बुलडोजर राज के खिलाफ लड़ाई होगी और तेज : का. दीपंकर भट्टाचार्य
भाकपा(माले) और आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने 28 जनवरी 2026 को मिर्जापुर के सिटी क्लब में एक विशाल जनसभा आयोजित की. जिले में चल रहे आदिवासी वनाधिकार और भूमि अधिकार संघर्ष की पृष्ठभूमि में आयोजित सभा में उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग शामिल हुए. इस जनसभा का उद्देश्य वनाधिकार कानून, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को मजबूती से उठाना और इस संघर्ष का नेतृत्व कर रहे दलित-आदिवासी नेतृत्व तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों के विरोध को सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना था.
जनसभा की तात्कालिक पृष्ठभूमि मिर्जापुर जिले के तेंदुआ खुर्द गांव में चल रहे संघर्ष हैं, जहां आदिवासी समुदाय वनाधिकार कानून के तहत अपने वैधानिक व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों की मांग कर रहा है. गांव में यह संघर्ष भाकपा(माले) की जिला सचिव कामरेड जीरा भारती के नेतृत्व में आगे बढ़ा. जिसके बाद पुलिसिया दमन करते हुए भाकपा(माले) के राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव तथा मिर्जापुर सचिव जीरा भारती समेत दलित-आदिवासियों को हत्या के प्रयास जैसी संगीन आपराधिक धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.
जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये गिरफ्तारियां किसी कानून के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वनाधिकार आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थीं. उन्होंने कहा, ‘हमारे नेताओं को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम किया, बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि वे उन आदिवासी समुदायों की आवाज बनकर खड़े हैं, जिन्हें संसद द्वारा बनाए गए वनाधिकार कानून के तहत अधिकार प्राप्त है.’
का. दीपंकर ने यह भी कहा कि जिस बुलडोजर को राजनीतिक रूप से भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई का प्रतीक बताया जाता है, वही वास्तव में गरीबों, भूमिहीनों और आदिवासियों के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है. वनाधिकार की मांग करने वाले आदिवासियों को अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है, जबकि बड़े पैमाने पर हो रहे वन विनाश और कॉर्पारेट द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की लूट की अनदेखी की जा रही है. यह वनाधिकार कानून की सीधी अवहेलना है.
महासचिव ने कहा कि मिर्जापुर की यह जनसभा लोकतांत्रिक प्रतिरोध की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि चाहे जंगल हो, रोजगार हो या मतदान का अधिकार, आज लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों की मांग करने पर दंडित किया जा रहा है. मिर्जापुर की यह एकजुटता दिखाती है कि डर और दमन के जरिए इन संघषों को चुप नहीं कराया जा सकता.
सभा को संबोधित करते हुए राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव ने कहा कि प्रदेश में बुलडोजर संविधान के ऊपर चलाया जा रहा है और इसके खिलाफ आवाज उठाने पर पुलिसिया दमन किया जाना दिखाता है कि प्रदेश में कानून का नहीं बल्कि तानाशाही का शासन कायम है, जिसके खिलाफ भाकपा(माले) संघर्ष कर रही और बुलडोजर राज को ध्वस्त करेगी.
मिर्जापुर की सचिव जीरा भारती ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बुलडोजर राज और दमन के बल पर गरीबों और आदिवासियों की आवाज दबाई नहीं जा सकती है. पार्टी ने लड़ करके बुलडोजर को पीछे धकेला. यह लड़ाई इस देश के संविधान और स्वाभिमान को बचाने की है, जिसको लड़कर जीता जाएगा.
व्यापक विरोध और राजनीतिक दवाब के बाद कामरेड सुधाकर यादव और कामरेड जीरा भारती को रिहा कर दिया गया है, लेकिन पार्टी ने स्पष्ट किया कि मुद्दा केवल गिरफ्तारी और रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी अधिकारों की सामूहिक दावेदारी को अपराध की तरह पेश करने की प्रवृत्ति का है.
जनसभा में विभिन्न लोकतांत्रिक और राजनीतिक धाराओं से जुटे लोगों ने भी भाग लिया और समर्थन व्यक्त किया. इनमें पूर्व विधायक एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तथा वर्तमान में कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय समन्वयक मनौती चौधरी, वरिष्ठ गांधीवादी और सिटिजंस फोरम के अध्यक्ष अरुण मिश्रा, कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता राम सिंह तथा मजदूर यूनियनों से लंबे समय तक जुड़े रहे अधिवक्ता मोहम्मद अशफाक खान शामिल थे.
