वर्षों से अंचल अधिकारी द्वारा मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल नियुक्त कर दखल दिहानी नहीं दिलाया जा रहा है. भू-दान जमीनों का जमाबंदी नहीं की जा रही है. सभी आदिवासियों का वृद्धा पेंशन नहीं दी जाती है. आवासीय निर्माण कार्य में जनसेवक व मुखिया के द्वारा गरीब आदिवासियों से घूस लिया जाता है जिस पर रोक लगनी चाहिए. कार्यालय में भ्रष्टाचार के कारण आदिवासी लोग अपने काम के लिए सालों चक्कर लगाते रहते हैं. धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व देवकीनंदन बेदिया (आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक), नरेश बडाईक, नीता बेदिया राज्य कमेटी सदस्य, नागेश्वर मुंडा प्रखंड - अध्यक्ष, सचिव - मनोज सोरेन, दशमी देवी, मुनिया देवी, सुनंदा देवी, सुनीता देवी, गीता मुंडा, अनीता देवी, क्रांति कुमारी, सुभाशो देवी, देवकी बेदिया, बृज नारायण मुंडा, सोहन बेदिया, धनंजय मुंडा, रमेश बेदिया, भुनेश्वर बेदिया, नारायण मुंडा, देवानंद गोप, उमेश गोप, प्रेमसागर महतो आदि ने किया.
रामगढ़ अंचल सरयू बेदिया, शैलेंद्र बेदिया, लाल कुमार बेदिया, अजीत बेदिया, चेतलाल बेदिया, फूलचंद बेदिया, रूपलाल बेदिया, महादेव राम, फूलचंद करमाली, अनोद बेदिया, अनवर अंसारी, बसंत प्रजापति, जयकिशन बेदिया, रतन बेदिया, प्रीतम बेदिया, राजेश बेदिया, जगदीश बेदिया,रवि बेदिया एवं रुदल राय शामिल थे.
17 अगस्त 2025 को लातेहार जिला अंतर्गत मनिका प्रखंड के लोहिया भवन में एक दिवसीय पलामू प्रमंडलीय कन्वेंशन का आयोजन किया गया. यह कन्वेंशन झारखंड के मूलवासियों, आदिवासियों, दलितों और वंचित तबकों के हक-हकूक की आवाज बुलंद करने तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा हेतु एकजुटता का प्रतीक बना.
इस सम्मेलन में कई प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. विशिष्ट अतिथियों में जगरनाथ उरांव, देवकीनंदन बेदिया, आर.डी. मांझी, कामरेड बिरजू राम आदि शामिल थे.
वक्ताओं ने आदिवासी समाज पर हो रहे सुनियोजित चौतरफा हमला विस्थापन, रोजगार, जल-जंगल-जमीन, भूमि अधिग्रहण, प्राकृतिक संसाधनों की लूट, धार्मिक, सांस्कृतिक, हमले व राजनीतिक उपेक्षा पर खुलकर अपनी बात रखीं.
कहा कि सरकारी योजनाएं और कार्यालय हमेशा आदिवासियों की भूमि पर ही क्यों बनाए जाते हैं? हजारों एकड़ सरकारी जमीन पड़ी है. यदि आदिवासियों से उनकी जमीन छीनी गई, तो उनका अस्तित्व और पहचान ही समाप्त हो जाएगी. हमें सीएनटी एक्ट को सख्ती से लागू कराना होगा.
यह भी कहा कि केंद्र सरकार के इशारे पर भाजपा-आरएसएस के सहयोग से आदिवासियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है. नक्सल के नाम पर आदिवासियों के ऊपर दमन व उनकी हत्या की जा रही है. उनकी जमीनें छिनी जा रही हैं और कॉर्पारेट घरानों के हाथों सौंपी जा रही हैं. यह आदिवासी समाज की पहचान को मिटाने की साजिश है. हमें एकजुट होकर संघर्ष करना होगा. जल-जंगल-जमीन और अपनी पहचान को बचाने के लिए आंदोलन आवश्यक है. इसके तहत 29 अगस्त को राजभवन के समक्ष एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. हम हजारों की संख्या में वहां जुटेंगे. कहा कि हमने हमेशा आदिवासियों और दलितों के सवालों पर संघर्ष किया है – चाहे वह छोटू खरवार का मुद्दा हो, मध्य प्रदेश या मणिपुर की घटनाएं हों. हमारी पार्टी हर परिस्थिति में आदिवासियों के साथ है.
21 सदस्यीय प्रमंडलीय कमेटी का गठन किया गया. कन्वेंशन में 15 सूत्रीय घोषणापत्र पारित किया गया, जिसमें स्थानीय नीति लागू करने, पेशा अधिनियम के तहत झारखंड पेशा नियमावली का संशोधन कर सख्ती से लागू करने, बंदोबस्ती पर्चा की रसीद काटने तथा जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का पूर्ण अधिकार व सीएनटी/एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू करने आदि की मांगें शामिल थीं.