बिहार शिक्षा परियोजना परिषद अंतर्गत राज्य के सभी प्रखडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय में दैनिक मजदूरी पर कार्यरत हजारों मुख्य व सहायक रसोइयों, आदेशपालों व रात्रि प्रहरियों की मजदूरी में लूट मचायी जा रही है. दैनिक मजदूरी कानून का उल्लंघन कर मात्र 150 रु. मजदूरी पर सात वर्षों से खटाया जा रहा है. केंद्र व राज्य की एनडीए सरकार ने इनकी मजदूरी में पिछले सात वर्षों में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है. इन्हें वर्षों में एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिली है. इनको साल के 10 माह की ही मजदूरी दी जाती है. इससे आक्रोशित कस्तूरबा गांधी विद्यालय के सैकड़ों दैनिक कर्मियों ने 16 सितंबर को बिहार राज्य कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय दैनिक कर्मी संघ (ऐक्टू) के आ“वान पर पर पटना के गर्दनीबाग में धरना दिया. धरनार्थियों ने स्थल पर मौजूद दंडाधिकारी को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के नाम सात सूत्री मांग पत्र सौंपा.
संघ अध्यक्ष जितेंद्र कुमार व महासचिव रेणु देवी की अध्यक्षता व संचालन में हुए धरने को मुख्य रूप से भाकपा(माले) एमएलसी सह स्कीम वर्कर्स नेत्री शशि यादव व ऐक्टू नेता रणविजय कुमार ने भी संबोधित किया.
शशि यादव ने नीतीश मोदी सरकार पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के चतुर्थ वर्गीय दैनिक मजदूरों के मजदूरी और अधिकारों की हकमारी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चरम महंगाई में सात वर्षों से मजदूरी में एक रुपए की भी वृद्धि नहीं करना अमानवीय होने के साथ ही बड़ा अपराध है. उन्होंने मांग किया की सरकार रिक्त पदों पर इनका स्थाई समायोजन कर इनकी सेवा को नियमिति करे. साथ ही, बिहार सरकार के दैनिक मजदूरी कानून को लागू करे. उन्होंने दैनिक कर्मियों से 2025 के विधानसभा चुनाव में सरकार से ‘बदला लेने बदल डालने’ का आह्वान किया.
ऐक्टू नेता रणविजय कुमार ने कहा कि बिहार सरकार न्यूनतम मजदूरी कानून के तहत मुख्य रसोइया को दैनिक 536 रु. दैनिक मजदूरी की जगह मात्र 150 रु. और सहायक रसोइया, आदेशपाल, रात्रि प्रहरी को 440 रु. दैनिक मजदूरी के बदले मात्रा 150 रु. मजदूरी दे रही है. दैनिक कर्मियों को वर्ष में 12 माह के बजाए मात्र 10 माह का ही मजदूरी भुगतान कर रही है. यह न्यूनतम मजदूरी व श्रम कानून विरोधी अपराध है. उन्होंने राज्य की नीतीश-भाजपा और केंद्र की मोदी की डबल इंजन सरकार पर मजदूरी चोरी और श्रम कानून विरोधी अपराध करने का आरोप लगाया.
महासचिव रेणु देवी ने बताया कि कस्तूरबा स्कूल में एक दिन भी छुट्टी नहीं दी जाती. उन्होंने सात सूत्री मांगे बताते हुए कहा कि उक्त चार स्थाई पदों पर वर्षों से नियुक्ति बंद है इसलिए उक्त चारों पद पर काम करने वाले दैनिक कर्मी का समायोजन कर उन्हें नियमित किया जाए, मजदूरी राशि को बढ़ाते हुए दैनिक मजदूरी श्रम कानून के तहत मजदूरी भुगतान किया जाए और साथ ही 10 नहीं, शिक्षकों के समान 12 माह का मजदूरी भुगतान किया जाए, सेवा में मृत्यु पर 4 लाख रुपये का अनुदान, ड्रेस, ईपीएफ, ईएसआई लाभ तथा सभी तरह के छुट्टियों का लाभ उन्हें मिले और और कर्मियों को विद्यालय में अलग से कमरा मिले.
धरना को संगठन के कोषाध्यक्ष एजाज अहमद, भागलपुर से संजय कुमार, औरंगाबाद की सुनीता कुमारी, बक्सर के दीपक कुमार, बांका की सुषमा कुमारी, गया से पूजा कुमारी, विकास कुमार यादव और भागलपुर से विनोद कुमार दास ने संबोधित किया.