जनसभा का मुख्य केंद्र वनाधिकार संघर्ष रहा, लेकिन भाकपा(माले) ने इसे मजदूरों और गरीबों के अधिकारों पर हो रहे व्यापक हमलों के संदर्भ में भी रखा. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि हाल के वर्षों में श्रन कानूनों और ग्रामीण रोजगार से जुड़े ढांचों में किए गए बदलाव एक ही दिशा की ओर संकेत करते हैं, जहां सामूहिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोविड काल में बड़े पैमाने पर हुए पलायन के दौरान मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को सहारा दिया था और जरूरत इस कानून को मजबूत करने की थी, न कि उसे कमजोर करने की. उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एमआईआर) के जरिए मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाग काटे जाने पर भी चिंता व्यक्त की. कहा कि सत्यापन के नाम पर गरीब और हाशिए पर खड़े नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है और इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देकर खतरनाक माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बंगाली भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.
सभा मे 12 फरवरी को होने वाले देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए 23 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेरने का आह्वान किया गया. सभा की अध्यक्षता भाकपा(माले) की राज्य स्थाई समिति के सदस्य और आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राज्य संयोजक सुरेश कोल ने की. संचालन किसान महासभा के राज्य सचिव कामरेड ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने किया. जनसभा में केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड कृष्णा अधिकारी, भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड रामजी राय, किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड जयप्रकाश नारायण, खेग्रामस प्रदेश अध्यक्ष श्रीराम चौधरी व सचिव राजेश साहनी, ऐपवा राज्य सचिव कुसुम वर्मा, आइसा राज्य अध्यक्ष मनीष कुमार, आरवाईए राज्य सचिव सुनील मौर्य, भाकपा(माले) नेता रामप्यारे राम, रामकृत बियार, चिंता वियार आदि उपस्थित थे. सभा में पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से हजारों की संख्या में मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं. सभा की शुरुआत में जेल से रिहा हुए माले नेताओं और तेंदुआ खुर्द के निवासियों को सम्मानित किया गया. अंत में सभा से राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किए गए.
सभा से पारित राजनीतिक प्रस्ताव
1. यह प्रतिरोध सभा मिर्जापुर सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में वन भूमि, ग्राम समाज, सीलिंग, बंजर, परती व पट्टे की जमीनों पर आबाद गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकने और आश्रय व आजीविका के अधिकार की रक्षा करने की मांग करती है.
यह सभा भूमाफियाओं के अवैध कब्जे वाली वन व पट्टे की भूमि को जब्त कर गरीबों में वितरित करने की मांग करती है.
2. यह प्रतिरोध सभा वनाधिकार कानून 2006 को उसकी मूल भावना के अनुरुप, आदिवासियों और वनवासियों को जल, जंगल, जमीन व वनोपज पर कानूनी अधिकार देने के लिए, न कि उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित करने के लिए, लागू करने की मांग करती है.
3. यह प्रतिरोध सभा गरीबों के अलावा मुस्लिमों को बुलडोजर कार्रवाई का निशाना बनाने, उनकी इबादतगाहों, मजारों व मदरसों पर बुलडोजर चलाने और बनारस जैसे शहर में ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त करने की कार्रवाइयों का सख्त विरोध करती है.
4. यह प्रतिरोध सभा भूमि व वनाधिकार के लिए, घर व आजीविका बचाने के लिए गरीबों, आदिवासियों के संघर्षों को संगठित करने और उनका नेतृत्व करने के कारण भाकपा(माले) के राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव, जिला सचिव कामरेड जीरा भारती और संघर्षरत ग्रामीणों को हत्या के प्रयास जैसी गंभीर आपराधिक धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की अलोकतांत्रिक व दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है.
यह सभा मिर्जापुर के लालगंज थाने में दर्ज फर्जी मुकदमा संख्या 04/2026 दिनांक 03-01-26 को, जिसके तहत भाकपा(माले) नेताओं व ग्रामीणों को जेल भेजा गया, तत्काल निरस्त करने और आंदोलनों के दमन पर रोक लगाने की मांग करती है.
यह सभा मिर्जापुर की भाकपा(माले) जिला सचिव व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा की राष्ट्रीय नेता कामरेड जीरा भारती का गत 3 जनवरी को गिरफ्तार करने के बाद हिरासत में हिंसक व बर्बर उत्पीड़न करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को दंडित करने की मांग करती है.
यह सभा विगत दो-तीन जनवरी की रात तेंदुआ खुर्द गांव (थानाक्षेत्र लालगंज) में रात दो बजे ग्रामीणों के घरों में घुसकर महिलाओं, लड़कियों से मारपीट व दुर्व्यवहार करने वाले वन अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग करती है.
5. यह प्रतिरोध सभा योगी सरकार के असंवैधानिक, गैरकानूनी, विध्वंसकारी, सांप्रदायिक बुलडोजर राज के खिलाफ सभी लोकतंत्र पसंद व न्यायप्रिय शक्तियों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान करती है.
6. यह प्रतिरोध सभा केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर 12 फरवरी को होने वाली अखिल भारतीय हड़ताल का समर्थन और उसे सफल बनाने का आह्वान करती है.