29 जनवरी 2026 को जन संस्कृति मंच ने पटना में जनकवि गोरख पांडे की स्मृति दिवस के अवसर पर उनकी रचनाओं को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया. यह कार्यक्रम पटना के दुजरा स्थित राजेंद्र घाट के खुले मैदान में संपन्न हुआ.
कार्यक्रम की शुरुआत गोरख पांडे के व्यक्तित्व और उनके रचनात्मक अवदान को स्मरण करते हुए हुई. इस अवसर पर पटना के युवा कवियों ने कविता-पाठ किया. कविता-पाठ करने वाले कवियों में अंचित, गुंजन उपाध्याय पाठक, राजीव रंजन, साईं प्रतीक, शाश्वत, नंदिता, नेहा, रूपक कुमार, जकी और वंश प्रभात शामिल थे. प्रस्तुत कविताओं में समकालीन सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक विडंबनाएं, प्रेम, स्मृति और प्रतिरोध के स्वर स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए. युवा कवियों की रचनाओं में गोरख पांडे की परंपरा से संवाद करते हुए नई संवेदनाओं की अभिव्यक्ति देखने को मिली.
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जन संस्कृति मंच के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गोरख पांडे के जनगीत रहे. समता, पुनीत, प्रमोद यादव, राजन, रिया और रुनझुन ने सामूहिक तथा एकल प्रस्तुतियों के माध्यम से गोरख पांडे के गीतों को स्वर दिया.
‘हमारे वतन की नई जिंदगी हो’, ‘एक दिन राजा मरले आसमान में उड़त मैना’, ‘पैसे की बाहें हजार’, ‘गुलमिया अब हम नाहीं बजइबो’, ‘समय का पहिया चले’ और ‘जनता के आवे पलटनिया’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से गहराई तक छू लिया. राजेन्द्र घाट पर उपस्थित लोगों ने गीतों के साथ स्वर मिलाकर जनगीतों की जीवंत परंपरा को सजीव कर दिया.
कार्यक्रम में दुजरा क्षेत्र की आम जनता, विशेष रूप से महिलाओं की, भागीदारी उल्लेखनीय थी.