वर्ष 35 / अंक - 12 / कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में ‘नरेगा संघर्ष मोर्च...

कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में ‘नरेगा संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले साझा कार्यक्रम

कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में ‘नरेगा संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले साझा कार्यक्रम

का. राजाराम सिंह समेत कई विपक्षी सांसदों ने संबोधित किया 

17 मार्च 2026 को दिल्ली के कॉन्स्टिटृयूशन क्लब ऑफ इंडिया में ‘नरेगा संघर्ष मोर्चा’ द्वारा आयोजित साझा कार्यक्रम में देशभर के खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों ने हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम के माध्यम से तमाम यूनियनों और संगठनों ने एकजुट होकर ‘मनरेगा बचाओ’ और ‘वीबी-ग्राम जी को खारिज करो’ का पुरजोर आह्वान किया. अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व भाकपा(माले) के सांसद राजाराम सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम सिंह गहलावत और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक गोपाल रविदास समेत अन्य नेता और विपक्षी दलों के कई सांसदों ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

का. राजाराम सिंह ने मजदूरों की मांगों का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि जब वीबी-ग्राम जी सदन में आया तब इंडिया गठबंधन ब्लॉक के सभी सांसदों ने इसका बढ़ चढ़कर विरोध किया. इसके बावजूद भी यह कानून पारित हो गया. इस मौके पर हमने यह भी देखा कि एनडीए गठबंधन के अन्य दलों के नेताओं का भी भाजपाकरण हो गया है. अब उनमें और भाजपा में फर्क करना मुश्किल है. वे लगभग भाजपा के गिरफ्त में आ चुके हैं. वीबी-ग्राम जी कानून के खिलाफ लड़ाई अभी भी जारी रहेगी.

उन्होंने वहां आए विपक्षी दलों के सभी सांसदों से ‘मनरेगा बचाओ’ और ‘वीबी-ग्राम जी को खारिज करो’ हस्ताक्षर अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया और मनरेगा की पूर्ण वापसी के लिए प्रधानमंत्री से एक प्रतिनिधि मंडल बनाकर मिलने व ज्ञापन सौंपने का सुझाव दिया.

कहा कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्र के गरीब मजदूरों के लिए एक मजबूत आर्थिक संबल बना था. यह एक ऐसा कानून था जो आम ग्रामीणों व गरीब तबके के लोगों के लिए जो अकुशल श्रमिक हैं, केवल शारीरिक श्रम करना जानते हैं और रोजी-रोटी के हर साधन से वंचित हैं उनको कानूनी तौर पर रोजगार मांगने का अधिकार देता था. अब सरकार ने वीबी-ग्राम जी जैसी योजना ले आकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है.

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ते मशीनीकरण के कारण अब खेती का काम महज 10-15 दिनों में सिमट जाता है. ऐसी स्थिति में, मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार को बढ़ाकर कम से कम 200 दिन किया जाना चाहिए और न्यूनतम दैनिक मजदूरी को भी 600 रूपये से ऊपर निर्धारित करना चाहिए. हमने इस अधिकार के लिए संघर्ष किया है और हमारी यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी क्योंकि गरीब मजदूरों के उत्थान के बिना विकसित भारत की कल्पना करना असंभव है. हमें विकास के ऐसे मापदंड तय करने होंगे जिसमें हर नागरिक को समान शिक्षा, समान स्वास्थ्य सुविधाएं, भोजन की सुरक्षा, रोजगार की गारंटी और उन्नति के समान अवसर सुनिश्चित हों.

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां मनरेगा का 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है. विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार से इसका तत्काल भुगतान करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने मनरेगा की पूर्ण बहाली और वीबी ग्राम जी को खारिज करने की मांग पर हर पंचायत में बड़ी गोलबंदी का आह्वान किया.

उन्होंने बिना किसी ट्रायल या तकनीकी परीक्षण के नए कानून के नाम पर आपत्ति जतायी और इसमें फिंगरप्रिंट और और डिजिटल अटेंडेंस जैसे नियम लाकर गरीब मजदूरों को ही कटघरे में खड़ा करने का विरोध किया.

पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि मनरेगा को सोची-समझी साजिश के तहत खत्म किया गया. मनरेगा को अचानक खत्म किए जाने की वजह से मजदूरों का पुराना बकाया भुगतान रुक गया है. कोई भी रोजगार नहीं मिल पाने की वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है. नए सिरे से जॉब कार्ड बनने की प्रक्रिया में भी बहुत बड़ी धांधली हो रही है. मजदूरों से इस नाम पर 300 से 800 रूपये तक वसूले जा रहे हैं.

उन्होंने अप्रैल महीने में संपूर्ण बिहार में मनरेगा की पुनर्बहाली के लिए एक हजार से ज्यादा ग्राम सभाएं करने और हस्ताक्षर अभियान चलाकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने का अभियान चलाने की जानकारी दी.


21 March, 2026