400 से अधिक दुकानें जलकर राख, सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
कटिहार जिले के कुरसेला स्थित एक हाट में, जो कुरसेला स्टेट की जमीन पर लंबे समय से स्थापित हैं, महाशिवरात्रि की रात 7 बजे भीषण आग लगने से लगभग 400 स्थायी दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं. इस हाट बाजार में छोटी-बड़ी लगभग 600 दुकानें थीं. इनमें कपड़ा, चूड़ी-लहठी, मसाला व आलू-प्याज की दूकानों समेत कई जनरल स्टोर भी थे. आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए कुरसेला एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र माना जाता है. यह हाट खासतौर पर आमलोगों के लिए सस्ती खरीददारी की जगह थी.
भाकपा(माले) के पूर्व विधायकों – का. महबूब आलम और महानंद सिंह तथा समकालीन लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर, संस्कृतिकर्मी पुनीत पाठक और स्थानीय मुखिया अविनाश कुमार की टीम ने 18 फरवरी 2026 को वहां का दौरा करके अगलगी के मामले और उससे हुई क्षति का जायजा लिया.
आग लगने के कारणों पर संशय
घटना महाशिवरात्रि का जुलूस निकलने के दौरान हुई. स्थानीय स्तर पर दबे जुबान से यह चर्चा है कि जुलूस के दौरान अगरबत्ती या दीया जलाने से आग लगी. वहीं कुछ लोगों ने शॉर्ट सर्किट को भी संभावित कारण बताया. प्रशासन की ओर से भी आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अगरबत्ती या दीया से ही आग लगने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है.
संकरा रास्ता, दमकल को पहुंचने में हुई भारी परेशानी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाजार क्षेत्र अत्यंत संकरा है, जिसके कारण दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी कठिनाई हुई. आग ने तेजी से कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों रुपये मूल्य का सामान जलकर नष्ट हो गया.
प्रति दुकान 2 लाऽ से 50 लाख रूपये तक का नुकसान, महाजनों के कर्ज में डूबे थे व्यापारी
पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि अधिकांश लोगों ने महाजनों से कर्ज लेकर दुकानें खोली थीं. अनुमान है कि प्रति दुकान 2 लाख से 50 लाख रुपये तक का सामान जलकर खाक हो गया. आगजनी के बाद कई दुकानदार फफक-फफक कर रोते दिखे. वे अपनी आजीविका के पूरी तरह समाप्त हो जाने की बात कहते रहे.
350 पीड़ितों की सूची लेकर डीएम से मिले प्रतिनिधि
भाकपा(माले) जांच टीम ने 350 प्रभावित दुकानदारों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी, कटिहार से मुलाकत कर प्रशासन से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की.
जिलाधिकारी द्वारा यह कहा गया कि ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. इस पर प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से मांग की कि घटना को विशेष आपदा घोषित कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए, महाजनी कर्ज को माफ किया जाए या उसकी भरपाई सरकार करे.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
जांच टीम ने दूकानदारों समेत स्थानीय लोगों तथा कुरसेला स्टेट के उत्तराधिकारी पंकज सिंह – जिनकी जमीन पर यह हाट अवस्थित है – से भरी मुलाकता की. का. महबूब आलम को जानने-पहचानने वाले स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या इस दौरान मौजूद रही.
पीड़ितों का आक्रोश
दुकानदारों का कहना है कि सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही है. कई लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी उजड़ने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है.
जांच टीम ने सरकार से घटना को विशेष आपदा घोषित किया करने, दुकानदारों को हुई क्षति का आकलन कर समुचित मुआवजा देने, महाजनों के कर्ज को माफ या सरकारी स्तर पर समायोजित करने, बाजार का पुनर्वास करने और अग्नि से सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था करने की भी मांग की.
कुरसेला बाजार अग्निकांड से न केवल सैकड़ों व्यवसायी व दूकानदार आर्थिक रूप से बर्बाद हुए हैं, बल्कि इसने पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डाला है. अब सभी की नजर राज्य सरकार के फैसले पर टिकी है.